App

पुरोहितजी का कटला अग्निकांड: हाइड्रेंट में भरी थी नींबू-मिर्च, 3 साल से नहीं हुई जांच, आखिर कहां हुई चूक?

Rajasthan News: जयपुर के पुरोहितजी का कटला अग्निकांड के बाद फायर सेफ्टी सिस्टम पर सवाल उठे हैं. आग वाली जगह के पास हाइड्रेंट में पानी की जगह नींबू-मिर्च की माला मिली. स्मार्ट सिटी के 14 हाइड्रेंट भी बंद हैं. मामले में उच्चस्तरीय जांच के बीच CFO और AFO निलंबित कर दिए गए है.

पुरोहितजी का कटला अग्निकांड: हाइड्रेंट में भरी थी नींबू-मिर्च, 3 साल से नहीं हुई जांच, आखिर कहां हुई चूक?
Image Credit: Purohitji Ka Katla Fire Incident

Purohitji Ka Katla Fire Incident: जयपुर के पुरोहितजी का कटला में लगी आग बुझ चुकी है, लेकिन इस हादसे के बाद फायर सेफ्टी सिस्टम को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं. करोड़ों रुपये का सामान जलकर राख हो गया, कई दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हुआ और आग बुझाने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए. सबसे बड़ा सवाल उस फायर हाइड्रेंट को लेकर है, जो आग वाली जगह के बेहद पास था, लेकिन उसमें पानी की व्यवस्था के बजाय नींबू-मिर्च की मालाएं रखी मिलीं. राज्य मानवाधिकार आयोग की टीम के निरीक्षण के दौरान यह मामला सामने आया. आयोग के अध्यक्ष पूर्व जस्टिस जीआर मूलचंदानी ने मुख्य अग्निशमन अधिकारी से हाइड्रेंट की जांच को लेकर सवाल किए. अधिकारी ने बताया कि इसकी जांच के लिए आखिरी आवेदन 2023 में आया था. वहीं नगर निगम का दूसरा हाइड्रेंट करीब 200 मीटर दूर मिला और स्मार्ट सिटी के तहत लगा हाइड्रेंट सिस्टम भी चालू नहीं था.

करीब 7 घंटे तक आग से जूझती रही दमकल
पुरोहितजी का कटला जयपुर के सबसे व्यस्त और भीड़भाड़ वाले बाजारों में गिना जाता है. गुरुवार सुबह करीब साढ़े सात बजे सेठी कॉम्प्लेक्स में आग लगी. शुरुआत में आग एक जगह थी, लेकिन देखते ही देखते आसपास की दुकानों और गोदामों तक पहुंच गई. करीब 18 दुकानें और गोदाम इसकी चपेट में आ गए. बाजार की गलियां संकरी होने के कारण दमकल की गाड़ियों को अंदर तक पहुंचने में परेशानी हुई. करीब सात घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका. हालांकि इसके बाद भी कई जगहों से धुआं उठता रहा और दुकानदारों को अपना सामान निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी.

आग के बाद मानवाधिकार आयोग पहुंचा मौके पर
हादसे के अगले दिन शुक्रवार को राज्य मानवाधिकार आयोग की टीम पुरोहितजी का कटला पहुंची. आयोग अध्यक्ष पूर्व जस्टिस जीआर मूलचंदानी, सदस्य और पूर्व आईजीपी अशोक गुप्ता समेत अधिकारियों ने मौके का जायजा लिया. टीम ने जली हुई दुकानों, बाजार की स्थिति और आग बुझाने के इंतजामों को देखा. इसी दौरान एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने फायर सेफ्टी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए.

आग वाली जगह के पास ही एक फायर हाइड्रेंट प्वॉइंट लगा था. लेकिन वहां आग बुझाने के लिए पानी की व्यवस्था नहीं दिखी. हाइड्रेंट के पास नींबू-मिर्च की मालाएं रखी मिलीं. इसके बाद आयोग ने अग्निशमन विभाग के अधिकारियों से हाइड्रेंट की स्थिति और उसकी जांच के बारे में जानकारी ली.

तीन साल पहले हुई थी हाइड्रेंट की जांच?
आयोग अध्यक्ष ने मौके पर मौजूद मुख्य अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र मीणा से पूछा कि क्या उन्होंने कभी इस हाइड्रेंट को चलते हुए देखा है और इसकी जांच कब की गई थी. इस पर अधिकारी ने बताया कि इस तरह के बाजारों में आवेदन आने पर टीम जांच करती है.

इसके बाद सवाल किया गया कि आवेदन कब आया था. जवाब मिला कि आवेदन 2023 में आया था. यानी जिस बाजार में हर समय बड़ी संख्या में दुकानें, गोदाम और सामान मौजूद रहता है, वहां इस हाइड्रेंट की जांच को लेकर करीब तीन साल पुराना रिकॉर्ड सामने आया.

