निकाय चुनाव में BJP के नए प्रयोग, जयपुर में महिलाओं और मुस्लिम चेहरों पर भरोसा
Jaipur Municipal Election: राजस्थान निकाय चुनाव में बीजेपी ने टिकट वितरण के जरिए कई नए प्रयोग किए हैं. जयपुर के 150 वार्डों में पार्टी ने 50 से ज्यादा महिलाओं और 8 मुस्लिम चेहरों को उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस की पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को भी बीजेपी ने टिकट दिया है. वहीं, पार्टी अब बागियों और निर्दलीय नामांकन भरने वाले कार्यकर्ताओं की जानकारी जुटाकर उन्हें मनाने की कोशिश में जुटी है.
Rajasthan Nikay Chunav: राजस्थान में होने वाले निकाय चुनाव को लेकर बीजेपी ने टिकट वितरण में कई नए प्रयोग किए हैं. पार्टी की कोशिश है कि सत्ता में रहते हुए निकाय चुनाव में भी बेहतर प्रदर्शन किया जाए. इसके जरिए सरकार के कामकाज को लेकर जनता के बीच सकारात्मक संदेश देने की रणनीति मानी जा रही है.
जयपुर में महिलाओं और मुस्लिम चेहरों पर भरोसा
राजधानी जयपुर में बीजेपी ने टिकट वितरण में अलग रणनीति अपनाई है. जयपुर के 150 वार्डों में पार्टी ने 50 से ज्यादा महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है. इसके अलावा 8 मुस्लिम चेहरों को भी चुनाव मैदान में उतारा गया है. पार्टी ने ऐसे कुछ चेहरों पर भी भरोसा जताया है, जो पहले दूसरी पार्टी से जुड़े रहे हैं. जयपुर की पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल इसका प्रमुख उदाहरण हैं. ज्योति खंडेलवाल कांग्रेस में रहते हुए जयपुर की मेयर रह चुकी हैं. उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा था. विधानसभा चुनाव के दौरान वह बीजेपी में शामिल हुई थीं. अब पार्टी ने उन्हें पार्षद चुनाव के लिए टिकट दिया है.
चर्चित चेहरों को भी टिकट
जयपुर के वार्ड-87 से प्रतिभा शर्मा को बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया है. वह मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के ओएसडी आनंद शर्मा की पत्नी हैं. उनके नाम को लेकर भी चुनावी चर्चा तेज है. वहीं वार्ड-76 में टिकट को लेकर पार्टी के भीतर असमंजस की स्थिति सामने आई थी. पूर्व डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावत को पार्टी का प्रत्याशी बनाए जाने की बात थी, लेकिन विधायक की ओर से कुलदीप मिश्रा को सिंबल दिए जाने का मामला सामने आया. विवाद प्रदेश स्तर तक पहुंचने के बाद आखिरकार पुनीत कर्णावत को ही उम्मीदवार बनाया गया.
विधायकों और संगठन को भी तवज्जो
प्रदेश स्तर पर टिकट वितरण में बीजेपी ने विधायकों को भी काफी महत्व दिया है. कई सीटों पर उम्मीदवार तय करने में स्थानीय विधायकों की भूमिका रही है. साथ ही संगठन के नेताओं और कार्यकर्ताओं की राय को भी शामिल किया गया है. हालांकि कुछ जगहों पर पार्टी ने नेताओं की पसंद के बजाय अपने सर्वे को प्राथमिकता दी है. इससे टिकट वितरण में कई नए चेहरों को जगह मिली है.
बागियों को मनाने की कोशिश तेज
टिकट बंटने के बाद बीजेपी अब बागियों को लेकर भी जानकारी जुटा रही है. पार्टी प्रदेश स्तर पर रिपोर्ट तैयार कर रही है. इसमें उन कार्यकर्ताओं और नेताओं की जानकारी शामिल की जा रही है, जिन्होंने पार्टी का टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया है. बीजेपी अब ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं से संपर्क कर उन्हें मनाने की कोशिश कर रही है. पार्टी की नजर इस बात पर भी है कि कहीं बगावत का असर निकाय चुनाव के नतीजों पर न पड़े. अब नामांकन वापसी के दौरान बीजेपी का पूरा फोकस बागियों को साथ लाने और चुनावी नुकसान को रोकने पर रहेगा.