)
Rajasthan News: देश के पारंपरिक मादक पदार्थों के साथ ही पश्चिम का एक खतरनाक एक खतरनाक नशा अब राजस्थान में अपना नेटवर्क फैला रहा है. इसका नाम है एमडी ड्रग्स यानी मेफेड्रोन. इस नशे को कभी हाई-प्रोफाइल पार्टियों और पब कल्चर से जोड़कर देखा जाता था. वहीं, अब राजस्थान में अवैध मैन्युफैक्चरिंग के बड़े नेटवर्क में बदल चुका है.
राजस्थान में एमडी ड्रग्स का नेटवर्क कितना बड़ा है?
ANTF और राजस्थान पुलिस की लगातार कार्रवाई में सामने आई तस्वीर बेहद चिंताजनक है. दावा है कि उत्तर भारत में जब्त की जा रही एमडी ड्रग्स का बड़ा हिस्सा राजस्थान से बरामद हो रहा है. जोधपुर से जयपुर तक, खेतों से लेकर बंद औद्योगिक परिसरों तक, आखिर कैसे चल रही हैं ये ड्रग्स की गुप्त फैक्ट्रियां, कहां से आ रहे हैं केमिकल और कैसे तैयार हो रहा है युवाओं के लिए ये सफेद जहर ?
क्या राजस्थान में सिर्फ खपत नहीं, मैन्युफैक्चरिंग का नेटवर्क भी है?
राजस्थान अब सिर्फ एमडी ड्रग्स की खपत का बाजार नहीं बल्कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई में ये भी सामने आया है कि प्रदेश के कई इलाकों में अवैध मैन्युफैक्चरिंग का नेटवर्क भी खड़ा हो चुका है. जोधपुर, बाड़मेर,पाली, सिरोही, भीलवाड़ा और जयपुर के बाहरी इलाके सुनसान जगहों, कृषि फार्मों और बंद औद्योगिक परिसरों में चल रही कथित अवैध लैब्स पर ANTF और पुलिस ने लगातार शिकंजा कसा है. ANTF आईजी 48 से ज्यादा अवैध एमडी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के भंडाफोड़ का दावा किया गया है और इन कार्रवाई में 800 किलो से ज्यादा एमडी ड्रग्स की बरामदगी सामने आई है. यानी मरुधरा में अब सिर्फ रेत नहीं, ड्रग माफिया का काला कारोबार भी तेजी से पैर पसार रहा है.
आखिर बनती कैसे है एमडी ड्रग्स?
ANTF आईजी विकास कुमार का कहना है कि एमडी यानी मेफेड्रोन एक नया ड्रग है, जिसका यूरोप में आविष्कार माना जाता है. एक सिंथेटिक ड्रग है, जिसे प्रयोगशाला में तैयार किया जाता है. ड्रग नेटवर्क की सबसे बड़ी ताकत ऐसे केमिकल्स तक पहुंच है, जिनका इस्तेमाल वैध औद्योगिक और दूसरे सामान्य कामों में भी होता है. इसी सप्लाई चेन का दुरुपयोग कर तस्कर इन्हें अवैध तरीके से प्रोसेस करने की कोशिश करते हैं यानी केमिकल वैध लेकिन उसका इस्तेमाल गैरकानूनी. यही वो ग्रे एरिया है, जिसका फायदा उठाकर ड्रग नेटवर्क अपना कारोबार खड़ा करने की कोशिश कर रहा है.
राजस्थान में एमडी का नेटवर्क कब और कैसे फैला?
आईजी विकास कुमार का कहना है कि 2017-18 के आसपास गुजरात में सामने आए मामलों के बाद एमडी का नेटवर्क राजस्थान में भी तेजी से फैलने लगा और अब इसके तार शहरी इलाकों से लेकर फार्महाउस और पार्टी कल्चर तक पहुंचने की जांच हो रही है. एमडी उत्तेजक ड्रग है. जीवन में मजा लेना चाहता है, पार्टियों में आनंद लेना चाहता है. आकर्षण में फंसकर लोग इसको लेते हैं. एक ग्राम से भी कम लेने से नशा आता है. यह प्रचुर मात्रा में मिल रहा है, इसलिए जो युवा पहले हीरोइन गांजा की आगोश में था, वह अब एमडी ड्रग की चपेट में है. इसे युवा 'पार्टी ड्रग' समझकर शुरू करते हैं. वहीं, धीरे-धीरे जिंदगी की सबसे बड़ी मुसीबत बन सकता है. ड्रग नेटवर्क के खिलाफ ANTF और राजस्थान पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है.
ड्रग्स की पूरी सप्लाई चेन तक एजेंसियां कैसे पहुंच रही हैं?
कहीं खेतों में बने फार्म हाउस...कहीं बंद फैक्ट्री...तो कहीं किराए के कमरों में छिपाकर चलाए जा रहे ठिकाने...जांच एजेंसियां सिर्फ तैयार ड्रग्स तक पहुंचने की कोशिश नहीं कर रही है बल्कि केमिकल सप्लायर से लेकर मैन्युफैक्चरर, सप्लायर और पेडलर तक पूरी चेन तोड़ने पर फोकस कर रही हैं क्योंकि एक लैब बंद होने से नेटवर्क खत्म नहीं होगा. जब तक उस नेटवर्क की पूरी सप्लाई चेन नहीं टूटती. अवैध एमडी ड्रग्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 48 अवैध यूनिट्स का भंडाफोड़ किया गया और करीब 500 किलो एमडी जब्त की गई. बताया जा रहा है कि बरामद ड्रग्स की मात्रा देश में होने वाली एमडी की कुल जब्ती का करीब 70 प्रतिशत है.
क्या सिर्फ सप्लाई रोकना ही काफी है?
पुलिस और ANTF की कार्रवाई में लगातार नए ठिकाने सामने आ रहे हैं लेकिन इस जहर की सप्लाई रोकने के साथ-साथ जरूरी है कि इसके डिमांड साइड पर भी प्रहार हो. यानी घर, स्कूल, कॉलेज और समाज...हर स्तर पर जागरूकता जरूरी है. रेगिस्तान की जमीन पर ड्रग माफिया ने अगर सफेद जहर की फैक्ट्रियां खड़ी करने की कोशिश की है तो राजस्थान पुलिस और ANTF अब इन फैक्ट्रियों की जड़ तक पहुंचने में जुटी है. लेकिन लड़ाई सिर्फ पुलिस की नहीं क्योंकि ड्रग्स की एक खेप पकड़े जाने से ज्यादा जरूरी है- एक युवा को इसकी पहली डोज लेने से रोकना. इसमें समाज और परिवार की भूमिका भी बड़ी है.
एमडी ड्रग्स शरीर पर कैसे असर करती है?
एमडी ड्रग्स यानी मेफेड्रोन एक तेज असर करने वाला नशीला पदार्थ है, जो दिमाग में डोपामिन, सेरोटोनिन और नॉरएड्रेनालिन जैसे रसायनों की गतिविधि बढ़ाता है. इससे कुछ समय के लिए ज्यादा ऊर्जा, उत्साह और बात करने की इच्छा हो सकती है, लेकिन इसके साथ दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर बढ़ना, बेचैनी, नींद न आना, पसीना, शरीर का तापमान बढ़ना और घबराहट जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. ज्यादा या बार-बार इस्तेमाल करने पर लत लगने का खतरा रहता है और गंभीर मामलों में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर खतरनाक असर पड़ सकता है.