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IAS शिखर अग्रवाल के बाद पत्नी IPS प्रशाखा माथुर भी APO

राजस्थान में IAS शिखर अग्रवाल के बाद उनकी पत्नी और वरिष्ठ IPS अधिकारी प्रशाखा माथुर को भी APO कर दिया गया है. दोनों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज है. दरअसल, ACB शिखर अग्रवाल के खिलाफ पद के दुरुपयोग, निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों में विस्तृत जांच कर रही है.

Written By Vishnu Prakash Sharma
Published: Oct 31, 2026, 12:46 PM IST | Updated: Oct 31, 2026, 02:25 PM IST
Image Credit: IAS शिखर अग्रवाल और IPS प्रशाखा माथुर
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राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल के बाद उनकी पत्नी आईपीएस अधिकारी प्रशाखा माथुर पर भी सरकार ने कार्रवाई कर दी है. एडीजी प्रशाखा माथुर को उनके पद से हटा दिया गया है. कार्मिक विभाग ने आईपीएस प्रशाखा माथुर को एपीओ करने के आदेश जारी किए हैं. 

शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर पर खुद और परिवार के सदस्यों के लिए एक ही कंपनी से 40 विला-कॉटेज खरीदने का आरोप है. इसके अलावा शिखर अग्रवाल पर पद के दुरुपयोग के आरोप भी लग रहे हैं. फिलहाल आईएएस अग्रवाल और आईपीएस माथुर दोनों विदेश यात्रा पर हैं.

कौन हैं शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर ?
शिखर अग्रवाल, राजस्थान कैडर के 1993 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं. जो अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) के पद पर कार्यरत थे और उद्योग विभाग, रीको (RIICO) के अध्यक्ष समेत कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. वहीं, प्रशाखा माथुर 1995 बैच की IPS अधिकारी हैं और राजस्थान पुलिस में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) के पद पर तैनात हैं. जो मूल रूप से राजस्थान से हीं है और उन्होंने यूपीएससी से पहले मेडिकल की पढ़ाई की थी.  

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क्या होता है APO ?
प्रशासनिक भाषा में APO का पूरा नाम Awaiting Posting Orders होता है, जिसका अर्थ है 'पदस्थापन आदेशों की प्रतीक्षा'. जब किसी सरकारी अधिकारी, जैसे IAS, IPS या RAS अधिकारी को APO किया जाता है, तो इसका मतलब होता है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से उनके वर्तमान पद और जिम्मेदारी से हटा दिया गया है.

APO होने के बाद अधिकारी को फिलहाल कोई नई पोस्टिंग या विभागीय जिम्मेदारी नहीं दी जाती. उन्हें कार्मिक विभाग (DOP – Department of Personnel) में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होती है. इसके बाद अधिकारी नई तैनाती के आदेश जारी होने तक प्रतीक्षा में रहते हैं यानी APO की स्थिति में अधिकारी के पास फिलहाल कोई नियमित पदस्थापन नहीं होता और सरकार के अगले आदेश तक वे प्रशासनिक प्रतीक्षा में रहते हैं.

आपकों बता दें कि बीते दिन IAS शिखर अग्रवाल को APO किया जा चुका है, उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने पद के दुरुपयोग, निजी कंपनी को कथित अनुचित लाभ पहुंचाने और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों में विस्तृत जांच की तैयारी शुरू कर दी है.

राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत मामले में विस्तृत जांच की अनुमति दे दी है. ACB डीजी गोविंद गुप्ता के मुताबिक, उद्योग विभाग से मिली तथ्यात्मक रिपोर्ट और गुप्त सूत्रों से प्राप्त सूचनाओं का परीक्षण करने के बाद प्राथमिक जांच दर्ज की गई. जांच एजेंसी को प्रथम दृष्टया मामले में विस्तृत पड़ताल की आवश्यकता महसूस हुई है.

'पावर कपल' पर दोहरा प्रशासनिक प्रहार : CM की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एक्शन 
उदयपुर और अलवर के रिसॉर्ट में 40 विला और कॉटेज खरीदने, संपत्तियों की कथित तौर पर बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर रजिस्ट्री कराने और एक निजी कंपनी को सरकारी स्तर पर अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है. राज्य सरकार ने मामले का खुलासा होने पर 28 अक्टूबर की देर रात शिखर अग्रवाल को एपीओ किया था. आदेश में हालांकि प्रशासनिक कारणों से एपीओ करना बताया गया था, लेकिन इसके पीछे पद पर रहते हुए अग्रवाल के मामले को प्रभावित नहीं करना भी प्रमुख वजह माना जा रहा है. इस बीच सरकार ने शनिवार को प्रशाखा माथुर को भी एपीओ करने के आदेश जारी कर दिए.

