Jhunjhunu News: पंचायती राज चुनाव के बीच झुंझुनूं जिले के 23 पूर्व जनप्रतिनिधियों को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया गया है. इनमें पूर्व सरपंच और वार्ड पंच शामिल हैं. संभागीय आयुक्त कार्यालय से मिली सूची के आधार पर जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. अरुण गर्ग ने संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. हालांकि, बकाया राशि जमा कर नामांकन की अंतिम तिथि से पहले अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) हासिल करने वाले संबंधित जनप्रतिनिधि चुनाव लड़ सकते हैं.
पिछले छह साल के आदेशों के आधार पर कार्रवाई
जिला निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, पिछले छह वर्षों में पंचायती राज संस्थाओं के खिलाफ पारित आदेशों के तहत अयोग्य घोषित किए गए जनप्रतिनिधियों के नाम सूची में शामिल हैं. इस संबंध में रिटर्निंग अधिकारियों, उपखंड मजिस्ट्रेट, सहायक कलक्टर नवलगढ़ और तहसीलदारों को नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.
सूची में इन 23 लोगों के नाम
सूची में महनसर की पूर्व सरपंच कुदरत बानो, बागोरिया की ढाणी के फूलाराम सैनी, घरडाना कलां की अनिता देवी, रवां की रेखा जेवरिया, जाखोद के विक्रम जाखोदिया, शेखसर के हरीराम और मानोता कलां के पूर्व वार्ड पंच रोहिताश शामिल हैं.
इसके अलावा टमकोर के पूर्व सरपंच विजय कुमार भंसाली और पूर्व वार्ड पंच हनुमान व ताराचंद, अगवाना खुर्द की पूर्व सरपंच पुष्पा देवी, शिमला के धर्मेंद्र यादव, उदामंडी की राजबाला, बड़बड़ की मुकेश देवी, बड़ागांव के राजेंद्र और चूड़ी चतरपुरा के गिरवर सिंह के नाम भी सूची में हैं.
वहीं, कलिंडा की सुधेश देवी, इंद्रपुरा के मनोहरलाल सैनी, उदावास की सुमन देवी, बेरला के वीर सिंह खरड़िया, झेरली की अनूप देवी और पातुसरी की सुप्यार देवी भी अयोग्य घोषित किए गए जनप्रतिनिधियों में शामिल हैं.
बकाया जमा कराने पर मिल सकता है मौका
डॉ. अरुण गर्ग ने स्पष्ट किया कि जिन पूर्व जनप्रतिनिधियों की राशि बकाया है, वे नामांकन की अंतिम तिथि से पहले इसका भुगतान कर NOC हासिल कर सकते हैं. निर्धारित समय में यह प्रक्रिया पूरी करने पर वे चुनाव लड़ सकेंगे.
प्रशासक रहते नहीं लड़ सकेंगे चुनाव
जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि प्रशासक के पद पर रहते हुए चुनाव नहीं लड़ा जा सकता. सरकार ने इस संबंध में जिला कलक्टर को अधिकृत किया है. अब तक करीब सात से आठ प्रशासकों ने इस्तीफा दिया है, जिन्हें तत्काल स्वीकार किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि इस्तीफा स्वीकार होने के बाद संबंधित व्यक्ति चुनाव लड़ सकते हैं, बशर्ते वे अन्य निर्धारित पात्रताएं पूरी करते हों. यह नियम उन प्रशासकों पर भी लागू है, जिनकी नियुक्ति हाईकोर्ट के आदेश से हुई है. चुनाव लड़ने के लिए उन्हें पहले पद से इस्तीफा देना होगा.
Reporter - Sandeep Kedia