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Kisau Dam Project Rajasthan : राजस्थान लंबे समय से अपने हिस्से के यमुना जल की मांग करता रहा है. किशाऊ बांध बनने से राजस्थान का ये हक (130 MCM पानी) सुनिश्चित हो जाएगा. सिंचाई और कृषि में क्रांति आएगी क्योंकि बांध बनने से यमुना के पानी का नियमित प्रवाह सुनिश्चित होगा. इससे राजस्थान के चूरू,सीकर और झुंझुनूं में सिंचाई के लिए पानी की भारी कमी दूर होगी.
पीने के पानी की समस्या : गर्मियों में सूखने वाले डार्क ज़ोन (Dark Zones) इलाकों में पीने के पानी की निर्बाध सप्लाई मिल सकेगी.
भूजल स्तर में सुधार : सतही पानी (Surface Water) मिलने से ट्यूबल और बोरवेल पर निर्भरता कम होगी, जिससे खतरनाक स्तर तक गिर चुके भूजल स्तर को वापस रीचार्ज होने में मदद मिलेगी.
राज्यों के बीच सहयोग की मिसाल बताया समझौता
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस समझौते को राज्यों के बीच आपसी सहयोग की मिसाल बताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 'सबका साथ-सबका विकास-सबका प्रयास-सबका विश्वास' के विजन को तेजी से आगे बढ़ाया है, जिससे राज्यों की सहमति से दशकों से अटकी परियोजनाओं का समाधान हो रहा है.
राजस्थान के लिए ये अन्य राज्यों से अलग कैसे है ?
किशाऊ परियोजना का प्रभाव सभी 6 राज्यों पर पड़ेगा, लेकिन राजस्थान की भौगोलिक और आर्थिक स्थिति इसे बाकी राज्यों से एकदम अलग बनाती है. पहाड़ी राज्यों (हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) को इस परियोजना से मुख्य रूप से 660 मेगावाट जलविद्युत (Hydropower) का लाभ मिलेगा. इसके विपरीत, राजस्थान का एकमात्र और सबसे बड़ा लक्ष्य 'जल सुरक्षा' है.
दिल्ली जैसे राज्य इस पानी का उपयोग मुख्य रूप से अपनी बढ़ती शहरी आबादी की 'पेयजल' जरूरतों के लिए करेंगे. वहीं, राजस्थान की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि प्रधान है. यहां यह पानी सिर्फ प्यास नहीं बुझाएगा, बल्कि किसानों की आजीविका और राज्य की जीडीपी (GDP) को सीधा बूम देगा.
बाकी 5 राज्यों की तुलना में राजस्थान का एक बड़ा हिस्सा रेगिस्तानी और शुष्क है. जहां अन्य राज्यों के लिए ये परियोजना एक 'अतिरिक्त जल स्रोत' है, वहीं राजस्थान के कई सूखाग्रस्त जिलों के लिए यह पानी 'अस्तित्व बचाने वाली संजीवनी' है. पानी की एक-एक बूंद की उपयोगिता यहां सबसे ज्यादा है.
क्या है किशाऊ बांध परियोजना ?
किशाऊ बांध एक घोषित 'राष्ट्रीय परियोजना' है, जिसे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी जो कि यमुना की प्रमुख सहायक नदी है पर बनाया जा रहा है. इस परियोजना में इस 236 मीटर ऊंचे बांध का मुख्य काम यमुना बेसिन के 6 राज्यों (राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश) के बीच पानी का उचित बंटवारा और जल संरक्षण करना है. चूंकि ये एक राष्ट्रीय परियोजना है. इसलिए 90% खर्च केंद्र सरकार उठाएगी और शेष 10% खर्च लाभार्थी राज्यों उठाएंगे.
करीब छह दशक पहले बनी थी परियोजना
किशाऊ परियोजना स्थापित करने की योजना करीब छह दशक पहले बनी. परियोजना को लेकर शुरुआती स्तर पर स्थल, भूगर्भीय परिस्थितियों और तकनीकी पहलुओं का अध्ययन हुआ. इसके बाद डीपीआर, लागत, जल बंटवारे और छह राज्यों की वित्तीय हिस्सेदारी जैसे मुद्दे सामने आते गए. परियोजना को वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा भी मिला, लेकिन अंतरराज्यीय सहमति का पेंच नहीं सुलझा पाया.उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश ने आगे बढ़कर संयुक्त उपक्रम बनाया, मगर परियोजना को वास्तविक गति देने के लिए छह राज्यों के बीच व्यापक सहमति जरूरी थी. जो अब मिल चुकी है. ये चौथा जल विवाद है जिसका निपटारा कर लिया गया है इससे पहले तीन और जल विवाद सुलझा लिये गये थे.
ERCP जल विवाद
राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच 17 साल पुराना ERCP समझौतो सुलझा था.प्रदेश में इस प्रोजेक्ट का काम तेजी से आगे बढ रहा है.ERCP में 9400 करोड के 3 पैकेज का काम चल रहे है. इस प्रोजेक्ट से पूर्वी राजस्थान 17 जिलों में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी मिलेगा.पूर्वी राजस्थान के 3.50 करोड़ लोगों को पीने का पानी मिल सकेगा.भूजल स्तर सुधरेगा.राजस्थान में औद्योगिक निवेश बढ़ेगा
यमुना जल विवाद
हरियाणा और राजस्थान के बीच 32 साल पुरान यमुना जल समझौता सुलझा. जल समझौते से शेखावाटी क्षेत्र के चूरू, सीकर, झुंझुनूं जिलों के कस्बों और गांवों को 577 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलेगा.प्रोजेक्ट की लागत 33,379 करोड़ रुपए है. इसमें से 3900 करोड़ रुपए भू अवाप्ति पर खर्च होंगे.3.6 डाया मीटर की तीन पाइपलाइन डाली जाएगी.
नर्मदा जल विवाद
47 साल पुराना राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच जल समझौता सुलझा.इस समझौते से राजस्थान के सुखाग्रस्त जिले जालोर, सांचौर, बाड़मेर और सिरोही को पानी मिल पाएगा.नर्मदा जल विवाद की शुरुआत 1969 में हुई थी, जिसके समाधान के लिए केंद्र सरकार ने नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया था 1979 में पानी का बंटवारा तय होने के बावजूद परियोजना की लागत, पुनर्वास और अन्य वित्तीय दावों को लेकर विवाद जारी रहा था.अब चौथा किशाऊ जल विवाद सुलझ गया है.
‘किशाऊ बहु-उद्देशीय परियोजना’ के ऐतिहासिक MoA पर हस्ताक्षर के लिए आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी, माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री @AmitShah जी एवं माननीय केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री @CRPaatil जी का हार्दिक आभार!
राजस्थान सहित 6 राज्यों के लिए यह… pic.twitter.com/W6vTv7qXnN— Bhajanlal Sharma (@BhajanlalBjp) September 15, 2026