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DU में राजस्थान का ‘वोटिंग फॉर्मूला’: आखिर क्यों छात्रसंघ चुनाव में बढ़ी राजस्थानी छात्रों की अहमियत?

Rajasthan News: DUSU चुनाव 2026 में राजस्थान कनेक्शन चर्चा में रहा. राजस्थान के विजय शंकर मीणा NSUI से अध्यक्ष पद के उम्मीदवार रहे, जबकि चूरू के लक्ष्यराज सिंह ने ABVP के टिकट पर संयुक्त सचिव पद जीता. चुनाव में ABVP ने 3 पदों पर जीत दर्ज की.

DU में राजस्थान का ‘वोटिंग फॉर्मूला’: आखिर क्यों छात्रसंघ चुनाव में बढ़ी राजस्थानी छात्रों की अहमियत?
Image Credit: DUSU Rajasthan Connection

DUSU Election 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ यानी DUSU चुनाव सिर्फ यूनिवर्सिटी कैंपस का चुनाव नहीं होता. देशभर के छात्रों की नजर इस चुनाव पर रहती है और इसकी गूंज दिल्ली से बाहर भी सुनाई देती है. 2026 के चुनाव में राजस्थान कनेक्शन भी खास चर्चा में रहा. इस बार NSUI ने राजस्थान से आने वाले विजय शंकर मीणा को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया, जबकि ABVP ने चूरू के रहने वाले अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल खिलाड़ी लक्ष्यराज सिंह को संयुक्त सचिव पद पर मैदान में उतारा. चुनाव के नतीजे 19 सितंबर को आए, जिसमें ABVP ने चार में से तीन केंद्रीय पद जीते. यश डबास अध्यक्ष, रिया छावड़ी सचिव और लक्ष्यराज सिंह संयुक्त सचिव बने, जबकि उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन जीते.

DUSU चुनाव इतना अहम क्यों है?
दिल्ली यूनिवर्सिटी देश की सबसे चर्चित यूनिवर्सिटीज में से एक है. यहां पढ़ने वाले छात्रों की संख्या बड़ी है और अलग-अलग राज्यों से युवा पढ़ाई के लिए दिल्ली आते हैं. इसलिए DUSU चुनाव को केवल कॉलेज का चुनाव मानकर नहीं देखा जाता. छात्र संगठनों के लिए यह अपनी ताकत दिखाने और कैंपस में अपनी पकड़ मजबूत करने का बड़ा मौका होता है.

DUSU में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव जैसे चार केंद्रीय पदों के लिए चुनाव होता है. 2026 में 52 कॉलेजों और विभागों में मतदान केंद्र बनाए गए थे. 1.51 लाख से ज्यादा छात्र वोट डालने के लिए पात्र थे और कुल मतदान 40.46 प्रतिशत रहा.

राजस्थान कनेक्शन क्यों चर्चा में आया?
राजस्थान से बड़ी संख्या में छात्र दिल्ली आकर पढ़ाई करते हैं. खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं की मौजूदगी दिल्ली के कई इलाकों और PG-हॉस्टल में दिखाई देती है. ऐसे में राजस्थान से आने वाले छात्र चुनावी राजनीति में भी एक महत्वपूर्ण सामाजिक और क्षेत्रीय समूह के रूप में नजर आते हैं.

हालांकि यह कहना कि राजस्थान के छात्र एक साथ किसी एक संगठन या उम्मीदवार को वोट करते हैं, उपलब्ध आंकड़ों से साबित नहीं होता. लेकिन 2026 के चुनाव में राजस्थान से जुड़े कई प्रमुख चेहरे मैदान में होने की वजह से इस राज्य का कनेक्शन जरूर चर्चा में रहा.

अध्यक्ष पद पर राजस्थान के विजय शंकर मीणा
2026 के चुनाव में राजस्थान से जुड़े सबसे चर्चित चेहरों में विजय शंकर मीणा का नाम रहा. NSUI ने उन्हें अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया था. वह मूल रूप से राजस्थान के आमेर इलाके के लबाना गांव से आते हैं और राजस्थान यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन कर चुके हैं. फिलहाल वह दिल्ली यूनिवर्सिटी में बौद्ध अध्ययन विभाग से MA कर रहे थे.

विजय शंकर मीणा की उम्मीदवारी को इसलिए भी चर्चा मिली क्योंकि DUSU की पारंपरिक छात्र राजनीति में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों की चर्चा होती रही है. इस बार NSUI ने उन्हें अध्यक्ष पद का चेहरा बनाया. उनके कैंपेन में छात्र अधिकार, सामाजिक न्याय, छात्रवृत्ति और हॉस्टल से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे.

चूरू के लक्ष्यराज सिंह ने भी मारी बाजी
राजस्थान कनेक्शन का दूसरा बड़ा नाम लक्ष्यराज सिंह रहा. ABVP ने उन्हें संयुक्त सचिव पद का उम्मीदवार बनाया था. वह राजस्थान के चूरू जिले से हैं और दिल्ली यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई कर चुके हैं.

लक्ष्यराज सिंह की पहचान सिर्फ छात्र नेता के तौर पर नहीं है. वह अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैंडबॉल खिलाड़ी रहे हैं और एशियन गेम्स तथा वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. DUSU चुनाव में उन्होंने संयुक्त सचिव पद पर जीत हासिल की.

अंतिम नतीजों में लक्ष्यराज सिंह ने 16 हजार से ज्यादा वोट हासिल किए और संयुक्त सचिव पद अपने नाम किया. इस जीत के साथ राजस्थान से आने वाला एक और चेहरा DUSU के केंद्रीय पैनल में पहुंचा.

