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माता सीता के जीवनकाल की सबसे अहम घटनाओं में से एक है, उनका अग्नि परीक्षा देना. जब लंका में लंबे समय तक रावण के राज्य में रहने के बाद सीता माता को अपने पति भगवान राम के साथ अयोध्या वापस आना था तो उससे पहले उन्होंने अग्नि परीक्षा दी थी. इसके लिए वे धधकती अग्नि में गईं और सकुशल वापस आईं. यह उनकी पवित्रता की परीक्षा थी, जो उन्होंने लोक मर्यादा के चलते दी थी. लेकिन वनवास पर जाने से पहले और वनवास के बाद अयोध्या आने से पहले भी सीता जी इसी तरह अग्नि में गईं थीं. जिसके पीछे एक बड़ा रहस्य है. जिसका वर्णन पौराणिक कथाओं में मिलता है.
1. पहली बार: सबसे पहली बार सीता जी अग्नि में तब गईं, जब वे अपने पति भगवान राम के साथ वनवास पर जा रही हैं. तब भगवान राम ने उनसे ऐसा करने के लिए कहा था. दरअसल, प्रभु राम नहीं चाहते थे कि कोई भी आसुरी शक्ति माता सीता को छुए या कोई अप्रिय घटना हो. इसलिए उन्होंने अग्नि देव से प्रार्थना की कि वे असली माता सीता को अपने संरक्षण में रखें. लिहाजा जब सीता जी ने अग्नि में प्रवेश किया तो असली सीता अग्नि में समाहित हो गईं और माया रूपी सीता बाहर आईं, जो असली सीता का प्रतिबिंब थीं. फिर वही भगवान राम के साथ वनवास पर गईं.
2. दूसरी बार: जब रावण ने सीता जी अपहरण किया और वे लंबे समय तक लंका में अशोक वाटिका में रहीं. फिर भगवान राम ने रावण का वध किया. इसके बाद लोक मर्यादा के लिए अपनी पवित्रता सिद्ध करने सीता जी अग्नि में गईं. यही घटना सीता जी की अग्नि परीक्षा के नाम से जानी जाती है.
3. तीसरी बार : जब वनवास से लौटकर सीता जी अयोध्या वापस जा रही थीं, तब प्रभु राम ने वापस असली सीता को लाने के लिए सीता जी के प्रतिबिंब से अग्नि में जाने के लिए कहा. इसके बाद दिव्य चमत्कार हुआ और अग्निदेव के पास 14 साल सुरक्षित रहीं असली सीता जी अग्नि से वापस आईं और वनवास पर जो उनका प्रतिबिंब गया था, वो विलीन हो गया. यानी कि वनवास से पहले और बाद में 2 बार अग्नि में जाना सीता जी की सुरक्षा के लिए था. ये घटनाएं चूंकि किसी के सामने नहीं हुईं थीं, इसलिए लोगों को पता नहीं था.
(Disclaimer: यहां बताया गया प्रसंग वाल्मीकि रामायण, अध्यात्म रामायण और लोक-मान्यताओं पर आधारित है. Zee News इसकी पुष्टि नहीं करता है. इसका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि प्रचलित कथाओं की जानकारी देना है.)