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राजस्थान के झुंझुनूं में लकड़ी नीलामी से जुड़े कथित घोटाले के मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी है. मामले में कार्रवाई से संबंधित फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) पहुंच गई है. वन मंत्री संजय शर्मा की ओर से फाइल भेजे जाने के बाद अब इस पर मंजूरी और आगे के निर्णय का इंतजार है. जांच में झुंझुनूं की तत्कालीन/संबंधित जिला वन अधिकारी (DFO) IFS काविया बी सहित अन्य कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं. हालांकि, उनके खिलाफ अंतिम कार्रवाई का फैसला अभी होना बाकी है.
जी मीडिया की खबर के बाद फाइल आगे बढ़ने का दावा
मामले में कार्रवाई की फाइल अरण्य भवन में करीब एक महीने तक लंबित रहने की बात सामने आई थी. इसके बाद जी मीडिया ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया. खबर के बाद विभागीय स्तर पर हलचल बढ़ने और फाइल आगे बढ़ने का दावा किया गया है.
जानकारी के अनुसार, मामला अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार और वन मंत्री संजय शर्मा तक पहुंचा. इसके बाद कार्रवाई से संबंधित फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी गई. अब CMO से मंजूरी मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई को लेकर निर्णय हो सकता है.
नकद प्रतिभूति राशि लेने का मामला
जांच में सामने आए पहले प्रकरण के अनुसार, मैसर्स शारदा इंटरप्राइजेज से लकड़ी की निविदा प्रक्रिया के लिए 3 लाख 37 हजार रुपए की प्रतिभूति राशि नकद जमा कराई गई. इसके बदले फर्म को GA-55 की रसीद दिए जाने की जानकारी है.
नियमों के अनुसार सरकारी विभागों में नकद लेनदेन की निर्धारित सीमा का उल्लंघन होने का आरोप है. बताया गया है कि चार निविदाओं में इस तरह की अनियमितता सामने आई. जांच में इस लेनदेन की प्रक्रिया और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं.
5.33 लाख रुपए की वसूली और कथित फर्जी रसीदें
दूसरे प्रकरण में जुबेर खान की फर्म से लकड़ी नीलामी के दौरान 5 लाख 33 हजार रुपए नकद लेने का आरोप है. जांच के अनुसार, संबंधित रसीदों पर कथित तौर पर सील और हस्ताक्षरों में अनियमितताएं थीं. इन दस्तावेजों की वैधता और भुगतान की प्रक्रिया जांच के दायरे में है.
इसके अलावा, वर्ष 2020 से आरा मशीनों के नवीनीकरण पर रोक होने के बावजूद शुल्क वसूलने का मामला भी सामने आया. मैसर्स ताराचंद से 11 हजार रुपए लिए जाने और रसीद जारी करने की जांच की जा रही है. इन मामलों में संबंधित फर्मों की भूमिका की भी पड़ताल हो सकती है.
जांच रिपोर्ट में अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जांच कमेटी ने काविया बी पर नीलामी की शर्तों के अनुरूप वित्तीय और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में लापरवाही बरतने की बात कही है. सहायक लेखाधिकारी मदनलाल सैनी और कनिष्ठ सहायक प्रहलाद सिंह की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है. इनमें से प्रहलाद सिंह को निलंबित किए जाने की जानकारी दी गई है.
अब CMO के फैसले पर नजर
लकड़ी नीलामी से जुड़े इस मामले में अब मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्णय पर नजर है. फाइल को मंजूरी मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है. हालांकि, काविया बी के खिलाफ कार्रवाई, उसकी प्रकृति और समयसीमा को लेकर अंतिम आधिकारिक निर्णय सामने आना बाकी है. मामले में नकद लेनदेन, रसीदों की वैधता और नवीनीकरण शुल्क की वसूली से जुड़े आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और विभागीय आदेशों के आधार पर की जानी जरूरी है.