NSUI के गोपाल चौधरी भी राजस्थान से
राजस्थान का कनेक्शन सिर्फ दो उम्मीदवारों तक सीमित नहीं रहा. NSUI ने संयुक्त सचिव पद के लिए गोपाल चौधरी को भी उम्मीदवार बनाया था. वह भी मूल रूप से राजस्थान से हैं और दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर चुके हैं.

इस तरह 2026 के केंद्रीय पैनल में राजस्थान से जुड़े कई चेहरे अलग-अलग संगठनों की तरफ से मैदान में थे. इससे चुनाव के दौरान राजस्थान से जुड़े छात्रों और छात्र राजनीति की चर्चा बढ़ी.

हॉस्टल और PG तक पहुंचती है छात्र राजनीति
DUSU चुनाव की राजनीति सिर्फ कॉलेज के गेट तक सीमित नहीं रहती. दिल्ली में अलग-अलग राज्यों से आने वाले छात्र हॉस्टल और PG में रहते हैं. इनमें बड़ी संख्या ऐसे छात्रों की भी होती है जो UPSC, SSC और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं.

चुनाव के दौरान उम्मीदवार और उनके समर्थक इन इलाकों तक भी पहुंचते हैं. छात्र नेताओं के लिए यह जरूरी होता है कि वे ज्यादा से ज्यादा छात्रों तक अपनी बात पहुंचाएं. राजस्थान से आने वाले छात्रों के बीच क्षेत्रीय पहचान भी चुनावी बातचीत का एक हिस्सा बन सकती है, लेकिन हर छात्र का वोट व्यक्तिगत पसंद, मुद्दों और संगठन के आधार पर अलग हो सकता है.

DUSU में जातीय समीकरण भी चर्चा में रहते हैं
दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति में जातीय समीकरण कोई नई बात नहीं हैं. लंबे समय से अलग-अलग समुदायों के प्रतिनिधित्व और उम्मीदवारों की सामाजिक पृष्ठभूमि पर चर्चा होती रही है.

2026 में भी यह मुद्दा सामने आया. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार अध्यक्ष पद की लड़ाई में पहले से चर्चा में रहे जाट बनाम गुर्जर समीकरण से अलग तस्वीर दिखाई दी और NSUI ने राजस्थान के आदिवासी समुदाय से आने वाले विजय शंकर मीणा को उम्मीदवार बनाया.

हालांकि किसी उम्मीदवार को सिर्फ जाति या क्षेत्र के आधार पर वोट मिला, यह निष्कर्ष निकालने के लिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध चुनावी आंकड़े पर्याप्त नहीं हैं. DUSU चुनाव में संगठन, उम्मीदवार की व्यक्तिगत पहचान, कैंपस के मुद्दे और स्थानीय समीकरण सभी अपनी भूमिका निभा सकते हैं.

2026 में क्या रहा चुनाव का नतीजा?
18 सितंबर 2026 को DUSU के लिए मतदान हुआ और 19 सितंबर को वोटों की गिनती की गई. इस बार कुल 40.46 प्रतिशत मतदान हुआ. 52 कॉलेजों और विभागों में वोट डाले गए और 1.51 लाख से अधिक छात्र मतदान के लिए पात्र थे.

नतीजों में ABVP ने चार में से तीन केंद्रीय पद अपने नाम किए. यश डबास ने अध्यक्ष पद पर 24,576 वोट हासिल किए और NSUI के विजय शंकर मीणा को 2,053 वोटों से हराया. रिया छावड़ी ने सचिव पद जीता और लक्ष्यराज सिंह ने संयुक्त सचिव पद अपने नाम किया. उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन 30,615 वोट के साथ विजयी रहे.

राजस्थान के लिए क्या मायने रखता है यह चुनाव?
2026 के DUSU चुनाव में राजस्थान की मौजूदगी कई स्तरों पर दिखाई दी. एक तरफ राजस्थान से आने वाले विजय शंकर मीणा अध्यक्ष पद के लिए NSUI के उम्मीदवार बने, तो दूसरी तरफ चूरू के लक्ष्यराज सिंह ने ABVP के टिकट पर संयुक्त सचिव का चुनाव जीता. NSUI के गोपाल चौधरी भी केंद्रीय पैनल में राजस्थान से जुड़े उम्मीदवार थे.

इसलिए DUSU में राजस्थान को सीधे तौर पर कोई तयशुदा “किंगमेकर” कहना सही नहीं होगा. लेकिन 2026 का चुनाव यह जरूर दिखाता है कि राजस्थान से आने वाले छात्र और छात्र नेता दिल्ली यूनिवर्सिटी की राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं. आने वाले समय में छात्र संगठनों की रणनीति में इस क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की भूमिका कितनी बढ़ती है, यह अगले चुनावों में और साफ हो सकता है.

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Pragati Pant Awasthi

Pragati Pant Awasthi

मीडिया की दुनिया में 18 साल का सफर... एंकरिंग से लेकर डिजिटल की स्क्रीन तक, हर नया बदलाव दिल से अपनाया, जो सोचती हूं, वही कहती हूं, बातों को घुमाना मेरी आदत नहीं, दिल की बात जुबां पर रखना पहचान है. फिलहाल 'ज़ी राजस्थान डिजिटल' के साथ सफर जारी है और हर दिन कुछ नया सीखने की ललक बरकरार है और रहेगी. Pragati.Pant@india.com ईमेल के जरिए आप संपर्क कर सकते हैं.
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