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आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ विरोध तेज हो गया है. बैंक के एम्पलाइज आज से दो दिन तक देशव्यापी हड़ताल पर है. राजस्थान में आईडीबीआई बैंक की 100 शाखाएं बंद रही, जिस कारण बैंक कस्टमर्स के लिए ऑफलाइन बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रही.
आईडीबीआई बैंक के निजीकरण का विरोध
आईडीबीआई बैंक के निजीकरण का विरोध तेज हो गया है. देशभर में आईडीबीआई बैंक कर्मी आज से दो दिन तक हड़ताल पर है. हड़ताल का असर राजस्थान पर दिखाई दिया. सभी आईडीबीआई बैंकों में काम ठप रहा. राजस्थान में 100 से ज्यादा शाखाओं में काम पूरी तरह से प्रभावित रहा. जयपुर में सी स्कीम में बैंक कर्मियों में पेन डाउन के साथ-साथ भूब हड़ताल की. चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में यदि निजीकरण का फैसला वापिस नहीं लिया तो अनिश्चितकाल हड़ताल होगी.
बैंक कर्मियों का कहना है कि बैंक ने पिछले सालों में करोड़ों का लाभ कमाया है और इसका एनपीए भी काफी कम हुआ है. बैंक को मुनाफे में लाने में कर्मचारियों, सरकार और एलआईसी की मेहनत रही है इसलिए इसे निजी हाथों में देना गलत है.
जानकारी के मुताबिक- फेयरफैक्स को हिस्सेदारी बिक्री
केंद्र सरकार (30.48%) और एलआईसी (30.24%) अपनी कुल मिलाकर 60.72% हिस्सेदारी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को ₹52,878 करोड़ में बेच रही हैं. कर्मचारियों का कहना है कि बैंक ने पिछले छह वर्षों में 30,100 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ कमाया है और इसका एनपीए भी काफी कम हुआ है. बैंक को मुनाफे में लाने में कर्मचारियों, सरकार और एलआईसी की मेहनत रही है. इसलिए इसे निजी हाथों में देना गलत है.
क्या है कर्मचारियों की मांग?
कर्मचारी संगठन ने केंद्र सरकार और बैंक प्रबंधन से निजीकरण की प्रक्रिया को वापस लेने की मांग की है. संगठन का कहना है कि आईडीबीआई बैंक का पुनरुद्धार (टर्नअराउंड) किसी निजी निवेश के कारण नहीं, बल्कि सरकार, भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और कर्मचारियों के संयुक्त प्रयासों से संभव हुआ है.
कर्मचारियों ने ग्राहकों का भरोसा बनाए रखा
यूनियन ने अपने बयान में कहा कि वित्तीय संकट के दौर में कर्मचारियों ने ग्राहकों का भरोसा बनाए रखा, बैंकिंग परिचालन को सुचारू रखा और संस्थान को दोबारा मजबूत स्थिति में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके साथ ही सरकार और एलआईसी ने बैंक के पुनर्गठन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की.