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Jhalawar News: राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिड़ावा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में आज सुबह भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए हैं, जिससे ग्रामीणों में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है. भूकंप की घटना नौलाई गांव के सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हुई है. इसके साथ ही भूकंप की प्रशासन द्वारा भी पुष्टि कर दी गई है.
पिड़ावा के कई गांवों में महसूस हुए भूकंप के झटके
मामला पिड़ावा क्षेत्र के नोलाई, खजूरी, बरखेड़ी, भूरखेड़ी सहित आसपास के गांवों का है. यहां के ग्रामीणों का कहना है कि सुबह 8 बजे बाद से दो से तीन बार भूकंप के हल्के झटके महसूस हुए हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत में आ गए. सभी ग्रामीण घरों से बाहर निकल कर खुले स्थानों पर पहुंच गए. स्कूलों से भी बच्चों को तुरंत ही बाहर निकाल लिया गया.
जयपुर भूकंप केंद्र ने की पुष्टि
उधर, झालावाड़ जिले के पिड़ावा के ग्रामीण इलाकों में आज सुबह महसूस किए गए भूकंप के झटकों की पुष्टि जयपुर भूकंप केंद्र ने भी कर दी है. एसडीएम दिनेश कुमार मीणा ने मामले में जानकारी देते हुए बताया है कि क्षेत्र के नोलाई, बरखेड़ी,खजूरी आदि गांवों से सुबह भूकंप जैसे झटकों की सूचना मिली थी.
रिक्टर स्केल पर 3.0 तीव्रता
झटकों की पुष्टि दोपहर में जयपुर भूकंप केंद्र ने कर दी है. यहां आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.0 मापी गई है. इस तीव्रता वाले भूकंप को सबसे निम्न दर्जे का माना जाता है. भूकंप का केंद्र गागरीन बांध के आसपास बताया गया है.
प्रशासन ने संभाला मोर्चा
भूकंप के झटकों के बाद मौके पर बड़ी संख्या में प्रशासनिक अमला मौजूद है, जो लोगों से मिलकर घटना के बारे में जानकारियां जुटा रहा है.
मौके पर जल संसाधन विभाग की टीम भी पहुंची है, जिसने गागरीन बांध क्षेत्र में घूम कर जांच की और गागरीन बांध को सुरक्षित बताया है.
लोगों में अब भी डर का माहौल
भूकंप को लेकर क्षेत्र के लोगों में डर का माहौल बना हुआ है. हालांकि कम तीव्रता का भूकंप होने से कोई भी कोई नुकसान नहीं हुआ है.
क्या होता है रिक्टर और मर्कल्ली स्केल?
भूकंप की तीव्रता और परिमाण को मुख्य रूप से रिक्टर पैमाना और मर्कल्ली स्केल के द्वारा मापा जाता है. रिक्टर स्केल भूकंप की ऊर्जा और परिमाण को मापता है, जिसको 1935 में चार्ल्स रिक्टर ने विकसित किया था. यह एक लघुगणकीय (logarithmic) पैमाना है. वहीं, मर्कल्ली स्केल भूकंप के असर और उससे हुए नुकसान को मापता है. इसमें I से XII तक के रोमन अंकों का इस्तेमाल किया जाता है.
Report- Mahesh Parihar