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Jaipur News: पीएचईडी में पेंशन अदालत लगी. प्रमुख सचिव हेमंत गेरा ने पेंशनधारियों की फरियादें सुनी, लेकिन इस अदालत में ऐसे चौकाने वाले मामले सामने आए, जिसके बाद प्रमुख सचिव हेमंत गेरा भी दंग रह गए. दरअसल बरसों बाद रिटायर्ड होने पर भी पीएचईडी के कर्मचारियों, इंजीनियर्स को पेंशन तक नहीं मिली.
36 साल से मां को नहीं मिली पेंशन
जलदाय मुख्यालय में दोपहर को अदालत बुलाई गई. प्रमुख सचिव हेमंत गेरा के कुर्सी संभालते ही अदालत की कार्रवाई शुरू हुई, जिसमें फरियादों ने अपना-अपना दुख-दर्द सुनाया. सांभरलेक से आए राजेश वर्मा भी उन्हीं फरियादी में से एक थे. उन्होंने अपने पिता की पेंशन के लिए अदालत में हाजिरी दी. अदालत में सुनवाई के दौरान वे बोले कि अब तो सरकार की पेंशन अदालत से आखिरी उम्मीद है.
1990 में पिता श्याम सुंदर वर्मा की मत्यु हो गई थी, उस समय उनके पिता श्याम सुंदर वर्मा मैकेनिकल के पद कार्यरत थे. उनकी मत्यु के 36 साल बाद भी पेंशन नहीं मिली. अदालत से दरख्वास्त लगाते-लगाते राजेश वर्मा प्रमुख सचिव हेमंत गेरा के सामने फूट-फूट कर रोए. वो बोले कि पिता की पेंशन के लिए मां को लेकर दर-दर भटक रहा हूं. उम्मीद पूरी टूट चुकी है. अब पेंशन अदालत से आखिरी आस है, ये अदालत पेंशन नहीं दिलवा पाई तो साहब पिता की पेंशन मां को कभी नहीं मिल पाएगी.
पता नहीं ऐसे कितने केस होंगे?
फरियादियों का दर्द सुनने के बाद प्रमुख सचिव हेमंत गेरा ने चीफ इंजीनियर प्रशासन मुकेश बंसल से रिपोर्ट मांगी. उन्होंने बताया कि विभाग में ऐसे पुराने 9 मामले है. हेमंत गेरा ने कहा कि ये तो विभाग के पास आए हुए मामले है. पता नहीं ऐसे कितने केस होंगे? इनकी सबकी रिपोर्ट तैयार करो, ताकि पात्रों पेंशन का लाभ मिल सके.
पेंशन अदालत के एक महीने बाद बकाया पेंशन प्रकरणों के निस्तारण किया जाएगा, जिसकी रिपोर्ट पेंशन विभाग को भेजी जाएगी. जलदाय विभाग में स्वीकृत पदों की संख्या 35532 है, जिसमें से हर साल 1100 कार्मिक सेवानिवृत्त होते हैं, जिनकी पेंशन स्वीकृत कर पीपीओ जारी करवाए जाते है. पीएचईडी के पेंशनर्स राज्य के कुल पेंशनर्स के 5 प्रतिशत है.
फाइलों में उलझी पेंशन
राजेश वर्मा जैसे कई फरियादी सालो से दर-दर की ठोकरें खा रही है. सरकारी सिस्टम में पेंशन की फाइले उलझ कर रह गई है, जिसमें एक विभाग रिपोर्ट भेजता नहीं और पेंशन विभाग तक मामला पहुंचता नहीं, जिस कारण सालों से परिवार पेंशन की लड़ाई के लिए सरकारी विभागों से लेकर अदालत तक चक्कर ही काटता रहता है. अब समस्या की आखिरी उम्मीद पेंशन अदालत से ही है.
Report- Ashish Chauhan