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राजस्थान में दशहरे पर दिखेगा अनोखा नजारा: कोटा में 105 फीट का रावण तैयार, आंखें झपकाएगा और हिलाएगा मूंछें, गर्दन और तलवार

राजस्थान में 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर दशहरे की धूम रहेगी. कोटा में 105 फीट से अधिक ऊंचा रावण अपनी गर्दन 360 डिग्री घुमाएगा, आंखें झपकाएगा और तलवार चलाएगा. वहीं, कुचामन सिटी में 51 फीट, बारां में 55 फीट और छबड़ा में 50 फीट के रावण का दहन किया जाएगा. उदयपुरवाटी में 21 फीट का रावण जलेगा.

Written By Zee Rajasthan Web Team
Published: Oct 19, 2026, 03:48 PM IST | Updated: Oct 19, 2026, 03:58 PM IST
Image Credit: राजस्थान में दशहरे की धूम
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राजस्थान में दशहरे के त्योहार की धूम देखने को मिल रही है. ऐसे में कोटा दशहरा मैदान में इस बार रावण दहन का नजारा तकनीक और कारीगरी का अनोखा संगम दिखाने वाला है. 105 फीट से अधिक ऊंचे रावण का निर्माण पूरा कर उसे पूरी तरह खड़ा कर दिया गया है. अब 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर रावण का दहन किया जाएगा.

खास बात यह है कि दहन से पहले रावण अपनी गर्दन 360 डिग्री तक घुमाएगा, आंखें झपकाएगा, मूंछें हिलाएगा और हाथ में तलवार चलाता नजर आएगा. रावण के साथ करीब 70-70 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले भी दशहरा मैदान में आकर्षण का केंद्र रहेंगे. पिछले साल विशालकाय रावण के आकार को लेकर चर्चा में रहे कोटा में इस बार पुतले की ऊंचाई अपेक्षाकृत कम रखी गई है, लेकिन उसकी तकनीकी खूबियों और बनावट पर विशेष ध्यान दिया गया है.

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ढाई महीने की मेहनत के बाद तैयार हुआ रावण परिवार
कोटा के दशहरा मेले में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले तैयार करने के लिए गाजियाबाद निवासी कारीगर आमिर खान अपनी टीम के साथ जुटे हैं. आमिर के परिवार में दादा-परदादा के समय से पुतले बनाने का काम होता आ रहा है. वह साल 2019 से लगातार कोटा में रावण के पुतले तैयार कर रहे हैं. इस बार करीब 20 लोगों की टीम ने ढाई महीने तक मेहनत कर रावण परिवार के पुतलों को तैयार किया है. निर्माण पूरा होने के बाद रावण को दशहरा मैदान में पूरी तरह खड़ा कर दिया गया है. अब 20 अक्टूबर को होने वाले दहन की तैयारियां की जा रही हैं.

गर्दन से लेकर आंखों और तलवार तक में मैकेनिकल तकनीक
इस बार रावण की खासियत सिर्फ उसकी ऊंचाई नहीं, बल्कि उसमें लगाए गए मैकेनिकल फीचर भी हैं. दहन से पहले रावण अपनी गर्दन 360 डिग्री तक घुमाता नजर आएगा. उसकी आंखें झपकेंगी, मूंछें हिलेंगी और हाथ में मौजूद तलवार भी घूमेगी. इसके अलावा पुतले में मुंह चलने की विशेषता भी रखी गई है. इन गतिविधियों के चलते रावण सामान्य स्थिर पुतले के बजाय जीवंत दिखाई देगा. दहन के दौरान उसके भीतर लगाई गई विशेष आतिशबाजी भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहेगी.

5 टन लोहा, 500 बांस और 1500 मीटर कपड़े से तैयार हुआ पुतला
105 फीट से अधिक ऊंचे रावण और उसके परिवार के पुतलों को तैयार करने में मजबूत ढांचे से लेकर बाहरी सजावट तक का विशेष ध्यान रखा गया है. निर्माण में करीब 5 टन लोहे का इस्तेमाल हुआ है. इसके अलावा लगभग 500 बांस की खपच्चियों से ढांचे को आकार दिया गया है. पुतलों पर करीब 1500 मीटर वेलवेट कपड़ा लगाया गया है. ढांचे को बांधने और मजबूत करने के लिए लगभग 300 किलो सुतली और करीब 2 क्विंटल मजबूत रस्सी का इस्तेमाल किया गया है. मौसम से बचाव के लिए पुतलों पर वॉटरप्रूफ इम्पोर्टेड कागज लगाया गया है. कागज चिपकाने के लिए मैदा से तैयार करीब 1 से 2 क्विंटल लेई का उपयोग किया गया है. इतने विशाल पुतलों को खड़ा करने के लिए उनके ढांचे की मजबूती और संतुलन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है.

पिछले साल 221.5 फीट का रावण, इस बार तकनीकी खूबियों पर जोर
कोटा के दशहरा मेले में पिछले साल रावण की ऊंचाई ने देशभर में चर्चा बटोरी थी. वर्ष 2025 में रावण का पुतला करीब 221.5 फीट ऊंचा बताया गया था और उसके दहन को विश्व रिकॉर्ड से जोड़ा गया था. इस बार रावण की ऊंचाई 105 फीट से अधिक रखी गई है यानी पिछले साल की तुलना में पुतले का आकार काफी छोटा है, लेकिन गर्दन घुमाने, आंखें झपकाने, मूंछें हिलाने और तलवार चलाने जैसी तकनीकी खूबियों पर जोर दिया गया है. पिछले साल विशाल पुतले के निर्माण और दहन के दौरान मौसम और तकनीकी चुनौतियां भी सामने आई थीं. इस बार कारीगरों ने पुतले की बनावट, सजावट और उसकी विशेष गतिविधियों को तैयार करने पर ध्यान दिया है.

