Jodhpur News: देशभर में गणेश उत्सव की धूम के बीच जोधपुर में गणपति पंडाल में तोड़फोड़ और भगवान गणेश की प्रतिमा को फेंकने का मामला सामने आया है. घटना का वीडियो सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया. बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौके पर एकत्र हो गए और घटना को लेकर आक्रोश जताया. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी.
गणपति पंडाल में तोड़फोड़ का मामला
मामला मंडोर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है. पुलिस के अनुसार, बुधवार सुबह गणपति पंडाल में तोड़फोड़ की गई. पंडाल को क्षतिग्रस्त करने के साथ ही वहां स्थापित गणेश प्रतिमा को हटाकर फेंकने की बात सामने आई है. घटना के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई.
पुलिस ने शुरू की मामले की जांच
मंडोर थाना अधिकारी सुरेश ने बताया कि प्रत्यक्षदर्शियों और मोहल्लेवासियों से मिली जानकारी के आधार पर मामले की जांच की जा रही है. प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि जिस स्थान पर गणपति प्रतिमा स्थापित की गई थी, वहां कुछ दिन पहले अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई थी. इसी स्थान पर बाद में मोहल्लेवासियों ने गणेश प्रतिमा स्थापित कर पंडाल बनाया था.
पार्क की जमीन पर कब्जे का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह स्थान मोहल्ले के पार्क की जमीन है और यहां अन्नदाराम बिश्नोई द्वारा कथित रूप से कब्जा किया गया था. लोगों के अनुसार, जोधपुर विकास प्राधिकरण ने कार्रवाई करते हुए स्थान को अतिक्रमण मुक्त करवाया था. इसके बाद मोहल्लेवासियों ने वहां गणपति प्रतिमा स्थापित की थी.
प्रतिमा हटाकर फेंकने का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बुधवार सुबह पंडाराम अपने कुछ साथियों के साथ मौके पर पहुंचा और गणेश प्रतिमा को वहां से हटाकर फेंक दिया. इसके बाद पंडाल में भी तोड़फोड़ की गई. घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी बढ़ गई.
दोषियों पर कार्रवाई की मांग
मौके पर मौजूद लोगों ने पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. फिलहाल पुलिस वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और मौके पर मौजूद अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटी है.
क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी?
कहानियों के अनुसार, गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है. हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, इसी दिन माता पार्वती ने गणेश जी की रचना की थी और इसके बाद में भगवान शिव ने उन्हें अपना पुत्र स्वीकार किया था.
भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और शुभता के देवता माना जाता है. किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी की पूजा करने की परंपरा है, इसलिए उन्हें 'विघ्नहर्ता' यानी बाधाओं को दूर करने वाला भी कहते हैं. गणेश चतुर्थी पर लोग घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणेश प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना करते हैं. इसके बाद परंपरा के अनुसार प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है.
Report-Rakesh Kumar Bhardwaj