आयोग अध्यक्ष और मुख्य अग्निशमन अधिकारी के बीच सवाल-जवाब का मुद्दा यही था कि आखिर इतने संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले बाजार में फायर हाइड्रेंट की नियमित जांच क्यों नहीं हुई.

क्या हाइड्रेंट चालू होता तो नुकसान कम होता?
मौके पर मौजूद व्यापारियों और आयोग की टीम की ओर से यह सवाल उठाया गया कि अगर यह हाइड्रेंट सही हालत में और चालू होता तो आग पर शुरुआती समय में ही पानी डाला जा सकता था. इससे आग को फैलने से रोकने में मदद मिल सकती थी.

हालांकि यह तय करना जांच का विषय है कि हाइड्रेंट चालू होने की स्थिति में नुकसान कितना कम होता. लेकिन भीड़भाड़ वाले बाजार में आग लगने पर पास में पानी का इंतजाम होना फायर फाइटिंग के लिए अहम माना जाता है. यही वजह है कि आयोग ने मौके पर मौजूद सिस्टम की स्थिति को गंभीरता से देखा.

निगम का हाइड्रेंट भी 200 मीटर दूर
जांच के दौरान सिर्फ निजी हाइड्रेंट की बात नहीं हुई. आयोग अध्यक्ष ने नगर निगम के हाइड्रेंट के बारे में भी जानकारी ली. अधिकारियों से पूछा गया कि निगम का हाइड्रेंट कितनी दूरी पर है. जवाब मिला कि कटले के बाहर दूसरी तरफ करीब 200 मीटर दूर निगम का हाइड्रेंट है.

इसके बाद आयोग अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि अगर आग कटले के अंदर इसी तरफ लगे तो दमकलकर्मियों को पानी कहां से मिलेगा. संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले बाजार में दमकल की गाड़ियों का अंदर जाना वैसे ही मुश्किल है. ऐसे में आग वाली जगह के पास पानी की व्यवस्था होना और भी जरूरी हो जाता है.

स्मार्ट सिटी के 14 हाइड्रेंट भी बंद
अग्निशमन विभाग के मुताबिक स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत कटले के आसपास हाइड्रेंट सिस्टम लगाया गया था. घाटगेट से करीब आठ किलोमीटर के क्षेत्र में कुल 14 हाइड्रेंट लगाए गए हैं. इसका मकसद आग लगने की स्थिति में दमकल को मौके के आसपास ही पानी उपलब्ध कराना था.

लेकिन अधिकारियों के मुताबिक यह सिस्टम फिलहाल चालू नहीं है. इसके पीछे टेंडर नहीं होने का हवाला दिया गया. यानी जिस व्यवस्था का इस्तेमाल आग के समय तुरंत पानी पहुंचाने के लिए होना था, वह अभी काम नहीं कर रही.

इसका असर यह हुआ कि आग बुझाने के दौरान दमकलकर्मियों को पानी के लिए घाटगेट जाना पड़ा. घाटगेट करीब दो किलोमीटर दूर बताया गया है. ऐसे में बार-बार पानी लेने और फिर आग वाली जगह पहुंचने में समय लग सकता है.

आयोग अध्यक्ष ने पूछा- बंद सिस्टम का क्या फायदा?
हाइड्रेंट सिस्टम बंद होने की जानकारी मिलने के बाद आयोग अध्यक्ष ने अधिकारियों से सीधा सवाल किया. उनका सवाल था कि अगर हाइड्रेंट चालू ही नहीं है तो वह 200 मीटर दूर हो या दो मीटर दूर, उसका फायदा क्या है?

आग लगने के दौरान हर मिनट अहम होता है. खासकर पुरोहितजी का कटला जैसे बाजार में, जहां गलियां संकरी हैं और दुकानों में बड़ी मात्रा में सामान रखा रहता है. ऐसे में दमकलकर्मियों को पानी के लिए करीब दो किलोमीटर दूर जाना पड़े तो आग पर काबू पाने में परेशानी बढ़ सकती है.

सिस्टम को चालू कराने की जिम्मेदारी किसकी?
आयोग अध्यक्ष ने यह भी पूछा कि हाइड्रेंट सिस्टम को चालू कराने के लिए अग्निशमन विभाग की तरफ से कोई प्रस्ताव दिया गया था या नहीं. इस सवाल पर मुख्य अग्निशमन अधिकारी से स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका. इसके बाद इस पूरे सिस्टम को लेकर सवाल और गंभीर हो गए.

यह भी बड़ा सवाल है कि जब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत हाइड्रेंट लगाए गए थे तो उनके रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी किसकी थी. टेंडर नहीं होने के कारण सिस्टम बंद है तो इसे दोबारा चालू कराने की प्रक्रिया कब शुरू होगी, यह भी अब जांच का हिस्सा बन सकता है.

