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दीपावली पर बाजारों में तरह-तरह की मिठाइयां सजती हैं, लेकिन शेखावाटी अंचल में एक खास मिठाई ऐसी भी है, जिसके बिना मां लक्ष्मी की पूजा अधूरी मानी जाती है. इसका नाम है तिलंगनी सेंठोली. झुंझुनूं जिले के बिसाऊ कस्बे में बनने वाली यह पारंपरिक मिठाई अपनी अनूठी बनावट और खास स्वाद के लिए पहचानी जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बनाने में न घी की जरूरत होती है और न ही तेल का इस्तेमाल किया जाता है. केवल चीनी की चाशनी से तैयार होने वाली इस मिठाई का दीपावली पर विशेष महत्व है.
दिवाली पर मां लक्ष्मी को लगाया जाता है सेंठोली का भोग
मान्यता है कि मां लक्ष्मी को सेंठोली का भोग लगाने से घर में सुख-समृद्धि आती है. झुंझुनूं जिले के बिसाऊ कस्बे में तैयार होने वाली तिलंगनी सेंठोली वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है. दीपावली के अवसर पर शेखावाटी क्षेत्र के अनेक परिवार मां लक्ष्मी के पूजन में इस मिठाई का भोग लगाते हैं. इसी परंपरा के चलते नवरात्र से ही सेंठोली बनाने का काम शुरू हो जाता है और दीपावली तक इसका कारोबार चलता है. बिसाऊ में तैयार होने वाली सेंठोली शेखावाटी के विभिन्न कस्बों में भेजी जाती है. मिठाई की मांग इतनी रहती है कि लोग पहले से ही ऑर्डर देने लगते हैं.
पत्थर पर चाशनी फेंटकर बनती है अनोखी मिठाई
मुंबई, कोलकाता सहित दूसरे शहरों और विदेशों में रहने वाले प्रवासी भी इस पारंपरिक मिठाई का स्वाद लेने के लिए इसके सीजन का इंतजार करते हैं. तिलंगनी सेंठोली की खासियत केवल इसका धार्मिक महत्व ही नहीं, बल्कि इसे बनाने का पारंपरिक तरीका भी है. सबसे पहले चीनी की रवादार चाशनी तैयार की जाती है. इसके बाद चाशनी को साफ और चिकनी पत्थर की शिला पर डालकर लगातार हाथों से फेंटा जाता है. इस प्रक्रिया में चाशनी का रंग सफेद होने लगता है और वह धीरे-धीरे सेंठोली का आकार लेने लगती है. इसके बाद इसे दीवार में लगी लोहे की छड़ पर डालकर लंबी-लंबी सफेद सींक जैसी आकृतियां बनाई जाती हैं. कारीगरों के अनुसार, करीब दो किलो सेंठोली तैयार करने में लगभग एक घंटे का समय लग जाता है.
बिना घी-तेल की मिठाई, स्वाद में पेपरमिंट का तड़का
इस पूरी प्रक्रिया में मेहनत और अनुभव की अहम भूमिका होती है. समय के साथ तिलंगनी सेंठोली के स्वाद में भी बदलाव आया है. पारंपरिक रूप से केवल चीनी से बनने वाली इस मिठाई में अब स्वाद के लिए पेपरमिंट जैसा फ्लेवर भी दिया जाने लगा है. इससे बच्चे भी इसे बड़े चाव से खाते हैं. इसे खाने के बाद मुंह में ताजगी का अहसास होता है. इसकी एक खासियत यह भी है कि सही तरीके से रखे जाने पर यह लंबे समय तक खराब नहीं होती. इसी वजह से कई परिवार दीपावली के अलावा बाद में खाने के लिए भी इसे खरीदकर रखते हैं.
देश-विदेश तक सेंठोली की डिमांड, पीढ़ियों से कायम परंपरा
प्रवासी लोग भी त्योहार से पहले ही इसके ऑर्डर दे देते हैं, ताकि अपने घरों और परिवारों तक शेखावाटी की इस पारंपरिक मिठाई का स्वाद पहुंचा सकें. दीपावली का त्योहार धन, लक्ष्मी, खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक है. इस अवसर पर मिठाइयां त्योहार की रौनक बढ़ाती हैं, लेकिन शेखावाटी की तिलंगनी सेंठोली का महत्व कुछ अलग है. बिसाऊ में तैयार होने वाली यह मिठाई पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा और आस्था को अपने भीतर समेटे हुए है.
नवरात्र से शुरू होने वाला इसका कारोबार दीपावली तक चरम पर पहुंच जाता है. लोग इस मिठाई को खरीदकर मां लक्ष्मी को भोग लगाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. बदलते समय और नए स्वादों के बीच भी तिलंगनी सेंठोली ने अपनी अलग पहचान कायम रखी है. यही वजह है कि दीपावली पर शेखावाटी के घरों में इसकी मिठास आज भी परंपरा का अभिन्न हिस्सा बनी हुई है.