Jhunjhunu News/ Sandeep Kedia: राजस्थान के झुंझुनूं जिले के बगड़ में संचालित मां सेवा संस्थान विमंदित गृह की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. यहां रहने वाली एक युवती ने गृह संचालक बनवारीलाल सैनी, उनकी पत्नी और अन्य लोगों के खिलाफ दुष्कर्म, मारपीट और जबरन मजदूरी कराने सहित कई गंभीर आरोप लगाए हैं. युवती की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. वहीं, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की जांच में भी गृह की व्यवस्थाओं में कई कमियां सामने आई हैं.
सरकारी अनुदान से संचालित इस संस्थान में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने से निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं. मामला सामने आने के बाद अब पुलिस जांच के साथ विभागीय कार्रवाई पर भी लोगों की नजर है.
विभागीय जांच में सामने आईं व्यवस्थागत कमियां
मामले को लेकर शिकायतें सामने आने के बाद जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग के निर्देश पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की टीम ने विमंदित गृह का निरीक्षण किया. जांच के दौरान टीम को कई ऐसी कमियां मिलीं, जिन पर विभाग ने गंभीरता से ध्यान दिया है.
विभाग के उप निदेशक अरविंद ओला के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान गृह में मौजूद कर्मचारी संचालन से जुड़े जरूरी दस्तावेज जांच टीम को नहीं दिखा सके. इसके अलावा शौचालयों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं मिली और साफ-सफाई भी संतोषजनक नहीं पाई गई. बच्चों की यूनिफॉर्म की स्थिति ठीक नहीं थी, जबकि रसोईघर की व्यवस्था भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिली.

जांच में करीब 50 लोगों की जरूरत के हिसाब से डाइनिंग रूम सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं पाई गईं. इन कमियों के आधार पर विभाग ने तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार कर निदेशालय और जिला कलेक्टर को भेज दी है. अब रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जानी है.
युवती ने एफआईआर में लगाए गंभीर आरोप
विभागीय जांच के साथ इस मामले का दूसरा अहम पहलू युवती की शिकायत है. पीड़िता ने बगड़ थाने में दर्ज एफआईआर में गृह संचालक बनवारीलाल सैनी, उनकी पत्नी और अन्य लोगों पर दुष्कर्म, मारपीट और जबरन मजदूरी कराने के आरोप लगाए हैं.
शिकायत में जबरदस्ती बाल काटने, पर्याप्त खाना, चाय और पानी नहीं देने तथा कपड़े जलाने जैसे आरोप भी शामिल हैं. इन शिकायतों ने संस्थान में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और उनके साथ किए जाने वाले व्यवहार को लेकर चिंता बढ़ा दी है. एफआईआर में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है. पुलिस मामले की जांच कर रही है और अंतिम निष्कर्ष जांच तथा कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा.

छात्र संगठनों ने प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग की
मामला सामने आने के बाद एसएफआई, एबीवीपी सहित अन्य संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपे. उन्होंने मामले में सख्त कार्रवाई करने की मांग उठाई.
संगठनों ने संस्थान के संचालन में कथित अनियमितताओं और सरकारी अनुदान के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल खड़े किए. उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जाने चाहिए.
सरकारी अनुदान और निगरानी व्यवस्था पर सवाल
विभागीय निरीक्षण में बुनियादी सुविधाओं की कमी और संचालन संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आने के बाद संस्थान की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. सरकारी अनुदान से चलने वाले गृहों में नियमों का पालन सुनिश्चित करना और वहां रहने वाले लोगों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है.
ऐसे में यह जानना जरूरी होगा कि संस्थान के संचालन की नियमित निगरानी किस तरह की जा रही थी और निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे. फिलहाल विभाग ने अपनी रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को भेज दी है. आगे की कार्रवाई उसी के आधार पर होनी है.
पुलिस जांच और विभागीय कार्रवाई पर टिकी नजरें
बगड़ के मां सेवा संस्थान विमंदित गृह का मामला फिलहाल दो स्तरों पर आगे बढ़ रहा है. एक ओर पुलिस युवती की शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की रिपोर्ट के आधार पर संस्थान की व्यवस्थाओं से जुड़े पहलुओं पर कार्रवाई की जानी है.
अब यह देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और विभागीय रिपोर्ट के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं. इस मामले में सबसे अहम सवाल विमंदित गृह में रहने वाले लोगों की सुरक्षा, सम्मान और बुनियादी सुविधाओं को सुनिश्चित करने का है. जांच के नतीजे और नियमानुसार कार्रवाई ही इन सवालों के जवाब साफ कर सकेंगे.