Jodhpur News: पंचायतीराज चुनाव की सियासी चौसर पर इस बार जोधपुर में तस्वीर बदली-बदली नजर आ रही है. जिले की राजनीति में लंबे समय से प्रभाव रखने वाला मदेरणा परिवार पहली बार जिला परिषद के चुनावी मैदान से बाहर है. जिला परिषद के पुनर्गठन और फलोदी के अलग जिला बनने के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच कांग्रेस की ओर से मदेरणा परिवार की मां-बेटी किसी भी वार्ड से चुनाव नहीं लड़ रही हैं. इसे लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं.
ओसियां से भाजपा विधायक सियोल ने कांग्रेस और मदेरणा परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि हार के डर से वे चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. उन्होंने खुली चुनौती देते हुए कहा कि ओसियां में जिला परिषद के आठ वार्ड हैं, मदेरणा परिवार किसी एक वार्ड से चुनाव लड़ने की हिम्मत दिखाए.
कांग्रेस में टिकटों की तौल-मोल हो रही
सियोल ने कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में टिकटों की तौल-मोल हो रही है और प्रत्याशियों के चयन पर विवाद है. ओसियां में कांग्रेस के प्रत्याशियों को उनकी इच्छा के विपरीत जबरन चुनाव लड़ाया जा रहा है.
इसके उलट भाजपा विधायक ने दावा किया कि पार्टी ने नेताओं और कार्यकर्ताओं से विचार-विमर्श कर सर्वसम्मति से मजबूत और जीतने वाले प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है. उन्होंने कहा कि भाजपा के पक्ष में एकतरफा माहौल है और जोधपुर जिला परिषद में पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ बोर्ड बनाएगी. अब चुनावी नतीजे तय करेंगे कि बदली सियासी बिसात पर किसका दांव सफल रहता है.
प्रत्याशियों के खर्च की सीमा तय, उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
पंचायती राज आम चुनाव 2026 में प्रत्याशियों के चुनावी खर्च पर प्रशासन की कड़ी नजर रहेगी. जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और सरपंच पद के उम्मीदवारों के लिए प्रचार खर्च की अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है. नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित प्रत्याशी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
तीनों पदों के लिए खर्च की सीमा निर्धारित
अतिरिक्त जिला कलेक्टर जवाहर चौधरी ने बताया कि जिला परिषद सदस्य के प्रत्याशी चुनाव प्रचार में अधिकतम 3 लाख रुपये, पंचायत समिति सदस्य के प्रत्याशी 1.5 लाख रुपये और सरपंच पद के प्रत्याशी एक लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे. सभी उम्मीदवारों को निर्धारित सीमा में रहकर प्रचार करने और खर्च का पूरा हिसाब रखने के निर्देश दिए गए हैं.
चुनावी खर्च की होगी निगरानी
प्रत्याशियों के खर्च पर नजर रखने के लिए लेखा प्रकोष्ठ गठित किया गया है. इसके लिए प्रभारी अधिकारी भी नियुक्त किए गए हैं. उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार पर किए गए खर्च का विवरण संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करना होगा. निर्धारित सीमा से अधिक खर्च पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रशासन सतर्क
चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए सेक्टर मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारी, एसडीएम और तहसीलदार लगातार क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं. पुलिस गश्त, राउंड और फ्लैग मार्च के जरिए भी निगरानी रखी जा रही है. शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी.
वीडियोग्राफी से रखी जाएगी नजर
जवाहर चौधरी के अनुसार, चुनावी गतिविधियों और महत्वपूर्ण घटनाओं की वीडियोग्राफी कराई जाएगी. सभी रिटर्निंग अधिकारियों को वीडियोग्राफर उपलब्ध कराए गए हैं. सेक्टर मजिस्ट्रेट को भी यह सुविधा मिलेगी. बड़ी सभाओं और विशेष आयोजनों के दौरान जरूरत के अनुसार अतिरिक्त वीडियोग्राफर तथा निगरानी अधिकारी तैनात किए जाएंगे. इससे चुनावी खर्च और अन्य नियमों के उल्लंघन के मामलों में साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जा सकेगी.