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RLP का युवाओं और महिलाओं पर फोकस
बेनीवाल ने एलान किया कि पार्टी इस बार के पंचायती राज चुनावों में नौजवानों और बेटियों को ज्यादा से ज्यादा टिकट देगी और चुनावी मैदान में उतारेगी. उनका ये दांव पारंपरिक पार्टियों के बुजुर्ग चेहरों के खिलाफ एक 'युवा विकल्प' पेश करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.पार्टी का पूरा जोर इस बात पर है कि जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को साधते हुए हर वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया जाए, ताकि ग्रामीण स्तर पर पार्टी की जड़ें और गहरी हो सकें.
'इंडिया गठबंधन' और कांग्रेस पर तीखा हमला
हनुमान बेनीवाल ने कांग्रेस पार्टी और राष्ट्रीय स्तर के 'इंडिया अलायंस' पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने गठबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए. बड़ी पार्टियों का अहंकार: बेनीवाल ने दोटूक कहा कि गठबंधन में सिर्फ उन्हीं दलों को तवज्जो दी जाती है जिनके पास 15 से ज्यादा सांसद या विधायक हों, और छोटी क्षेत्रीय पार्टियों को हमेशा दरकिनार कर दिया जाता है.
वोट चोरी का मुद्दा और कांग्रेस की नीति
देश में इन दिनों चर्चा का विषय बने 'वोट चोरी' के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मुद्दा तो सही है, लेकिन कांग्रेस पार्टी ये चाहती है कि इस पूरे अभियान की कमान सिर्फ और सिर्फ उसके हाथ में रहे. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने रवैये से खुद 'इंडिया अलायंस' को अंदरखाने कमजोर किया है. ईडी और गिरफ्तारियों पर तंज: जांच एजेंसियों और राजनीतिक गिरफ्तारियों के मुद्दे पर भी बेनीवाल ने कांग्रेस की कार्यशैली पर कटाक्ष किया.
मुस्लिम वोट बैंक का बड़ा समीकरण
बेनीवाल ने बीकानेर की स्थानीय राजनीति का विशेष हवाला देते हुए कांग्रेस और बीजेपी दोनों पर हमला बोला. बेनीवाल ने आरोप लगाया कि बीकानेर क्षेत्र में कांग्रेस और बीजेपी ने अंदरखाने मिलकर एक मुस्लिम प्रत्याशी को हराने का काम किया है. इस बयान के साथ ही बेनीवाल ने एक बहुत बड़ा सियासी समीकरण सामने रख दिया और कहा कि
"अगर मुस्लिम समाज कांग्रेस का साथ छोड़कर आरएलपी के साथ मजबूती से खड़ा हो जाता है, तो राजस्थान की राजनीति का पूरा गणित बदल जाएगा और हम प्रदेश में 125 से ज्यादा सीटें जीतने की स्थिति में आ जाएंगे"
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बेनीवाल का ये बयान जाट-दलित समीकरण के साथ-साथ मुस्लिम मतदाताओं को अपने पाले में खींचने की एक सोची-समझी रणनीति है, क्योंकि राजस्थान के कई जिलों में मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
क्या आरएलपी वाकई तीसरी ताकत बन पाएगी ?
राजस्थान में जब भी 'तीसरी ताकत' की बात आती है, तो हनुमान बेनीवाल का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है. जाट बहुल इलाकों और मारवाड़-क्षेत्र में आरएलपी का एक मजबूत कैडर बेस मौजूद है. हालांकि, पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसे शहरी सीमाओं से निकालकर सुदूर ग्रामीण अंचलों और पंचायत स्तर तक एक अनुशासित संगठन के रूप में खड़ा करने की है. कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दल पंचायत चुनावों को आगामी विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल मानते हैं. ऐसे में आरएलपी का ये आक्रामक तेवर दोनों ही पार्टियों के ग्रामीण वोट बैंक में सेंध लगा सकता है. राजस्थान की कुल जनसंख्या (लगभग 6.85 करोड़) में मुस्लिम समुदाय की आबादी करीब 9.07% (लगभग 62 लाख) है.पारंपरिक रूप से राजस्थान का एक बड़ा मुस्लिम मतदाता वर्ग कांग्रेस के साथ जुड़ा रहा है. यही वजह है कि बेनीवाल का ये बयान सीधे तौर पर कांग्रेस के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले वोट बैंक में सेंध लगाने की सोची-समझी रणनीति है.
क्या पंचायत चुनावों में दिखेगा बेहतर प्रदर्शन?
साल 2023 के विधानसभा चुनाव में RLP का प्रदर्शन पहले के मुकाबले कमजोर रहा था. पार्टी सिर्फ 1 सीट पर ही जीत दर्ज कर पाई थी और खुद सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने खींवसर सीट से बेहद कड़े मुकाबले में बीजेपी प्रत्याशी को अंतर से हराया था. हालांकि पार्टी कई सीटों पर तीसरे विकल्प के रूप में उभरी थी, लेकिन विधायकों की संख्या के मामले में पार्टी सिमटकर सिर्फ हनुमान बेनीवाल तक सीमित रह गई थी. वहीं लोकसभा चुनाव 2024 में हनुमान बेनीवाल ने 'इंडिया अलायंस' के तहत कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था.नागौर लोकसभा सीट से खुद हनुमान बेनीवाल ने बीजेपी उम्मीदवार ज्योति मिर्धा को हराकर शानदार जीत दर्ज की और संसद पहुंचे थे. ये चुनाव RLP के लिए अपनी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रासंगिकता बनाए रखने के लिहाज से बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ था. लेकिन हालिया निकाय चुनावों में RLP ने मारवाड़ और शेखावाटी बेल्ट दर्जनों वार्डों में जीत दर्ज की है. पार्टी ने इन चुनावों में ये दिखाने की कोशिश की है कि वो अभी भी जमीनी स्तर पर एक मजबूत 'तीसरी ताकत' बनी हुई है,