70-70 फीट के कुंभकर्ण और मेघनाद भी होंगे आकर्षण
रावण के साथ उसके भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाद के पुतले भी तैयार किए गए हैं. दोनों की ऊंचाई करीब 70-70 फीट रखी गई है. तीनों पुतलों के निर्माण में लोहे, बांस, कपड़े, रस्सी और कागज का इस्तेमाल किया गया है. दशहरा मैदान में 20 अक्टूबर को रावण दहन के दौरान तीनों पुतले मेले के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहेंगे.

51 फीट का रावण, हाथी-ऊंट-घोड़ों की शोभायात्रा


कुचामन सिटी में इस बार विजयादशमी का पर्व भव्य और आकर्षक अंदाज में मनाया जाएगा. नगर परिषद की ओर से करीब 10 लाख रुपए की लागत से दशहरा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा. महोत्सव में 51 फीट ऊंचे रावण और 31-31 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा. आयोजन को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं और कारीगर पुतलों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं. विजयादशमी के अवसर पर भगवान श्रीराम की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी. शोभायात्रा में हाथी, ऊंट और घोड़े शामिल होंगे. साथ ही आकर्षक झांकियां भी सजाई जाएंगी, जो लोगों के लिए विशेष आकर्षण रहेंगी. वहीं, दशहरा मैदान में जयपुर से आने वाले कलाकार अपने हैरतअंगेज करतबों से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे. राम-रावण युद्ध का मंचन किया जाएगा और इसके बाद रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन होगा. कार्यक्रम के दौरान भव्य आतिशबाजी भी की जाएगी.

बारां-छबड़ा में दशहरे की तैयारियां जोरों पर, रावण दहन रहेगा विशेष आकर्षण
बारां जिले में विजयदशमी पर्व को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं. बारां शहर और छबड़ा कस्बे में होने वाला रावण दहन इस बार विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा. शहर में दशहरा उत्सव समिति द्वारा 55 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया गया है, जबकि कुंभकरण और मेघनाद के पुतले 30-30 फीट के बनाए गए हैं. पुतलों पर रंग-रोगन का कार्य पूरा हो चुका है. इस बार का रावण कई खासियतों से लैस है-दहन के दौरान वह मुंह चलाएगा, तलवार चलाएगा और उसके मुंह से रोशनी निकलेगी. पुतलों को बनाने में 15 से 20 दिन का समय लगा है. रावण दहन से एक घंटे पहले सांस्कृतिक कार्यक्रम और आतिशबाजी का आयोजन होगा.

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वहीं, छबड़ा कस्बे में नदी दरवाजा स्थित रावण दहन स्थल पर 50 फीट ऊंचे रावण का दहन किया जाएगा. नगर पालिका प्रशासन ने इसके लिए 1 लाख 19 हजार रुपये की लागत निर्धारित की है. आयोजन को भव्य बनाने के लिए मध्यप्रदेश से आए कलाकारों के साथ स्थानीय कलाकार मस्ताना भी पुतला तैयार करने में जुटे हैं. यहां भी भव्य आतिशबाजी आकर्षण का केंद्र रहेगी.  

उदयपुरवाटी में 21 फीट ऊंचे रावण के पुतले का होगा दहन
उदयपुरवाटी में इस बार 21 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा. रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे. इस बार पुतलों में आतिशबाजी को लेकर खास तैयारियां की जा रही हैं. दशहरे के आयोजन को लेकर कारीगर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं. पुतलों को आकर्षक रूप देने के साथ उनके भीतर आतिशबाजी की व्यवस्था की गई है. कारीगरों के अनुसार, हर साल पुतलों के आकार और सजावट में कुछ न कुछ बदलाव किया जाता है. इस बार भी आतिशबाजी को लेकर विशेष तैयारी की जा रही है, ताकि रावण दहन का दृश्य दर्शकों के लिए यादगार बन सकें.

पुतला निर्माण से जुड़े कारीगर संदीप माथुर, पिंटू माथुर, कैलाश माथुर और सोनू माथुर ने बताया कि इस बार उन्हें अलग-अलग स्थानों के लिए कुल छह पुतले बनाने के ऑर्डर मिले हैं. इनमें झुंझुनूं, पिलानी, उदयपुरवाटी, खेतड़ी, पलसाना और लाडनूं शामिल हैं. कारीगरों के मुताबिक, अलग-अलग स्थानों पर पुतलों की ऊंचाई और बनावट आयोजन की जरूरत के अनुसार रखी जाती है.

कारीगरों ने बताया कि पुतलों में इस्तेमाल होने वाली आतिशबाजी रेडीमेड ली जाती है. पुतलों के निर्माण से लेकर उन्हें अंतिम रूप देने तक कई चरणों में काम करना पड़ता है. दशहरे से पहले सभी पुतलों को तैयार कर संबंधित स्थानों तक पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण रहता है. दशहरा केवल रावण दहन का पर्व नहीं, बल्कि सत्य की असत्य पर जीत का संदेश भी देता है. उदयपुरवाटी में हर बार की तरह रावण और आतिशबाजी के बीच होने वाला दहन इस बार आकर्षण का केंद्र रहेगा. वहीं, विभिन्न शहरों और कस्बों में तैयार हो रहे पुतलों के जरिए कारीगर भी इस पारंपरिक आयोजन को भव्य बनाने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं.

 

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