App

जयपुर मेयर चुनाव: मेयर की जंग में बड़ा ट्विस्ट! 78 पार्षद फिर भी BJP ने कराई बाड़ेबंदी, कांग्रेस का ‘सेंध’ दावा

Jaipur News: जयपुर मेयर चुनाव में भाजपा के पास 78 पार्षद हैं, जो बहुमत से सिर्फ दो ज्यादा हैं. कांग्रेस ने सुनीता मावर को प्रत्याशी बनाया है और भाजपा के 20 पार्षदों के संपर्क में होने का दावा किया है. 25 सितंबर को मतदान से तय होगा कि जयपुर का मेयर कौन बनेगा.

जयपुर मेयर चुनाव: मेयर की जंग में बड़ा ट्विस्ट! 78 पार्षद फिर भी BJP ने कराई बाड़ेबंदी, कांग्रेस का ‘सेंध’ दावा
Image Credit: जयपुर मेयर चुनाव में भाजपा के पास 78 पार्षद.

Jaipur News: जयपुर नगर निगम की शहरी सरकार का मुखिया कौन होगा, इसका फैसला 25 सितंबर को होगा. भाजपा और कांग्रेस ने मेयर पद के लिए अपने-अपने प्रत्याशियों के नामांकन के आखिरी दौर में चेहरे सामने ला दिए हैं. भाजपा ने पूर्व शहर अध्यक्ष सुनील कोठारी को मैदान में उतारा है, वहीं, कांग्रेस ने वर्ष 2004 से लगातार पार्षद रहीं सुनीता मावर को प्रत्याशी बनाया है. चेहरे सामने आने के बाद अब असली चुनाव प्रत्याशियों से ज्यादा पार्षदों के भरोसे का बन गया है.

150 पार्षदों वाले जयपुर नगर निगम में बहुमत के लिए 76 वोट चाहिए. भाजपा के पास 78 पार्षद हैं, यानी बहुमत के आंकड़े से सिर्फ दो वोट ज्यादा. इसके बावजूद भाजपा ने अपने पार्षदों को पुष्कर की बाड़ेबंदी में रखा है. इसकी बड़ी वजह 2019 का मेयर चुनाव भी है, जब संख्या बल का गणित मतदान के दौरान बदल गया था. इस बार भाजपा किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती.

दूसरी तरफ कांग्रेस के पास 57 पार्षद हैं और 15 निर्दलीय पार्षद हैं. अगर सभी निर्दलीय कांग्रेस के साथ आ भी जाएं तो कांग्रेस का आंकड़ा 72 तक ही पहुंचेगा. ऐसे में बहुमत के लिए उसे चार और वोटों की जरूरत होगी. यही वजह है कि कांग्रेस की रणनीति भाजपा के पार्षदों में सेंध लगाने के दावे पर टिकी हुई है.

25 सितंबर को सामने आएगा मेयर का चेहरा
जयपुर का अगला महापौर कौन होगा, इसकी तस्वीर 25 सितंबर की शाम तक साफ हो जाएगी. भाजपा ने सुनील कोठारी और कांग्रेस ने सुनीता मावर को अधिकृत प्रत्याशी बनाया है. नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन कुल चार नामांकन दाखिल हुए.

भाजपा की ओर से सुनील कोठारी और कांग्रेस की ओर से सुनीता मावर अधिकृत प्रत्याशी हैं. इनके अलावा कांग्रेस की सुनीता मेठी और दशरथ अटल ने भी कांग्रेस के नाम से नामांकन दाखिल किया. हालांकि कांग्रेस ने दोनों को पार्टी का सिंबल नहीं दिया और सुनीता मावर को अधिकृत प्रत्याशी के तौर पर सिंबल देकर चुनाव मैदान में उतारा.

अब 21 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी. 22 सितंबर को नाम वापसी की तारीख है. इसके बाद 25 सितंबर को मतदान होगा और इसी दिन जयपुर की शहरी सरकार के मुखिया के नाम पर फैसला हो जाएगा.

भाजपा के पास 78 वोट, फिर भी दो वोट की चिंता
मेयर चुनाव का सबसे अहम आंकड़ा भाजपा के 78 पार्षद हैं. 150 सदस्यीय निगम में बहुमत के लिए 76 वोट चाहिए. यानी भाजपा बहुमत से केवल दो वोट आगे है. यही दो वोट इस चुनाव की पूरी कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं. भाजपा ने अपने पार्षदों को पुष्कर के होटल में शिफ्ट किया. इससे पहले मेयर पद के लिए पार्षदों से तीन-तीन पसंद के नाम मांगे गए थे. प्रत्याशी का नाम तय होने के बाद पार्टी ने अपने पार्षदों को एकजुट रखने की रणनीति पर जोर दिया. शनिवार को सुनील कोठारी का नाम फाइनल होने के बाद उन्हें जयपुर बुलाया गया. प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी ने उनके नाम की आधिकारिक घोषणा की. इसके बाद नामांकन के दौरान भाजपा ने अपनी अंदरूनी एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की.

