)
कैसे पुलिस ने फिल्मी अंदाज में बिछाया जाल ?
पुलिस की इस कार्रवाई का सबसे दिलचस्प पहलू ये था कि आरोपियों तक पहुंचना आम पुलिस के लिए मुमकिन नहीं था. अपराधियों के ठिकाने मुंबई के बेहद घने और संवेदनशील इलाकों में ट्रेस हुए थे. ऐसे में सीधे दबिश ना देकर पुलिस ने भेष बदलकर पहले रेकी की.
मुंबई के कुर्ला और मानखुर्द इलाके क्यों बने बड़ी चुनौती ?
मुंबई के इन इलाकों में कम जगह में बड़ी संख्या में लोग रहते हैं. गलियां इतनी संकरी और घुमावदार होती हैं कि चार पहिया वाहन या पुलिस की गाड़ियां आसानी से नहीं जा सकतीं. इन इलाकों में झुग्गी-झोपड़ी क्लस्टर, अनधिकृत निर्माण और पुरानी चालों का जाल है, जहां एक घर से दूसरे घर की छत या खिड़कियां आपस में सटी होती हैं. ऐसे इलाके में पुलिस के लिए आरोपियों को पकड़ना आसान नहीं था. इसलिए पुलिस ने दो दिन तक इन इलाकों में भेष बदलकर रेकी की. जोधपुर पुलिस के कांस्टेबल किशनाराम और रामनरेश ने गैस मैकेनिक का भेष धरा और जब पहचान पुख्ता हो गयी तो पुलिस ने आरोपियों को धर दबोचा.
शुरुआत कैसे हुई ? कैसे फैला था स्नैपचैट का जाल ?
ये पूरा मामला जोधपुर ग्रामीण के महिला थाने में दर्ज रिपोर्ट से जुड़ा है. पीड़िता ने पुलिस को बताया था कि उसने स्नैपचैट पर 'वर्क फ्रॉम होम' का विज्ञापन देखा था. संपर्क करने पर आरोपियों ने ऑनलाइन काम दिलाने के नाम पर पहले उसका आईडी प्रूफ और हस्ताक्षर लिए. इसके बाद उसे सोशल मीडिया की रील्स लाइक-शेयर करने और रिव्यू करने का आसान काम सौंपा गया.

न्यूड वीडियो टास्क और ब्लैकमेलिंग का काला खेल
जानकारी के मुताबिक साजिश के तहत काम के दौरान आरोपियों ने पीड़िता को 'न्यूड फोटो-वीडियो टास्क' पूरा करने के नाम पर फंसा लिया और उसकी निजी तस्वीरें और वीडियो तक हासिल कर लीं. इन निजी पलों को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर पीड़िता को लगातार ब्लैकमेल किया गया और उससे पैसे वसूले गए. हद तो तब हो गई जब 11 दिसंबर 2025 को मुख्य आरोपी जोधपुर आया और पीड़िता को एक होटल में बुलाकर उसके साथ रेप किया. पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद जब आरोपियों के मोबाइल और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की गई, तो होश उड़ाने वाले खुलासे होने लगे. मुख्य आरोपी के मोबाइल से करीब 30 युवतियों के न्यूड वीडियो और चैटिंग बरामद हुई.
'रेडस्टेड' (Redsted) नाम से बनाई गई एक फर्जी प्रोफाइल
इस प्रोफाइल में 200 से ज्यादा युवतियों की गोपनीय जानकारी मिली, जिसमें उनके फोन नंबर, ईमेल आईडी और किए गए टास्क का पूरा रिकॉर्ड था. इस सिंडिकेट के शिकार हुई युवतियों में अकेले राजस्थान की करीब 10 और मुंबई की 50 से ज्यादा युवतियां शामिल हैं. मुंबई के मरीन ड्राइव थाने में भी इस गैंग से जुड़ी एक अन्य पीड़िता द्वारा मामला दर्ज कराए जाने की बात सामने आई है.

किसकी निगरानी में हुई कार्रवाई ?
इस पूरे ब्लाइंड केस को सुलझाने के लिए जोधपुर ग्रामीण पुलिस ने उच्च स्तर पर रणनीति बनाई. एसपी पंकज यादव के निर्देशन और एएसपी रामेश्वरलाल के सुपरविजन में ये कार्रवाई की थी. साइबर सेल प्रभारी रमेश कुमार सर्वटा के नेतृत्व में बनी टीम ने मुंबई में डेरा डालकर मुख्य आरोपी फैजान अहमद (निवासी शिवाजी नगर, मानखुर्द, मुंबई) और सह-आरोपी आमीर हुसैन (निवासी साहेबगंज, झारखंड, हाल मुंबई) को गिरफ्तार किया. पुलिस अब अन्य पीड़िताओं से संपर्क कर उनकी काउंसलिंग और आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है.