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Explainer Hawa Mahal Ward 146: जयपुर के हवामहल विधानसभा क्षेत्र में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा वार्ड 146 की हो रही है. वजह सिर्फ इतनी नहीं है कि यहां निकाय चुनाव होने हैं. इस वार्ड में इस बार कई ऐसी चीजें एक साथ नजर आ रही हैं, जो इसे बाकी वार्डों से अलग बनाती हैं. एक तरफ बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला है. दूसरी तरफ AIMIM और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यानी RLP की मौजूदगी ने चुनावी गणित को और दिलचस्प कर दिया है. ऊपर से AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की जनसभा की चर्चा है और उनके साथ RLP प्रमुख हनुमान बेनीवाल के एक मंच पर आने की बात भी इस मुकाबले को ज्यादा अहम बना रही है.
यही वजह है कि वार्ड 146 को अब सिर्फ एक सामान्य नगर निकाय वार्ड के तौर पर नहीं देखा जा रहा. यहां होने वाली राजनीतिक हलचल पर हवामहल विधानसभा के साथ-साथ जयपुर की राजनीति से जुड़े लोगों की भी नजर है.
पहले हवामहल विधानसभा का चुनावी गणित समझिए
वार्ड 146 की अहमियत समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना जरूरी है. साल 2023 के विधानसभा चुनाव में हवामहल सीट पर मुकाबला बेहद कांटे का रहा था. बीजेपी के बालमुकुंद आचार्य को 95,989 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के आर.आर. तिवारी को 95,015 वोट मिले. दोनों के बीच जीत का अंतर सिर्फ 974 वोट रहा.

यानी करीब ढाई लाख मतदाताओं वाली इस विधानसभा सीट पर मुकाबला आखिरी दौर तक काफी करीबी रहा था. चुनाव आयोग के आंकड़ों में हवामहल विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,54,408 मतदाता दर्ज थे. यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि हवामहल में छोटी-सी वोट शिफ्ट भी नतीजे पर असर डाल सकती है. 2023 के चुनाव में AIMIM के उम्मीदवार को भी 588 वोट मिले थे. यह संख्या जीत-हार के मुकाबले में बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन इससे इतना जरूर पता चलता है कि पार्टी ने इस सीट पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी.
मुस्लिम वोट बैंक क्यों बन रहा चर्चा का बड़ा कारण?
हवामहल विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी-खासी संख्या है. राजनीतिक दलों के लिए यह वोट बैंक लंबे समय से अहम माना जाता रहा है. यही कारण है कि जब AIMIM यहां सक्रिय होती है तो मुकाबले का गणित अपने आप चर्चा में आ जाता है. खासकर तब, जब AIMIM मुस्लिम बहुल इलाकों में अपना आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है.
हालिया निकाय चुनाव की तैयारियों को लेकर भी AIMIM का फोकस मुस्लिम बहुल शहरी इलाकों पर बताया जा रहा है. दूसरी तरफ RLP भी उन सीटों पर अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश में है जहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि किसी एक समुदाय का हर वोट किसी एक पार्टी को ही जाएगा. चुनाव में स्थानीय उम्मीदवार, व्यक्तिगत पकड़, मोहल्ले के मुद्दे और पार्टी संगठन भी काफी मायने रखते हैं.
ओवैसी और बेनीवाल एक मंच पर क्यों खास?
इस चुनाव में सबसे ज्यादा ध्यान जिस राजनीतिक समीकरण पर है, वह AIMIM और RLP की साथ दिखती तस्वीर है. असदुद्दीन ओवैसी की जनसभा और उनके साथ हनुमान बेनीवाल की मौजूदगी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि दोनों नेताओं की अपनी-अपनी राजनीतिक पहचान है. AIMIM का फोकस खास तौर पर मुस्लिम वोटरों के बीच है, जबकि RLP राजस्थान की राजनीति में अलग तरह का जनाधार रखने वाली पार्टी है.
अगर दोनों नेता एक मंच पर आते हैं तो यह पहली नजर में ही राजनीतिक संदेश देने वाला कदम होगा. खासकर ऐसे इलाके में, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी ज्यादा मानी जाती है और विधानसभा चुनाव में जीत का अंतर एक हजार वोट से भी कम रहा हो.
लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है. सिर्फ नेताओं के एक मंच पर आने से यह तय नहीं हो जाता कि वोट भी उसी हिसाब से ट्रांसफर होंगे. स्थानीय चुनाव में यह देखना होगा कि दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता जमीन पर कितने साथ चलते हैं और मतदाता इस समीकरण को किस तरह लेते हैं.
बीजेपी के लिए चुनौती क्या है?
बालमुकुंद आचार्य 2023 में हवामहल से विधायक बने थे. उनकी जीत का अंतर सिर्फ 974 वोट था. इसलिए उनके विधानसभा क्षेत्र में होने वाला निकाय चुनाव बीजेपी के लिए स्थानीय स्तर पर भी अहम माना जा सकता है. वार्ड चुनाव में उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, स्थानीय समस्याएं और पार्टी संगठन सीधे तौर पर असर डालते हैं.
बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि विधानसभा चुनाव में मिले समर्थन को निकाय स्तर पर भी बनाए रखा जाए. वहीं, अगर विपक्षी वोट अलग-अलग हिस्सों में बंटते हैं तो उसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है. लेकिन अगर कांग्रेस, AIMIM और RLP अपने-अपने प्रभाव वाले वोटरों को अच्छी तरह मतदान केंद्र तक पहुंचाने में सफल रहते हैं, तो मुकाबला ज्यादा पेचीदा हो सकता है.
