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सवालों में माननीयों की पेयजल सप्लाई-
अक्सर आम लोगों को पानी की सप्लाई पर सवालिया निशान खडे होते है.जब आज मीडिया खास तक पानी सप्लाई की पड़ताल करेगा.पड़ताल की शुरुआत जयपुर के ज्योति नगर जलाशय सेजहां से राजस्थान के 160 विधायकों के आवासीय फ्लैट्स में पेयजल सप्लाई होती है CWR पहुंचे तो देखा इसकी सीढियां टूटी है.संवाददाता आशीष चौहान जुगाड की सीढ़ियों से जैसे तैसे CWR तक पहुंचते है.वहां देखते है कि तो पता चलता है..इनकी जालियां टूटी हुई है.नीचे जलाशय में देखते है कि पानी में मिट्टी ही मिट्टी दिखाई दे रही है.खुला जलाशय हादसों को तो न्यौता दे ही सकता है.लेकिन इसमें जानवरों के गिरने का भी खतरा.क्या पता कई जानवर जलाशय में गिर भी गए हो ?वहीं पानी विधायकों के आवासों में सप्लाई किया जा रहा है.जहां 160 विधायकों के साथ उनका परिवार भी रहता है.
CWR पर 5 महीने पहले साफ,फिर मिट्टी कहां से-
CWR पर 5 महीने पहले ही इसे साफ करने का जिक्र है.ये तभी लिखा जाता जब इंजीनियर की मॉनिटरिंग में इसकी सफाई की जाती है.नियमों के तहत साल में 1 बार इन जलाशयों की साफ सफाई की जाती है.लेकिन 5 महीने में ही मिट्टी दिखना गंभीर सवाल खडे करता है.सवाल ये कि क्या ठेकेदारो के जरिए सिर्फ तारीख बदलकर पैमेंट उठा लिया जाता है.CWR की जालियां टूटी होना,मिट्टी जमना ये पेयजल प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है.160 विधायकों के फ्लैट्स समेत इस एरिए में पेयजल सप्लाई के लिए एक्सईएन कृष्ण कुमार गुप्ता,एईएन मयंकेश मीणा,जेईएन भरत कुमार राज जिम्मेदार है.एईएन मयंकेश मीणा का कहना है कि पानी के सैपलिंग करवाकर इसकी जालियां लगाई जाएगी.यदि कमी है तो सुधारा जाएगा.
मॉनिटरिंग पर सवाल-
अब सवाल ये है कि माननीयों को पिलाए जाने वाले पानी साफ है. विधायक आवास के साथ साथ विधानसभा में इसी इसी सीडब्लूआर से ही पानी की सप्लाई की जा रही है.अब इन तस्वीरों में इंजीनियर्स की मॉनिटरिंग को लेकर बडे सवाल खडे कर दिए है.क्योंकि ये तो केवल एक जलाशय की कहानी है,यदि दूसरे जलाशयों का हाल देखे तो इससे भी भयावह तस्वीर सामने आ सकती है.