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Jhalawar News: झालावाड़ के जिला अस्पताल के बाहर आज शाम उस समय हंगामा हो गया, जब गंभीर घायल किशोरी को लेकर परिजन जिला अस्पताल पहुंचे थे. लेकिन भर्ती करने के लिए परिजन जिला एसआरजी अस्पताल तथा जिला जनाना अस्पताल के बीच भटकते रहे. करीब 2 घंटे तक परेशान होने के बाद गंभीर हालत में किशोरी को लेकर आए परिजन आक्रोशित हो गए और घायल किशोरी को स्ट्रेचर पर डालकर जिला अस्पताल के सामने हाईवे पर ले आए. घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल चौकी पुलिस और कोतवाली पुलिस सहित जनाना अस्पताल अधीक्षक मौके पर पहुंचीं और किशोरी को जनाना अस्पताल की आईसीयू में भर्ती कराया. फिलहाल किशोरी की हालत स्थिर बताई जा रही है.
अस्पताल में फाइल के नाम पर भटकाया
मामले में जानकारी देते हुए किशोरी के परिजनों ने बताया कि वे रायपुर क्षेत्र के पालखंदा के निवासी हैं. उनकी 17 वर्षीय बेटी सविता का खेत पर काम करते समय दुपट्टा थ्रेसर मशीन में आ गया, जिससे वह गंभीर घायल हो गई. परिजन तुरंत ही उसे झालावाड़ जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लाए, जहां काफी देर तक फाइल बनवाने के नाम पर परिजनों को भटकाया गया और गंभीर हालत होने के बावजूद किशोरी का उपचार शुरू नहीं किया गया. बाद में किशोरी की उम्र 17 वर्ष बताते हुए उसे जिला जनाना अस्पताल भेज दिया गया. लेकिन वहां जाने के बाद काउंटर पर फाइल जिला एसआरजी अस्पताल की बताते हुए भर्ती करने से मना कर दिया गया. गंभीर घायल किशोरी को लेकर परिजन करीब 2 घंटे तक जिला एसआरजी अस्पताल से जिला जनाना अस्पताल तक भटकते रहे, लेकिन उपचार शुरू नहीं हो पाया. ऐसे में गुस्साए परिजन घायल किशोरी को स्ट्रेचर पर ही लेकर जिला अस्पताल के सामने हाईवे पर पहुंच गए, जहां कुछ देर के लिए जाम के हालात बन गए. सूचना मिलते ही अस्पताल चौकी पुलिस तथा कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और अस्पताल प्रबंधन को सूचना दी. जिसके बाद जिला जनाना अस्पताल के डॉक्टर मौके पर पहुंचे और किशोरी को जिला जनाना अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया और उपचार शुरू किया.
क्या बोलीं जिला जनाना अस्पताल की अधीक्षक डॉ. माधुरी मीणा
उधर, जिला जनाना अस्पताल की अधीक्षक डॉ. माधुरी मीणा ने बताया कि किशोरी का उपचार शुरू कर दिया गया है तथा उसकी हालत अब ठीक है. उन्होंने कहा कि भर्ती में देरी के मामले की जांच की जाएगी. यदि किसी की लापरवाही रही, तो कार्रवाई की जाएगी. बहरहाल, कब जांच होगी और कार्रवाई कब होगी, यह सब बाद में ही पता चलेगा, लेकिन जिला अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते यदि किसी मरीज की जान चली जाती, तो जिम्मेदार कौन होता?