कांग्रेस के लिए भी आसान नहीं है रास्ता
कांग्रेस के लिए वार्ड 146 इसलिए अहम है क्योंकि हवामहल विधानसभा चुनाव में उसके उम्मीदवार आर.आर. तिवारी महज 974 वोट से पीछे रहे थे. इसका मतलब यह है कि कांग्रेस के पास यहां मजबूत वोट बेस होने का दावा करने की वजह है. लेकिन निकाय चुनाव विधानसभा चुनाव से अलग होते हैं. यहां उम्मीदवार की पहचान बहुत ज्यादा मायने रखती है. जिस प्रत्याशी की अपने इलाके में अच्छी पकड़ होगी, उसके लिए पार्टी के वोट के अलावा व्यक्तिगत वोट भी जुटाना आसान होगा.
कांग्रेस के सामने एक और चुनौती यह होगी कि अगर AIMIM मजबूत तरीके से मैदान में उतरती है तो मुस्लिम वोटों में कितना बंटवारा होता है. इसका सीधा असर मुकाबले पर पड़ सकता है, लेकिन अभी इसे लेकर किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.
क्या AIMIM का असर सिर्फ मुस्लिम वोटों तक रहेगा?
AIMIM के लिए वार्ड 146 एक तरह से अपनी स्थानीय पकड़ दिखाने का मौका हो सकता है. अगर पार्टी यहां अच्छा प्रदर्शन करती है तो जयपुर के दूसरे मुस्लिम बहुल वार्डों में भी उसके कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ सकता है. लेकिन AIMIM के लिए चुनौती भी कम नहीं है. विधानसभा चुनाव 2023 में उसके उम्मीदवार को हवामहल सीट पर 588 वोट मिले थे.
इसलिए विधानसभा चुनाव के आंकड़े यह नहीं बताते कि पार्टी के पास अभी कितना बड़ा वोट बेस है. निकाय चुनाव में पार्टी को यह साबित करना होगा कि वह विधानसभा चुनाव के मुकाबले अपने समर्थन को बढ़ा पाती है या नहीं.
वार्ड 146 का नतीजा क्या संकेत देगा?
इस चुनाव का नतीजा सिर्फ एक पार्षद की जीत-हार तक सीमित नहीं रह सकता. अगर AIMIM यहां मजबूत प्रदर्शन करती है तो इसे जयपुर में उसके बढ़ते प्रभाव के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है. अगर RLP और AIMIM की रणनीति जमीन पर असर दिखाती है तो छोटे दलों के लिए भी यह संदेश होगा कि बीजेपी-कांग्रेस के बीच मुकाबले वाले शहरी इलाकों में जगह बनाई जा सकती है.
वहीं, बीजेपी अगर यह सीट जीतती है तो उसके लिए यह संदेश होगा कि विपक्षी वोटों की संभावित काट के बावजूद उसका संगठन और उम्मीदवार स्थानीय स्तर पर मजबूत है. कांग्रेस की जीत होने पर पार्टी इसे हवामहल में अपनी वापसी के संकेत के तौर पर पेश कर सकती है.
असली मुकाबला वोटों के साथ मैनेजमेंट का भी
वार्ड 146 में चुनाव सिर्फ भाषणों या बड़े नेताओं की सभाओं से तय नहीं होगा. असली परीक्षा मतदान वाले दिन होगी. कौन पार्टी अपने समर्थकों को बूथ तक पहुंचाती है, किस उम्मीदवार की स्थानीय पकड़ मजबूत है, किस मुद्दे पर मतदाता ज्यादा नाराज या संतुष्ट है और छोटे दल कितने वोट अपनी तरफ खींच पाते हैं. इन सभी चीजों का असर नतीजे पर पड़ेगा.
सबसे अहम बात यह है कि हवामहल विधानसभा में 2023 का मुकाबला पहले ही बेहद करीबी रह चुका है. 974 वोटों की जीत बताती है कि यहां बड़े वोट बैंक के साथ-साथ छोटे-छोटे वोट समूह भी चुनाव की दिशा बदल सकते हैं. यही वजह है कि वार्ड 146 पर नजर रखना सिर्फ एक वार्ड का चुनाव देखना नहीं है. यह समझने का मौका भी है कि जयपुर के इस अहम इलाके में बीजेपी, कांग्रेस, AIMIM और RLP के बीच बनता नया समीकरण जमीन पर कितना असर डाल पाता है.
जयपुर का हवामहल विधानसभा क्षेत्र एक बार फिर चुनावी चर्चा के केंद्र में है, लेकिन इस बार वजह विधानसभा की सीट नहीं, बल्कि वार्ड 146 है. यहां बीजेपी और कांग्रेस के पारंपरिक मुकाबले के बीच AIMIM और RLP की सक्रियता ने चुनावी समीकरण को दिलचस्प बना दिया है. ओवैसी की प्रस्तावित सभा और हनुमान बेनीवाल की मौजूदगी ने इस वार्ड को खास बना दिया है. ऐसे में सवाल है कि क्या यह मुकाबला सिर्फ एक पार्षद चुनने तक सीमित रहेगा या इसका असर पूरे हवामहल के राजनीतिक माहौल पर भी पड़ेगा?