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Disaster Managaement In India: भारत के पूर्वी तट पर शक्तिशाली तूफानों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए साइक्लोन-वॉर्निंग सिस्टम, मौसम रडार, इवैक्युएशन शेल्टर और डिजास्टर रिस्पॉन्स टीमों का एक नेटवर्क बनाने में एक दशक से अधिक समय लगा है, लेकिन साइक्लोन अर्नब के भारत के पूर्वी तट पर आने के एक हफ्ते से भी कम समय में एक और वेदर सिस्टम 'मुरासु' के आंध्र प्रदेश तट पर आने का खतरा है. यह इलाका बार-बार आने वाले चक्रवाती तूफानों से निपटने के लिए कितना तैयार है?
चक्रवाती तूफान का खतरा आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु के लिए सबसे ज्यादा है. यहां लाखों लोग निचले तटीय जिलों में रहते हैं, जिन्हें तेज हवाओ, तूफान और बाढ़ का खतरा रहता है. भारतीय मौसम विभाग साइक्लोन और भारी बारिश समेत वेदर सिस्टम की लोकेशन, मूवमेंट और इंटेंसिटी को ट्रैक करने के लिए डॉप्लर वेदर रडार (DWRs) का इस्तेमाल करता है.
IMD की 2025 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, ईस्ट कोस्ट यानी चेन्नई, कोलकाता, मछलीपट्टनम, विशाखापट्टनम, पारादीप, गोपालपुर, श्रीहरिकोटा और कराईकल में 8 रडार लोकेशन हैं. इनमें IMD की ओर से ऑपरेट किए जाने वाले रडार के साथ-साथ वे फैसिलिटी भी शामिल हैं, जिनका डेटा इसके मॉनिटरिंग नेटवर्क में इंटीग्रेटेड है.
रडार नेटवर्क को ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन, रेन गेज, सैटेलाइट ऑब्जर्वेशन और ओशन मॉनिटरिंग सिस्टम से सपोर्ट मिलता है. ये इंस्ट्रूमेंट मौसम वैज्ञानिकों को बारिश, हवा के पैटर्न और जमीन के पास आने वाले तूफान का अंदाजा लगाने में मदद करते हैं.
आंध्र प्रदेश ने तूफान से निपटने के लिए एक साइक्लोन इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम बनाया है, जो तूफान के ट्रैक, जमीन पर गिरने की संभावना, कमजोर आबादी, शेल्टर, हॉस्पिटल, स्कूल और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में जानकारी इकट्ठा करता है.
The #Severe_Cyclonic_Storm “#Murasu” [Pronunciation: Murasu]” over Westcentral & adjoining Southwest Bay of #Bengal moved west-northwestwards with a speed of 22 kmph during past 06 hours and lay centered at 0830 hours IST of today, the 02nd #November, 2026 over the Westcentral Bay of Bengal near Latitude 14.1°N and Longitude 81.4°E, about 160 km east-southeast of Nellore (Andhra Pradesh), 180 km northeast of Chennai (Tamil Nadu), 180 km east-southeast of Kavali (Andhra Pradesh), 210 km southeast of Ongole (Andhra Pradesh) and 240 km south of Machilipatnam (Andhra Pradesh). It is very likely to move northwestwards and cross south #Andhra #Pradesh coast as a #Severe_Cyclonic_Storm with wind speed of 100 to 110 kmph gusting to 120 kmph between #Nellore and #Narsapur, to the south of #Ongole during midnight (2330 Hrs IST) of today, the 02nd November to early hours (0400 Hrs IST) of tomorrow, the 3rd November, 2026. #CycloneMurasu
— India Meteorological Department (@Indiametdept) November 2, 2026
स्टेट डैशबोर्ड अधिकारियों को उन जिलों और मंडलों की पहचान करने में मदद करता है. यह पावर ट्रांसफॉर्मर और हेल्थ सुविधाओं जैसी जरूरी चीजों को भी मैप करता है. लंबे और कमजोर कोस्टलाइन के लिए यह सिस्टम बेहद जरूरी है.
ओडिशा में भी एक अर्ली वॉर्निंग डिसेमिनेशन सिस्टम है. इसे डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी से सीधा कोस्टल समुदाय तक अलर्ट भेजने के लिए डिजाइन किया गया है. यह सिस्टम 6 तटीय जिलों के 22 ब्लॉक के 1,205 गांवों को कवर करता है. वहीं, इसमें तट के 1.5 किलोमीटर के अंदर 122 अलर्ट टावर हैं और इसमें सैटेलाइट बेस्ड कम्युनिकेशन और डिजिटल रेडियो लिंक हैं जो राज्य, जिला और ब्लॉक लेवल के इमरजेंसी सेंटर को जोड़ते हैं.
इस अर्ली वॉर्निंग डिसेमिनेशन सिस्टम का मकसद नॉर्मल कम्युनिकेशन नेटवर्क में रुकावट आने पर भी वॉर्निंग देते रहना है. इसके अलावा ओडिशा में डिजास्टर रिस्पॉन्स टीमें भी हैं, जिसमें ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स टीम, फायर सर्विस और चौबीसों घंटे चलने वाले कंट्रोल रूम के जरिए कोॉर्डिनेशन भी शामिल है.
तमिलनाडु में भारी बारिश, ड्रेनेज और पानी भरने जैसी समस्याओं के लिए एक नेटवर्क स्थापित किया गया है, जिसमें ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और बारिश मापने वाले गेज शामिल हैं. इसकी रडार लोकेशन में चेन्नई, कराईकल और श्रीहरिकोटा शामिल हैं. चेन्नई में ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन अपने स्टॉर्मवॉटर ड्रेनेज नेटवर्क को बढ़ा रहा है और उसका मेंटेनेंस कर रहा है. यह शहर अपनी कम ऊंचाई, समतल जमीन और समुद्र के पास होने की वजह से खास तौर पर कमजोर है. यहां सैकड़ों किलोमीटर लंबे नालों पर काम चल रहा है, साथ ही डीसिल्टिंग और मेंटेनेंस ऑपरेशन भी चल रहे हैं.
बता दें कि भारत ने तूफान से बचने के लिए कोस्टल इंफ्रास्ट्रक्चर का अधिकतर हिस्सा नेशनल साइक्लोन रिस्क मिटिगेशन प्रोजेक्ट (NCRMP) के तहत बनाया है. इसका पहला फेज आंध्र प्रदेश और ओडिशा को कवर करता था और दिसंबर 2018 में पूरा हुआ था. दूसरे फेज में पश्चिम बंगाल समेत 6 राज्य शामिल थे और यह मार्च 2023 में पूरा हुआ. इस प्रोजेक्ट में अर्लीवॉर्निंग सिस्टम, मल्टीपर्पस साइक्लोन शेल्टर, इवैक्युएशन रोड और पुल, सलाइन एम्बैंकमेंट, अंडरग्राउंड इलेक्ट्रिकल केबलिंग और डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए ट्रेनिंग शामिल थी. सरकार ने पहले फेज में लगभग Rs 2,525 करोड़ और दूसरे फेज में Rs 1,807 करोड़ खर्च होने की जानकारी दी थी.