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जैसलमेर की शान गड़ीसर पर संकट: सूखी झील, ठप हुआ कारोबार, कब लौटेगी रौनक ?

Jaisalmer Gadisar Lake: जैसलमेर की ऐतिहासिक गड़ीसर लेक इन दिनों पानी की कमी से जूझ रही है. मानसून में पर्याप्त बारिश नहीं होने और तेज गर्मी के कारण झील का जलस्तर घटने से बोटिंग बंद हो गई है. पर्यटकों की आवाजाही कम होने से नाव संचालकों और दुकानदारों की आजीविका पर असर पड़ रहा है.

Written By Aman Singh
Published: Oct 12, 2026, 06:11 PM IST | Updated: Oct 12, 2026, 06:17 PM IST
Image Credit: AI Image
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Jaisalmer Gadisar Lake: 'स्वर्ण नगरी' जैसलमेर की ऐतिहासिक पहचान और पर्यटकों के प्रमुख आकर्षणों में शामिल गड़ीसर लेक इन दिनों पानी की कमी से जूझ रही है. मानसून में पर्याप्त बारिश नहीं होने और तेज गर्मी के चलते झील का जलस्तर लगातार घट रहा है. हालात ऐसे हो गए हैं कि झील के बीच बनी छतरियों और मंदिरों के आसपास पानी की जगह सूखी जमीन नजर आने लगी है. झील का बदला स्वरूप देखकर पर्यटक मायूस हो रहे हैं. वहीं बोटिंग बंद होने से नाव संचालकों और झील की पाल पर दुकानें लगाकर परिवार चलाने वाले छोटे कारोबारियों की कमाई पर भी संकट गहरा गया है.

जहां रहती थी पर्यटकों की रौनक अब वहां पसरा सन्नाटा

जैसलमेर शहर के प्रवेश द्वार के पास स्थित गड़ीसर लेक अपनी ऐतिहासिक सुंदरता, कलात्मक छतरियों और मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है. शाम होते ही यहां देशी-विदेशी पर्यटकों की भीड़ जुटती थी. पर्यटक नावों में बैठकर झील की सैर करते और पानी के बीच बने ऐतिहासिक स्थलों का नजारा लेते थे, लेकिन अब पानी की कमी के कारण झील की खूबसूरती प्रभावित हो रही है. पानी कम होने से पर्यटकों का ठहराव भी घट रहा है, जिसका सीधा असर पर्यटन गतिविधियों पर दिखाई दे रहा है.

नाव संचालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट

गड़ीसर लेक में बोटिंग का काम करने वाले गोपाल बताते हैं कि उनकी आजीविका इसी व्यवसाय पर निर्भर है. पर्यटक नावों में बैठकर झील की सैर करते थे, जिससे परिवार का खर्च चलता था, लेकिन पानी कम होने के कारण नावें किनारे खड़ी हैं और बोटिंग का काम प्रभावित हो गया है. ऐसे में बच्चों की फीस, घर का राशन और रोजमर्रा के खर्च पूरे करना मुश्किल होता जा रहा है. यदि झील में पानी की स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो उनकी आर्थिक परेशानियां और बढ़ सकती हैं.

पर्यटक घटे तो दुकानदारों की बिक्री भी हुई कम

झील की पाल पर राजस्थानी गहने, कांच की चूड़ियां और श्रृंगार सामग्री बेचने वाली धापू भी इस स्थिति से परेशान हैं. उनका कहना है कि पर्यटकों की आवाजाही से ही उनकी दुकान चलती है. पर्यटक झील देखने आते हैं, तो खरीदारी भी करते हैं, लेकिन अब पानी कम होने से लोग यहां ज्यादा देर नहीं रुकते. इसके चलते बिक्री में गिरावट आई है और परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा है. गड़ीसर लेक की बदहाली का असर अब छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी पर भी पड़ने लगा है.

2002-2003 के सूखे की यादें हुईं ताजा

गड़ीसर लेक के मौजूदा हालात ने स्थानीय लोगों को वर्ष 2002-2003 के सूखे की याद दिला दी हैं. उस समय भी पानी की कमी के कारण झील का जलस्तर काफी घट गया था. अब एक बार फिर झील की स्थिति को देखकर पर्यटन कारोबार से जुड़े लोग चिंतित हैं. जैसलमेर में सर्दियों का मौसम पर्यटन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है. ऐसे में झील में पानी की कमी बनी रही, तो आगामी पर्यटन सीजन में भी इसका असर देखने को मिल सकता है. नाव संचालकों से लेकर छोटे दुकानदारों तक सभी को कारोबार प्रभावित होने की चिंता सता रही है.

चार ट्यूबवेल से झील में पानी भरने की नगर परिषद बना रहा योजना

गड़ीसर लेक की स्थिति को देखते हुए नगर परिषद आयुक्त पवन कुमार ने बताया कि झील के आसपास चार ट्यूबवेल खुदवाकर पानी भरने की योजना तैयार की है. इसका उद्देश्य झील में पानी का स्तर बढ़ाना और उसके पर्यटन आकर्षण को बनाए रखना है. हालांकि, योजना कब तक धरातल पर उतरेगी और इससे झील के जलस्तर में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा. स्थानीय कारोबारियों को उम्मीद है कि झील में पानी बढ़ने से पर्यटकों की आवाजाही फिर बढ़ेगी और उनका कारोबार पटरी पर लौट सकेगा.

जैसलमेर की ऐतिहासिक धरोहर है गड़ीसर लेक

गड़ीसर लेक केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि जैसलमेर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है. ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, 12वीं शताब्दी में जैसलमेर के संस्थापक महारावल जैसल के समय इस जलाशय की शुरुआत हुई थी. बाद में 14वीं शताब्दी में महारावल गड़सी सिंह ने इसका पुनर्निर्माण और विस्तार करवाया. लंबे समय तक यह झील शहर की जलापूर्ति का प्रमुख स्रोत रही. झील के आसपास बनी कलात्मक छतरियां, मंदिर और ऐतिहासिक प्रवेश द्वार टीलों की पोल इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं.

आज गड़ीसर लेक में पानी की कमी केवल एक ऐतिहासिक जलाशय का संकट नहीं है, बल्कि यह जैसलमेर के पर्यटन और इससे जुड़े सैकड़ों लोगों की आजीविका से भी जुड़ा मुद्दा बन गई है. अब नजरें नगर परिषद की योजना पर टिकी हैं. देखना होगा कि झील में पानी बढ़ाने का प्रयास कितनी जल्दी शुरू होते हैं और स्वर्णनगरी की इस ऐतिहासिक धरोहर की रौनक कब लौटती है.

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जून 2023 से ज़ी राजस्थान के साथ कार्यरत अमन लगातार अपनी क्रिएटिविटी और प्रोफेशनल स्किल्स के जरिए पाठकों तक तेज, सटीक और भरोसेमंद खबरें पहुंचा रहे हैं. वे उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले हैं, अमन ने जौनपुर से ही अपनी इंटरमीडिएट तक की शिक्षा पूरी की. इसके बाद उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया. डिजिटल पत्रकारिता में गहरी समझ, तेज खबर पकड़ने की क्षमता के कारण अमन सिंह एक उभरते हुए और भरोसेमंद मीडिया प्रोफेशनल के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहे हैं.
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