प्रशाखा माथुर राजस्थान कैडर की 1995 बैच की भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं. वर्तमान में प्रशाखा माथुर राजस्थान पुलिस में एडीजीपी (योजना, आधुनिकीकरण एवं कल्याण) के पद पर तैनात थीं. प्रशाखा माथुर ने ट्रेनिंग के बाद अलवर सिटी एएसपी से राजस्थान पुलिस में कैरियर शुरू किया. इसके बाद सिरोही SP, सीआईडी जोधपुर एसपी, राज्य महिला आयोग सदस्य, जीआरपी, जोधपुर ग्रामीण, बांसवाड़ा, पाली, अजमेर में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात रहीं. इसके बाद आईबी नई दिल्ली में अतिरिक्त निदेशक, उपनिदेशक के पद पर रहीं.

पहले भी एपीओ रह चुकी हैं प्रशाखा माथुर
प्रशाखा माथुर दिल्ली से प्रतिनियुक्ति से लौटने के बाद 24 मार्च से 7 अप्रैल 2014 तक एपीओ रही हैं. प्रशाखा माथुर आईजी हैडक्वार्टर, आईजी प्लानिंग, पुलिस कल्याण, आईजी भर्ती, एफएसएल निदेशक, एडीजी राज्य मानवाधिकार आयोग, एडीजी पुनर्गठन नियम, एडीजी पुलिस आधुनिकीकरण और पुलिस कल्याण के पद पर रह चुकी हैं. प्रशाखा ने एमबीबीएस (MBBS) और एमपीएम (MPM) की डिग्री हासिल कर रखी है. 
प्रशाखा माथुर को वर्ष 2022 में विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक (President's Police Medal) से सम्मानित किया गया था.

आरोपों की आंच से एपीओ तक 
राज्य सरकार ने एक दिन पहले ही शिखर अग्रवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विस्तृत जांच की मंजूरी दी है. एसीबी की प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया पद के दुरुपयोग, निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने और स्वयं तथा परिजनों के नाम पर संपत्तियां अर्जित करने से जुड़े पहलुओं की जांच की जाएगी. मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जिस निजी कंपनी को कथित तौर पर विशेष रियायती आर्थिक पैकेज दिया गया, उसी कंपनी के रिसॉर्ट में आईएएस अधिकारी और उनके परिजनों के नाम पर बड़ी संख्या में विला की खरीद कैसे हुई? क्या सरकारी फैसलों और संपत्ति खरीद के बीच कोई संबंध था ? क्या संपत्तियों की कीमत वास्तविक बाजार मूल्य से कम थी ? और क्या इन संपत्तियों की खरीद में आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक धन का इस्तेमाल हुआ ? इन्हीं सवालों के जवाब अब एसीबी की विस्तृत जांच में तलाशे जाएंगे.

एसीबी जांच को सरकार की मंजूरी, अब खुलेंगे संपत्ति खरीद के राज 
एसीबी ने मीडिया खबरों और उद्योग विभाग से प्राप्त तथ्यात्मक रिपोर्ट और सूत्रों से मिली जानकारी के परीक्षण के आधार पर प्राथमिक जांच दर्ज की है.

यह भी पढ़ेंः सीनियर IAS दंपति की 40 कॉटेज खरीदने का मामला सुर्खियों में, अलवर के अनंता रिजॉर्ट से क्या सच आया सामने?


एसीबी की प्रारंभिक जांच में आरोप सामने आए हैं कि शिखर अग्रवाल ने अपने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए एक निजी कंपनी के निदेशकों के साथ कथित मिलीभगत कर कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया. एसीबी के अनुसार, इन लाभों में रिसॉर्ट निर्माण की शर्तों में कथित छूट, आवश्यक प्रमाणपत्रों का सत्यापन किए बिना स्वीकृतियां और विशेष रियायती आर्थिक पैकेज दिए जाने जैसे पहलू शामिल हैं. हालांकि, अभी ये आरोप जांच के अधीन हैं. इनकी पुष्टि विस्तृत जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी.

