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Jaipur News: राजस्थान हाईकोर्ट ने कोमा में चल रहे पुलिस कांस्टेबल को बीते एक साल से वेतन नहीं देने पर प्रमुख गृह सचिव, डीजीपी व भरतपुर एसपी से जवाब देने के लिए कहा है. वहीं याचिका की कॉपी अतिरिक्त महाधिवक्ता को दिलाते हुए राज्य इन अफसरों से पांच अक्टूबर तक जवाब पेश करने को कहा है. जस्टिस गणेश राम मीणा ने यह आदेश पुलिस कांस्टेबल जोगेन्दर सिंह की पत्नी उषा की याचिका पर दिए.
याचिका में अधिवक्ता लक्ष्मीकांत शर्मा ने बताया कि याचिकाकर्ता के पति जोगेन्दर सिंह भरतपुर में पुलिस कांस्टेबल हैं. वह 18 अगस्त 2024 को कार्य करते समय अचानक अस्वस्थ हो गए थे. उन्हें जयपुर रैफर किया गया और यहां उन्हें ब्रेन हैमरेज हो गया. इसके चलते वह 90 फीसदी स्थाई निशक्त हो गए और तब से ही कोमा में ही चल रहे हैं. उनका इलाज घर पर ही किया जा रहा है. इसके बावजूद जुलाई, 2025 से उसके पति को वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा. जिस कारण पूरा परिवार ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा है. इस संबंध में याचिकाकर्ता व उसके बेटे ने भरतपुर एसपी को भी प्रार्थना पत्र देकर बकाया वेतन दिलवाने का आग्रह किया था, लेकिन विभाग की ओर से उन्हें अभी तक वेतन नहीं दिया गया है. इसलिए राज्य सरकार व पुलिस विभाग को निर्देश दिया जाए कि वह याचिकाकर्ता के पति का वेतन भुगतान करें. जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है.
कोमा क्या होता है?
कोमा यानी गहरी बेहोशी की ऐसी स्थिति, जिसमें व्यक्ति लंबे समय तक होश में नहीं आता और अपने आसपास की चीजों को समझ या प्रतिक्रिया नहीं दे पाता. यह सामान्य नींद से बिल्कुल अलग स्थिति है और इसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है. कोमा में व्यक्ति की आंखें बंद रह सकती हैं और आवाज देने या दर्द जैसी उत्तेजना पर भी सामान्य प्रतिक्रिया नहीं होती. कुछ मामलों में सांस लेने का तरीका भी असामान्य हो सकता है. मरीज की स्थिति के अनुसार डॉक्टर ब्रेन स्कैन, ब्लड टेस्ट और जरूरत पड़ने पर EEG जैसी जांच कर सकते हैं.
कोमा होने के प्रमुख कारण
कोमा कई कारणों से हो सकता है. गंभीर सिर की चोट, ब्रेन स्ट्रोक, मस्तिष्क में रक्तस्राव या ट्यूमर, बहुत कम या ज्यादा ब्लड शुगर, मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की कमी, गंभीर संक्रमण, लगातार दौरे और कुछ दवाओं या जहरीले पदार्थों की अधिक मात्रा इसके कारण बन सकती है.
क्या कोमा से मरीज ठीक हो सकता है?
कोमा से ठीक होने की संभावना हर मरीज में अलग होती है. यह मुख्य रूप से कोमा के कारण, मस्तिष्क को हुए नुकसान की गंभीरता और इलाज शुरू होने की स्थिति पर निर्भर करती है. कुछ मामलों में मूल कारण का इलाज होने के बाद मरीज धीरे-धीरे होश में आ सकता है. वहीं गंभीर ब्रेन डैमेज होने पर स्थायी दिक्कतें रह सकती हैं या मरीज होश में नहीं लौट सकता.
कोमा में कौन सी दिक्कतें हो सकती हैं?
लंबे समय तक कोमा में रहने पर संक्रमण, बेडसोर और पैरों में खून के थक्के जैसी जटिलताएं हो सकती हैं. इसलिए ऐसे मरीज को अस्पताल में लगातार निगरानी और विशेषज्ञ इलाज की जरूरत होती है.