पुरोहितजी का कटला इतना संवेदनशील क्यों?
पुरोहितजी का कटला सामान्य बाजार नहीं है. यहां बड़ी संख्या में दुकानें और गोदाम हैं. एक ही जगह पर कपड़े, रेडीमेड सामान, कॉस्मेटिक्स, चूड़ी और अन्य सामान रखा रहता है. बाजार की गलियां भी काफी संकरी हैं.

ऐसे में आग लगने पर सबसे बड़ी चुनौती दो होती है. पहली, दमकल की गाड़ियों को अंदर तक पहुंचाना और दूसरी, लगातार पानी उपलब्ध कराना. अगर इन दोनों में से किसी एक में भी परेशानी आती है तो आग तेजी से फैल सकती है. इस हादसे में भी दमकल को संकरी गलियों के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ा.

दुकानदारों का कितना नुकसान हुआ?
आग में व्यापारियों का करोड़ों रुपये का सामान जल गया. आग के बाद दुकानदारों ने राख और मलबे के बीच अपना बचा हुआ सामान तलाशा. कई दुकानों में कपड़े, रेडीमेड सामान, कॉस्मेटिक्स, चूड़ी और अन्य व्यापारिक सामान रखा था.

आग से सिर्फ सामान का नुकसान नहीं हुआ. दुकानों का कारोबार भी प्रभावित हुआ. दुकानें बंद रहने, जले हुए सामान को हटाने और बाजार की स्थिति सामान्य करने में भी समय लग रहा है. यानी आग का असर सिर्फ उस दिन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापारियों के कामकाज पर भी पड़ा.

क्या मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट से कार्रवाई होगी?
राज्य मानवाधिकार आयोग अब पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार करेगा. मौके पर किए गए निरीक्षण, अधिकारियों से मिले जवाब और फायर सेफ्टी व्यवस्था की स्थिति को रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा.

इसके बाद यह साफ हो सकेगा कि इस मामले में किस स्तर पर लापरवाही हुई और जिम्मेदारी किसकी बनती है. फिलहाल आयोग की रिपोर्ट का इंतजार है. लेकिन पुरोहितजी का कटला अग्निकांड एक बात साफ तौर पर सामने लाया है कि सिर्फ आग बुझाना ही काफी नहीं है. आग लगने से पहले उससे निपटने की तैयारी भी उतनी ही जरूरी है.

सवाल सिर्फ एक आग का नहीं, पूरे सिस्टम का है
पुरोहितजी का कटला में आग बुझ चुकी है, लेकिन इस हादसे ने फायर सेफ्टी सिस्टम की तैयारियों पर कई सवाल छोड़ दिए हैं. पास में हाइड्रेंट होने के बावजूद उसकी स्थिति क्या थी, उसकी नियमित जांच क्यों नहीं हुई, स्मार्ट सिटी का हाइड्रेंट सिस्टम बंद क्यों पड़ा है और दमकल को पानी के लिए दूर क्यों जाना पड़ा-इन सभी सवालों के जवाब अब जरूरी हैं.

सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगली आग का इंतजार किए बिना इस पूरे सिस्टम को कब दुरुस्त किया जाएगा. भीड़भाड़ वाले बाजारों में फायर हाइड्रेंट, पानी की सप्लाई, दमकल की पहुंच और नियमित जांच जैसी चीजें सिर्फ कागजों में नहीं, जमीन पर भी काम करती हुई दिखनी चाहिए. आयोग की रिपोर्ट के बाद यह तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है कि पुरोहितजी का कटला हादसा सिर्फ एक आग की घटना था या इसके पीछे सिस्टम की बड़ी कमियां भी थीं.

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Vishnu Prakash Sharma

Vishnu Prakash Sharma

जी राजस्थान में सीनियर कॉरेस्पॉन्डेंट के रूप में कार्यरत विष्णु प्रकाश शर्मा पत्रकारिता के क्षेत्र में विगत 30 वर्षों से सक्रिय हैं. जी मीडिया में वे BJP, तीसरा मोर्चा,  RSS सहित अन्य राजनीतिक विषय या गृह, वित्त और क्राइम से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से कवर करते हैं. बात चाहे बीजेपी संगठन में किसी भी हलचल की या फिर पार्टी के वीवीआईपी दौरों से लेकर कानून व्यवस्था से जुड़ी खबरों की, विष्णु शर्मा सक्रिय रूप से इन सभी की न्यूज कवर कर दर्शकों तक पहुंचाते हैं। राजनीतिक और गृह-पुलिस की खबरों पर भी गहरी पकड़ रखते हैं. राजनीति से जुड़ी हर छोटी बड़ी खबरों को भी दर्शकों तक पहुंचाते हैं.  विष्णु प्रकाश शर्मा जी मीडिया समूह से पहले दैनिक भास्कर में 10 साल, राजस्थान पत्रिका में 12 साल, फर्स्ट इंडिया न्यूज 7 महीने कार्य कर चुके हैं.
Read More