उदयपुर और अलवर के रिसॉर्ट में खरीदे गए 40 विला-कॉटेज 
इस पूरे मामले का सबसे बड़ा हिस्सा उदयपुर के बुझड़ा और अलवर के अजबगढ़ स्थित रिसॉर्ट में संपत्तियों की खरीद से जुड़ा है. एसीबी की प्रारंभिक जांच में शिखर अग्रवाल, उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर कुल 40 विला-कॉटेज खरीदे जाने की जानकारी मिली है.

संपत्तियों की खरीद का विवरण इस प्रकार बताया गया हैः-
उदयपुर के बुझड़ा रिसॉर्ट में 20 विला
उदयपुर के बुझड़ा स्थित रिसॉर्ट में शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर के नाम पर 10-10 विला खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है.
प्रारंभिक जांच में प्रत्येक विला की कीमत करीब 15 लाख रुपये बताई गई है. इस तरह उदयपुर में खरीदे गए 20 विला की कुल घोषित कीमत करीब 3 करोड़ रुपये बताई जा रही है.

अलवर के अजबगढ़ रिसॉर्ट में 20 विला
अलवर के अजबगढ़ स्थित रिसॉर्ट में भी परिवार के नाम पर 20 विला खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है. प्रारंभिक जांच में सामने आए विवरण के मुताबिक, शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर के नाम पर 8 विला. दोनों पुत्रों के नाम पर 4 विला और सास-ससुर के नाम पर 4 विला.  शेष 4 विला की खरीद और संबंधित रजिस्ट्री का विवरण विस्तृत जांच में स्पष्ट किया जाना है. अजबगढ़ में विला की कीमत करीब 15 लाख से 16.5 लाख रुपये प्रति विला बताई गई है.

एसीबी को आशंका है कि इन संपत्तियों की खरीद बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर की गई. अब एसीबी इन संपत्तियों की वास्तविक बाजार कीमत, रजिस्ट्री में दर्ज मूल्य, भुगतान के स्रोत और खरीद के लिए इस्तेमाल की गई धनराशि का परीक्षण करेगी.

27 मार्च 2026-आर्थिक पैकेज और विला की रजिस्ट्री की तारीख पर सवाल
इस मामले में सबसे अहम कड़ी 27 मार्च 2026 की तारीख को माना जा रहा है. एसीबी को सूत्रों से मिली जानकारी में सामने आया है कि वित्त विभाग ने 27 मार्च 2026 को गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को विशेष रियायती आर्थिक पैकेज जारी किया था. इसी तारीख को शिखर अग्रवाल के नाम पर 20 विला की रजिस्ट्री होने की जानकारी भी सामने आई है. जांच एजेंसी अब इस पूरे घटनाक्रम की पड़ताल करेगी.

जांच के प्रमुख सवाल 
क्या आर्थिक पैकेज देने की प्रक्रिया में शिखर अग्रवाल की कोई भूमिका थी?
क्या कंपनी को सरकारी स्तर पर विशेष रियायतें दिलाने में पद का दुरुपयोग किया गया?
क्या विला की खरीद और आर्थिक पैकेज के बीच कोई संबंध था?
क्या संपत्तियों की खरीद सामान्य व्यावसायिक लेन-देन थी या इसके पीछे कोई अन्य व्यवस्था थी?
क्या कंपनी को दिए गए लाभों से सरकारी खजाने को आर्थिक नुकसान हुआ?
एसीबी इस बात की भी जांच करेगी कि सरकारी फैसलों और निजी संपत्ति खरीद के बीच किसी प्रकार का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध था या नहीं.

निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने के आरोप
एसीबी की प्रारंभिक जांच में गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड का नाम सामने आया है. कंपनी होटल और रिसॉर्ट व्यवसाय से जुड़ी है.आरोप है कि शिखर अग्रवाल ने अपने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए कंपनी के निदेशकों के साथ कथित मिलीभगत कर कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया.

एसीबी के अनुसार, जांच में तीन प्रमुख पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.

पहला-रिसॉर्ट निर्माण की शर्तों में कथित छूट. 
जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि कंपनी के रिसॉर्ट प्रोजेक्ट को निर्माण संबंधी नियमों में कोई विशेष छूट दी गई थी या नहीं. यदि छूट दी गई, तो उसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं.

