Jhadol Gram Panchayat Election: झाड़ोल उपखंड में पंचायत चुनाव के बाद गांवों की सरकार की तस्वीर साफ हो गई है. तीन पंचायत समितियों के अंतर्गत सरपंच, उपसरपंच और वार्डपंच चुने गए हैं. चुनाव के बाद अब गांवों की जिम्मेदारी नए जनप्रतिनिधियों के हाथों में होगी. ग्रामीणों ने मतदान में हिस्सा लेकर अपने गांव की कमान नए प्रतिनिधियों को सौंपी है. वहीं, नवगठित ग्राम पंचायत चौखला बारा में सरपंच और वार्डपंच निर्विरोध चुने गए. यहां ग्रामीणों को बिना मतदान के ही अपने जनप्रतिनिधि मिल गए.
तीन पंचायत समितियों में दर्ज हुआ अच्छा मतदान
झाड़ोल उपखंड की तीन पंचायत समितियों में मतदान के आंकड़े ग्रामीणों की भागीदारी दिखाते हैं. पंचायत समिति झाड़ोल में 86.86 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. वहीं, ओगणा में 83.87 प्रतिशत और फलासिया में 86.04 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. इन आंकड़ों के साथ पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पूरी हुई और गांवों में नए जनप्रतिनिधियों के चयन का रास्ता साफ हो गया. चुनाव के बाद अब नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों के सामने अपने गांवों की जिम्मेदारी संभालने की चुनौती होगी. ग्रामीणों को उम्मीद है कि नए जनप्रतिनिधि गांव की जरूरतों को समझते हुए विकास के कामों पर ध्यान देंगे.
कांग्रेस समर्थित सरपंचों की संख्या ज्यादा
सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, झाड़ोल क्षेत्र में करीब 50 फीसदी सरपंच कांग्रेस समर्थित चुने गए हैं. वहीं, करीब 40 फीसदी सरपंच भाजपा समर्थित हैं. पहली बार करीब 10 फीसदी सरपंच बीएपी समर्थित चुने गए हैं. इन नतीजों से क्षेत्र की ग्रामीण राजनीति में नए समीकरणों के संकेत मिले हैं. इस चुनाव में बीएपी समर्थित सरपंचों की मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही. कांग्रेस और भाजपा समर्थित सरपंचों के साथ बीएपी समर्थित जनप्रतिनिधियों के चुने जाने से पंचायत चुनाव के नतीजों में अलग तस्वीर सामने आई है.
चौखला बारा में निर्विरोध चुने गए जनप्रतिनिधि
नवगठित ग्राम पंचायत चौखला बारा में सरपंच और वार्डपंच निर्विरोध चुने गए. यहां मतदान की जरूरत नहीं पड़ी और ग्रामीणों को अपने जनप्रतिनिधि मिल गए. दूसरी ओर, झाड़ोल, ओगणा और फलासिया पंचायत समितियों में मतदान के बाद चुनावी तस्वीर साफ हुई.
जीत के बाद देव दर्शन कर रहे नवनिर्वाचित सरपंच
चुनाव के नतीजे आने के बाद गांवों में जीत का जश्न दिखाई दे रहा है. नवनिर्वाचित सरपंच देव दर्शन कर रहे हैं और अपने गांव की खुशहाली की कामना कर रहे हैं. चुनाव में जीत के बाद अब उनके सामने ग्रामीणों की उम्मीदों पर खरा उतरने की जिम्मेदारी होगी.
सड़क, शिक्षा, चिकित्सा और पेयजल पर ग्रामीणों की उम्मीदें
ग्रामीणों को उम्मीद है कि चुनाव के दौरान किए गए वादे अब जमीन पर उतरेंगे. गांवों में सड़क, शिक्षा, चिकित्सा और पेयजल जैसी बुनियादी जरूरतों से जुड़े विकास कार्यों को गति मिलने की अपेक्षा है. अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि नए जनप्रतिनिधि गांवों की समस्याओं को किस तरह प्राथमिकता देते हैं और विकास के वादों को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाते हैं.