App

पिलानी BITS की महिला प्रोफेसर को किया 3 महीने तक डिजिटल अरेस्ट, उड़ाए 7.67 करोड़!

CBI ने ऑपरेशन चक्र-VI के तहत डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी मामले में 5 और आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पिलानी BITS की महिला प्रोफेसर को करीब 3 महीने डिजिटल अरेस्ट रखकर 7.67 करोड़ रुपये ठगे गए थे. जांच में आरोपियों द्वारा बैंक खातों, APK फाइल और SMS अलर्ट के जरिए ठगी की रकम को छिपाने और ट्रांसफर करने का खुलासा हुआ है.

पिलानी BITS की महिला प्रोफेसर को किया 3 महीने तक डिजिटल अरेस्ट, उड़ाए 7.67 करोड़!
Image Credit: पिलानी BITS

Jhunjhunu News: डिजिटल अरेस्ट के जरिए देशभर में की जा रही साइबर ठगी के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो ने ऑपरेशन चक्र-VI के तहत बड़ी कार्रवाई की है. CBI ने डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों में पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

CBI के अनुसार, पिलानी बिट्स की महिला प्रोफेसर श्रीजाता डे को साइबर ठगों ने करीब तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखा. आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर प्रोफेसर को जांच और कार्रवाई का भय दिखाया. इस दौरान उनसे 7.67 करोड़ रुपये की ठगी की गई. CBI ने डिजिटल अरेस्ट सिंडिकेट के खिलाफ पहले देशभर में तीन मामलों को लेकर 20 राज्यों में 89 स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया था.

इन मामलों में पिलानी के अलावा गुजरात और कर्नाटक के मामले भी शामिल थे. जांच के दौरान CBI ने आकाश, राजा करमाकर और ज्योति रानी को पहले गिरफ्तार किया था. अब संकेत बस्तवार और पंकज दमाड़े, इटारसी, आरिफ उर्फ किंग भाई, हरीश पुरुषोत्तम यादव उर्फ हैरी और शशांक सिंह उर्फ रवि को गिरफ्तार किया गया है.

अलग-अलग खातों में रुपये ट्रांसफर
CBI के मुताबिक, संकेत बस्तवार और पंकज दमाड़े पर धोखाधड़ी की रकम हासिल करने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने और रकम को आगे ट्रांसफर कर उसकी पहचान छिपाने में भूमिका निभाने का आरोप है. वहीं, आरिफ उर्फ किंग भाई, हरीश यादव उर्फ हैरी और शशांक सिंह उर्फ रवि पर ऐसे बैंक खातों की व्यवस्था करने और रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर उसकी लेयरिंग करने में शामिल होने का आरोप है.

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने बैंक खाताधारकों के मोबाइल फोन में APK फाइल इंस्टॉल कर बैंक के SMS अलर्ट को इंटरसेप्ट किया और कथित तौर पर खातों को दूर से संचालित किया.

किन-किन खातों में पहुंचे रुपये? 
CBI अब यह पता लगाने में जुटी है कि पिलानी के प्रोफेसर से ठगी गई 7.67 करोड़ रुपये की रकम किन-किन बैंक खातों में पहुंची और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे. जांच एजेंसी डिजिटल अरेस्ट के इस संगठित नेटवर्क में शामिल अन्य आरोपियों की भी तलाश कर रही है.

क्या होता है डिजिटल अरेस्ट? 
डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) कानूनन कोई वास्तविक गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि यह साइबर अपराधियों द्वारा ठगी करने का एक खतरनाक और नया तरीका है. इस धोखाधड़ी में, स्कैमर्स खुद को पुलिस, सीबीआई (CBI), ईडी (ED) या कस्टम अधिकारी बताते हैं. वे व्हाट्सएप या स्काइप जैसी ऐप्स पर वीडियो कॉल करते हैं. वे झूठा आरोप लगाते हैं कि आपका आधार कार्ड, बैंक खाता या कोई पार्सल ड्रग्स तस्करी या मनी लॉन्ड्रिंग जैसे जुर्म में पकड़ा गया है. 

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Sneha Aggarwal

Sneha Aggarwal

मैं स्नेहा अग्रवाल जी राजस्थान न्यूज में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं और राजस्थान से जुड़ी हर बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी न्यूज़ पर पकड़ रखती हूं. क्राइम और कल्चर की खबरों में दिलचस्पी है. मुझे डिजिटल मीडिया का करीब 4 साल का साल का अनुभव है. इससे पहले मैं ZeeBihar में अपनी सेवाएं दे चुकी हूं. 4 साल के जर्नलिज्म करियर में लोकल, क्राइम, हेल्थ, एंटरटेनमेंट, वायरल और लाइफस्टाइल बीट पर काम किया है. मैंने यहां पर राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, ऑपेरशन सिंदूर समेत कई बड़े ईवेंट्स कवर किए हैं.
Read More