मेयर पद की दौड़ में रहे पुनीत कर्णावट, शैलेंद्र भार्गव और विमल अग्रवाल भी सुनील कोठारी के साथ नामांकन दाखिल करने पहुंचे. पार्टी की ओर से यह तस्वीर महत्वपूर्ण रही, क्योंकि टिकट की दौड़ में शामिल रहे प्रमुख चेहरों को प्रत्याशी घोषित होने के बाद कोठारी के साथ खड़ा दिखाया गया. नामांकन के दौरान सांसद मंजू शर्मा, विधायक कालीचरण सराफ और बालमुकुंद आचार्य सहित पार्टी के दूसरे नेता भी मौजूद रहे.

पुनीत कर्णावट ने 90 वोट मिलने का दावा किया
सुनील कोठारी के अलावा मेयर पद की दौड़ में शामिल रहे पार्षद पुनीत कर्णावट ने भी कोठारी के समर्थन में अपनी बात रखी. उन्होंने निर्दलीयों के समर्थन के साथ 90 वोट होने और कोठारी को 90 से 95 वोट मिलने का दावा किया. कर्णावट ने कहा कि जयपुर इनके नेतृत्व में तेज गति से आगे बढ़ेगा. उन्होंने कोठारी और कार्यकर्ताओं के बीच लगाव की बात भी कही. मेयर पद का प्रत्याशी नहीं बनाए जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें किसी तरह का मलाल नहीं है.

इससे भाजपा की ओर से सिर्फ अपने 78 पार्षदों के समर्थन का दावा ही नहीं किया गया, बल्कि निर्दलीय पार्षदों के समर्थन के जरिए इससे अधिक वोट मिलने की संभावना भी जताई गई. खुद भाजपा प्रत्याशी सुनील कोठारी ने भी कहा कि उन्हें भाजपा के मौजूदा संख्या बल से ज्यादा वोट मिलेंगे. क्रॉस वोटिंग के सवाल पर उन्होंने कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों से भी समर्थन मिलने की उम्मीद जताई.

कांग्रेस का 20 भाजपा पार्षदों के संपर्क में होने का दावा
कांग्रेस के पास 57 पार्षद हैं. उसके साथ सभी 15 निर्दलीय पार्षद आ भी जाएं तो कुल संख्या 72 होगी. यानी बहुमत के लिए चार वोट कम रहेंगे. ऐसे में कांग्रेस की पूरी रणनीति भाजपा के वोटों में सेंध लगाने के दावे पर टिकी है. शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा ने दावा किया है कि भाजपा के 20 पार्षद कांग्रेस के संपर्क में हैं. उन्होंने भाजपा की बाड़ेबंदी पर सवाल भी उठाया. उनका कहना है कि अगर भाजपा को क्रॉस वोटिंग का डर नहीं है तो पार्षदों को बाड़ेबंदी में क्यों रखा गया है.

कांग्रेस की ओर से यह दावा भाजपा के 78 पार्षदों के आंकड़े के बीच चुनाव को दिलचस्प बना रहा है. हालांकि 20 भाजपा पार्षदों के संपर्क में होने का दावा कांग्रेस की ओर से किया गया है. कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता मावर ने नंबर गेम के बजाय जयपुर शहर के मुद्दों पर चुनाव लड़ने की बात कही है. उन्होंने सफाई व्यवस्था, जगह-जगह कचरे के ढेर, आवारा पशुओं और डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण को प्रमुख मुद्दा बनाया. मावर का कहना है कि शहर की समस्याओं को जानने वाले जनप्रतिनिधि उनके पक्ष में मतदान करेंगे.

2019 का मेयर चुनाव भाजपा के लिए क्यों अहम
भाजपा की इस बार की अतिरिक्त सतर्कता के पीछे 2019 का मेयर चुनाव भी अहम है. उस समय नगर निगम में संख्या बल भाजपा के पक्ष में होने के बावजूद मेयर चुनाव में क्रॉस वोटिंग हुई थी. 2019 में भाजपा प्रत्याशी मनोज भारद्वाज को 44 वोट मिले थे, जबकि विष्णु लाटा को 45 वोट मिले. लाटा एक वोट से मेयर बने थे. उस समय की रिपोर्टों में भाजपा खेमे से बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग की बात सामने आई थी.

