सरकारी छूट, फिर भी हाल बेहाल
राज्य सरकार ने 15 हजार लीटर तक पेयजल बिलों में वाटर चार्ज और सीवरेज चार्ज की छूट दे रखी है. इसके बावजूद जयपुर में लाखों उपभोक्ता 300 करोड़ का मुफ्त का पानी पी गए. सरकार ने 15000 लीटर तक पानी के बिलों में वाटर चार्ज 55 रु और सीवरेज चार्ज 8.15 रु छूट दे रखी है. लेकिन इसके बावजूद उपभोक्ताओं से वसूली ही नहीं हो पा रही है. शहरी सरकार यानि नगर निगम के साथ साथ दूसरे विभागों का भी करोड़ो का बकाया चल रहा है.
आपको बता दें कि राजस्थान यूनिवर्सिटी खुद सालों से फ्री का पानी पी रही है.अभी यूनिवसिर्टी के 15 लाख का बिल बकाया है. वहीं रंगोली गार्डन का भी 11 लाख से ज्यादा का बिल बकाया है. जयपुर में ऐसे 14 उपभोक्ता है. जिनका बिल 5 लाख या इससे ज्यादा का बकाया है.
सबसे ज्यादा बिल वाले उपभोक्ता
उपभोक्ता बिल बकाया रू में
प्रेम प्रकाश 6,90,000
मोहम्मद जाकिर 6,09,000
टैक्नोमेक इंजीनियर 5,96,000
अजीत सिंह 5,29,000
लता एम क्पलानी 5,04,000
बजरंग लाल 5,48,000
सादिक मोहम्मद 5,033,000
अनूदीप ढुकरियाल 6,71,000
कौशल्या देवी 6,40,000
भंवर लाल शर्मा 8,61,000
लालचंद यादव 6,00,000
रवि के. मेहता 5,00,000
ना अभियान चले, ना कनेक्शन काटे
जलदाय विभाग में वसूली के लिए कोई ठोस अभियान चलाया गया है. ऐसे उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे. जिनके सालों से बिल जमा नहीं हुए. इतना ही नहीं पीएचईडी में बिल भी समय पर नहीं बंट पाते. बिल बांटने वाली मैसर्स रुद्र सिस्टम खुद कटघरे में है. हाल ही में रूद्र सिस्टम ने मानसरोवर के सब डिवीजन में उपभोक्ताओं को ऐसे इंजीनियर के नाम से साईनिंग बिल जारी किए थे, जो 4 साल पहले इस दफ्तर में पोस्टेड थे. यानि सीधे तौर पुराने बिल कॉपी पेस्ट किए गए. लेकिन इसमें भी जलदाय विभाग के जिम्मेदारों पर जिम्मेदार फर्म पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. आपको बता दें कि जयपुर में करीब 6 लाख उपभोक्ता हैं, जिनके नाम से पेयजल बिल जारी होते है.
सालों से बिलिंग, रिकवरी सिस्टम गड़बड़ाया
सालों से जलदाय विभाग का बिलिंग और रिकवरी सिस्टम गड़बड़ाया हुआ है. अब सवाल ये है कि आखिरकार ये सिस्टम कैसे ठीक होगा. क्यों जल महकमा बिजली विभाग से सीख नहीं ले रहा ? क्योंकि विघुत विभाग का बिलिंग सिस्टम जलदाय के मुकाबले काफी ठीक है.