पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ने के लिए हाईकोर्ट का कथित फर्जी आदेश पेश करने के मामले में कांग्रेस विधायक श्रवण कुमार के बेटे जयप्रकाश की मुश्किलें बढ़ गई हैं. सूरजगढ़ पंचायत समिति चुनाव से जुड़े इस मामले में पुलिस ने जयप्रकाश और हरियाणा निवासी उमेश भूकर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. सूरजगढ़ के रिटर्निंग अधिकारी और एसडीएम की शिकायत पर धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया गया है. इस बीच, 2 नवंबर को राजस्थान हाईकोर्ट में भी मामले की सुनवाई होनी है.
व्हाट्सएप पर भेजा गया था हाईकोर्ट का कथित आदेश
जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि सूरजगढ़ पंचायत समिति सदस्य के नामांकन के संबंध में रिटर्निंग अधिकारी के सामने एक आवेदन दिया गया था. इसके साथ व्हाट्सएप के जरिए हाईकोर्ट का एक आदेश साझा किया गया था. इस आदेश में कहा गया था कि जयप्रकाश का नामांकन पत्र अन्य शर्तें पूरी होने पर स्वीकार किया जाए. उस समय मतदाता सूची फ्रीज हो चुकी थी. ऐसे में सूरजगढ़ एसडीएम ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा. इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग से इस मामले में जानकारी ली गई.
हाईकोर्ट की वेबसाइट पर नहीं मिला आदेश
कलेक्टर के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने प्रस्तुत आदेश की सत्यापित प्रति मांगी थी. जब इसकी सत्यापित प्रति प्राप्त करने की कोशिश की गई तो पता चला कि हाईकोर्ट की वेबसाइट पर ऐसा कोई आदेश उपलब्ध नहीं है. बाद में सामने आया कि रिटर्निंग अधिकारी को भेजा गया आदेश कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज था. इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए. आयोग के निर्देश पर सूरजगढ़ के रिटर्निंग अधिकारी एवं एसडीएम ने पुलिस में शिकायत दी.
विधायक पुत्र के साथ हरियाणा का उमेश भूकर भी आरोपी
पुलिस ने जयप्रकाश के साथ हरियाणा निवासी उमेश भूकर को भी एफआईआर में आरोपी बनाया है. पुलिस के अनुसार, कथित आदेश जिस मोबाइल नंबर से व्हाट्सएप पर भेजा गया था, तकनीकी जांच में वह नंबर हरियाणा के झज्जर जिले के गोरिया गांव निवासी उमेश कुमार भूकर के नाम पर दर्ज मिला. बताया जा रहा है कि उमेश भूकर एक राष्ट्रीयकृत सरकारी बैंक में मैनेजर है. पुलिस अब मोबाइल नंबर और कथित आदेश से जुड़े पूरे मामले की जांच कर रही है.
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए पहुंचे थे हाईकोर्ट
जानकारी के अनुसार, विधायक पुत्र जयप्रकाश ने जीणी ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. हालांकि, हाईकोर्ट ने तत्काल कोई आदेश देने के बजाय मामले में आगे की तारीख तय की थी. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख होने के कारण जयप्रकाश ने रिटर्निंग अधिकारी के सामने कथित फर्जी आदेश पेश कर दिया. जब सत्यापित प्रति मांगी गई तो जयप्रकाश की ओर से कोई प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई. इसके बाद आदेश को लेकर संदेह गहरा गया.
हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार को तीन दिन में जांच के दिए थे निर्देश
पिछली सुनवाई में जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ के सामने राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से सूरजगढ़ आरओ का 16 अक्टूबर का पत्र और व्हाट्सएप पर भेजे गए कथित आदेश की प्रतियां पेश की गई थीं. कोर्ट ने जब इस आदेश का अपनी मूल फाइल से मिलान किया तो सामने आया कि 16 अक्टूबर को ऐसा कोई आदेश पारित नहीं हुआ था. उस दिन केवल अगली सुनवाई की तारीख तय की गई थी. इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए रजिस्ट्रार को तीन दिन में जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे. सुनवाई के दौरान जयप्रकाश के अधिवक्ता कपिल गुप्ता ने भी कथित फर्जी आदेश से खुद को अलग कर लिया था. उन्होंने कहा था कि याचिकाकर्ता की इस हरकत के कारण उन्हें भी विभागीय जांच और पूछताछ का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने जयप्रकाश के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की बात भी कही थी.
आज हाईकोर्ट में फिर होगी सुनवाई
जिला कलेक्टर ने बताया कि हाईकोर्ट या निर्वाचन आयोग के आदेश को कूटरचित तरीके से पेश करने पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है. एफआईआर इसी दिशा में पहली कार्रवाई है. अब पुलिस जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी. सीआई रामसिंह के अनुसार, एसडीएम की रिपोर्ट पर एफआईआर दर्ज की गई है और मामले की जांच जारी है. अब 2 नवंबर को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें रहेंगी. पिछली सुनवाई में रजिस्ट्रार को तीन दिन में जांच रिपोर्ट देने के निर्देश मिले थे. ऐसे में आज की सुनवाई में जांच रिपोर्ट पेश होने या उस पर चर्चा होने की संभावना है.