यही अनुभव इस बार भाजपा की रणनीति में दिखाई दे रहा है. पार्टी के पास 78 पार्षद हैं और बहुमत के लिए 76 वोट चाहिए. यानी संख्या बल स्पष्ट होने के बावजूद बहुमत सिर्फ दो वोट ज्यादा है. पार्षदों को पुष्कर ले जाने, प्रत्याशी चयन से पहले रायशुमारी करने और फिर मेयर पद के प्रमुख दावेदारों को कोठारी के नामांकन में साथ खड़ा करने की रणनीति में पार्टी की एकजुटता पर जोर दिखाई दिया.

सुनील कोठारी के चयन के पीछे क्षेत्रीय समीकरण भी
सुनील कोठारी को मेयर प्रत्याशी बनाए जाने के साथ ही भाजपा संगठन ने विधायकों की इच्छा भी पूरी की. जयपुर में भाजपा के सभी छह विधायक चाहते थे कि उनके विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा कोई पार्षद मेयर न बने. सुनील कोठारी वार्ड 112 से पार्षद चुने गए हैं. यह वार्ड किशनपोल विधानसभा क्षेत्र में आता है, जहां कांग्रेस के अमीन कागजी विधायक हैं.

इस तरह भाजपा के छह विधायकों के विधानसभा क्षेत्रों से बाहर के वार्ड के पार्षद को मेयर प्रत्याशी बनाए जाने से पार्टी के भीतर क्षेत्रीय दावेदारी के टकराव से भी बचने की कोशिश दिखाई देती है.

मेयर चुनाव का नंबर गेम
जयपुर मेयर चुनाव में मौजूदा संख्या बल को समझने के लिए आंकड़े इस तरह हैं-
150 पार्षद - जयपुर नगर निगम में कुल पार्षद
76 वोट - बहुमत का आंकड़ा
78 पार्षद - भाजपा के पास
57 पार्षद - कांग्रेस के पास
15 पार्षद - निर्दलीय
72 वोट - कांग्रेस के 57 और सभी 15 निर्दलीयों के साथ आने पर
4 वोट - इस स्थिति में भी कांग्रेस बहुमत से पीछे
2 वोट - भाजपा बहुमत के आंकड़े से आगे

यानी कागज पर भाजपा के पास बहुमत है, लेकिन यह बहुमत केवल दो वोट का है. कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने 57 पार्षदों और संभावित निर्दलीय समर्थन के साथ बहुमत के आंकड़े तक पहुंचना है.

चेहरे तय, अब भरोसे और वोटों की लड़ाई
मेयर पद के चेहरे अब सामने आ चुके हैं. भाजपा ने सुनील कोठारी और कांग्रेस ने सुनीता मावर को मैदान में उतारा है. लेकिन 25 सितंबर तक चुनाव की असली लड़ाई पार्षदों को अपने साथ रखने और दूसरे खेमे में सेंध लगाने के दावों के बीच होगी.

भाजपा के लिए 78 पार्षदों को एकजुट रखना सबसे अहम है, क्योंकि बहुमत से उसके पास केवल दो वोट ज्यादा हैं. इसी वजह से पार्टी ने पार्षदों की बाड़ेबंदी से लेकर प्रत्याशी चयन और नामांकन के दौरान सभी प्रमुख दावेदारों को एक साथ खड़ा करने तक एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है. दूसरी तरफ कांग्रेस 57 पार्षदों के साथ मुकाबले में है और सभी 15 निर्दलीयों के साथ आने की स्थिति में भी बहुमत से चार वोट दूर रहेगी. ऐसे में शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा का भाजपा के 20 पार्षदों के संपर्क में होने का दावा चुनाव को और रोचक बनाता है.

अब तक दोनों दलों की ओर से अपने-अपने दावे सामने आ चुके हैं. भाजपा की ओर से 90 से 95 वोट मिलने का दावा किया गया है, जबकि कांग्रेस भाजपा के 20 पार्षदों के संपर्क में होने की बात कह रही है.

बहरहाल, जयपुर मेयर चुनाव में फिलहाल सबसे बड़ा आंकड़ा 78 नहीं, बल्कि 'दो' है. भाजपा बहुमत से सिर्फ दो पार्षद आगे है. इसी वजह से पुष्कर की बाड़ेबंदी से लेकर नामांकन के दौरान सभी प्रमुख दावेदारों को एक फ्रेम में लाने तक पार्टी एकजुटता दिखा रही है. उधर कांग्रेस भाजपा की इसी सावधानी को उसकी चिंता के तौर पर पेश कर रही है और 20 पार्षदों के संपर्क में होने का दावा कर रही है. अब 25 सितंबर को होने वाला मतदान ही बताएगा कि दोनों दलों के दावे केवल राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति थे या फिर वोटों के गणित में वास्तव में कोई बदलाव हुआ.
 

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author