रामायण का ट्रेलर आपने देखा होगा, जहां रावण इंद्र पर हमला करता है लेकिन आज जयपुर में इंद्रदेव रावण पर हमला करते देखा गया. दरअसल, जयपुर में एक मंडी है, जो केवल रावणों के लिए सजती है. 50 साल से जयपुर के मानसरोवर में रावण मंडी लगाई जाती है, जिसमें दशहरे से पहले रावण के पुतले बिकते हैं लेकिन अबकी बार भी जलने से पहले ही रावण गल गए. एक बारिश ने कारीगरों की मेहनत पर पानी फेर दिया.
50 साल से लग रही रावण मंडी
दशहरे से पहले जयपुर में रावण मंडी सज गई है. बाजार में छोटे से लेकर विशालकाय रावण के पुतले बिक्री के लिए तैयार हैं. करीब 50 साल से लग रही इस रावण मंडी में इस बार भी कारीगरों ने बड़े पैमाने पर पुतले तैयार किए हैं. बाजार में डेढ़ लाख रुपए तक की कीमत वाले रावण के पुतले उपलब्ध हैं. राजस्थान के अलावा दूसरे राज्यों से भी पुतलों के ऑर्डर मिल रहे हैं. हालांकि, बारिश ने कारीगरों की मेहनत और कमाई पर पानी फेर दिया है.
बारिश से खराब हुए पुतले
रावण के पुतले तैयार करने वाले कारीगर दशहरे से काफी पहले ही काम शुरू कर देते हैं. बांस, कागज और अन्य सामग्री की मदद से पुतलों को आकार दिया जाता है. इसके बाद उन्हें रंग-रोगन कर अंतिम रूप दिया जाता है. इस काम में कारीगरों और उनके परिवारों की मेहनत के साथ बड़ी रकम भी लगती है. इस बार बारिश के कारण तैयार पुतलों को नुकसान पहुंचा है. कई पुतले दशहरे पर जलने से पहले ही गल गए. ऐसे में कारीगरों के सामने तैयार पुतलों को सुरक्षित रखने की चुनौती खड़ी हो गई है. बारिश से हुए नुकसान के चलते उनकी मेहनत और लागत दोनों पर असर पड़ा है.
कर्ज लेकर तैयार किए पुतले
रावण मंडी में पुतले बनाने वाले कई कारीगर कर्ज लेकर इस कारोबार में पैसा लगाते हैं. उन्हें उम्मीद रहती है कि दशहरे पर पुतलों की बिक्री से लागत निकलने के साथ मुनाफा भी होगा लेकिन बारिश ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया है. पुतले खराब होने से बिक्री प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है.
दूसरे राज्यों से भी आते हैं ऑर्डर
जयपुर की रावण मंडी की पहचान लंबे समय से बनी हुई है. यहां तैयार होने वाले पुतलों की मांग दूसरे राज्यों तक रहती है. डेढ़ लाख रुपये तक के पुतले इस बाजार की विविधता और बड़े आयोजनों के लिए होने वाली मांग को दर्शाते हैं. अब कारीगरों की नजर दशहरे तक मौसम साफ रहने और बचे हुए पुतलों की बिक्री पर टिकी है.