दूसरा- प्रमाणपत्रों के सत्यापन के बिना स्वीकृतियां.
प्रारंभिक जांच में आरोप है कि आवश्यक प्रमाणपत्रों का सत्यापन किए बिना कंपनी को स्वीकृतियां दी गईं. अब संबंधित विभागों की फाइलों और स्वीकृति प्रक्रिया की जांच की जाएगी.

तीसरा- विशेष रियायती आर्थिक पैकेज. 
एसीबी यह भी जांच करेगी कि कंपनी को विशेष आर्थिक पैकेज देने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी. क्या कंपनी को सामान्य नियमों के तहत लाभ मिला या उसे किसी विशेष परिस्थिति में अतिरिक्त रियायतें दी गईं? इन सभी पहलुओं की जांच के बाद ही कंपनी को लाभ पहुंचाने के आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी.

IAS शिखर अग्रवाल के महत्वपूर्ण पद भी जांच के दायरे में
शिखर अग्रवाल राजस्थान कैडर के 1993 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं. उन्होंने राजस्थान सरकार में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्य किया है. इनमें उदयपुर जिला कलेक्टर, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष और उद्योग विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव जैसे पद शामिल हैं. एसीबी की प्रारंभिक जांच में आरोप है कि इन महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने कथित तौर पर निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया. अब एसीबी संबंधित कार्यकाल की फाइलों, सरकारी आदेशों, अनुमतियों और आर्थिक पैकेज से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण करेगी. जांच में यह भी देखा जाएगा कि संबंधित फैसले किस स्तर पर लिए गए और उनमें किन अधिकारियों की भूमिका थी.

प्रशाखा माथुर की भी बढ़ी मुश्किलें  
प्रशाखा माथुर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है. इस मामले में इसलिए उनका नाम सामने आया है क्योंकि प्रारंभिक जांच के अनुसार उदयपुर और अलवर के रिसॉर्ट में उनके नाम पर भी विला खरीदे जाने की जानकारी मिली है. एसीबी की जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि इन संपत्तियों की खरीद के लिए धनराशि कहां से आई, संपत्तियों का वास्तविक मूल्य क्या था और संबंधित संपत्तियों की खरीद एवं घोषणा से जुड़े दस्तावेजों में कोई अनियमितता थी या नहीं. प्रशाखा माथुर की भूमिका और उनके नाम पर दर्ज संपत्तियों से जुड़े सभी पहलू जांच के अधीन हैं.

आय से अधिक संपत्ति की भी होगी जांच 
एसीबी की प्रारंभिक जांच में शिखर अग्रवाल और उनके परिजनों के नाम पर कथित तौर पर आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने की जानकारी सामने आई है. एसीबी अब संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल की गई धनराशि और संबंधित अधिकारियों की आय के स्रोतों का मिलान करेगी. इसके लिए संपत्ति खरीद के दस्तावेज, बैंक लेन-देन, भुगतान की जानकारी, रजिस्ट्री में दर्ज मूल्य और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है. जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी होगा कि संपत्तियां वास्तव में किसके धन से खरीदी गईं और उनका वास्तविक लाभार्थी कौन है? एसीबी यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि संपत्तियों की खरीद में किसी प्रकार की बेनामी व्यवस्था या आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला बनता है या नहीं. 
 

 

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जी राजस्थान में सीनियर कॉरेस्पॉन्डेंट के रूप में कार्यरत विष्णु प्रकाश शर्मा पत्रकारिता के क्षेत्र में विगत 30 वर्षों से सक्रिय हैं. जी मीडिया में वे BJP, तीसरा मोर्चा,  RSS सहित अन्य राजनीतिक विषय या गृह, वित्त और क्राइम से जुड़ी खबरों को प्रमुखता से कवर करते हैं. बात चाहे बीजेपी संगठन में किसी भी हलचल की या फिर पार्टी के वीवीआईपी दौरों से लेकर कानून व्यवस्था से जुड़ी खबरों की, विष्णु शर्मा सक्रिय रूप से इन सभी की न्यूज कवर कर दर्शकों तक पहुंचाते हैं। राजनीतिक और गृह-पुलिस की खबरों पर भी गहरी पकड़ रखते हैं. राजनीति से जुड़ी हर छोटी बड़ी खबरों को भी दर्शकों तक पहुंचाते हैं.  विष्णु प्रकाश शर्मा जी मीडिया समूह से पहले दैनिक भास्कर में 10 साल, राजस्थान पत्रिका में 12 साल, फर्स्ट इंडिया न्यूज 7 महीने कार्य कर चुके हैं.
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