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पति, पत्नी और भाभी के बाद अब बेटा: डेचा में सरपंची की 'सियासी गद्दी' के लिए महामुकाबला

डूंगरपुर की डेचा ग्राम पंचायत में विधायक शंकरलाल डेचा के बेटे राहुल डामोर ने सरपंच पद के लिए नामांकन दाखिल किया है. करीब 30 साल से पंचायत की राजनीति में सक्रिय परिवार के सामने अब गांव के विकास और मतदाताओं के भरोसे की चुनौती है.

Written By Zee Rajasthan Web Team Edited By Sandhya Yadav
Published: Oct 23, 2026, 04:21 PM IST | Updated: Oct 23, 2026, 04:26 PM IST
Image Credit: विधायक शंकरलाल डेचा के बेटे राहुल डामोर ने सरपंच पद के लिए नामांकन दाखिल किया.
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डूंगरपुर जिले की सागवाड़ा पंचायत समिति की ग्राम पंचायत डेचा में सरपंच पद का चुनाव एक बार फिर राजनीतिक विरासत को लेकर चर्चा में है. गांव में करीब 30 साल से सरपंची की राजनीति में प्रभाव रखने वाले डेचा परिवार ने इस बार भी चुनावी मैदान में कदम रखा है. सागवाड़ा विधायक शंकरलाल डेचा के पुत्र राहुल डामोर ने अपने पिता के साथ पहुंचकर सरपंच पद के लिए नामांकन दाखिल किया.

1995 से पंचायत की राजनीति में परिवार का प्रभाव
ग्राम पंचायत डेचा में शंकरलाल डेचा खुद एक बार सरपंच रह चुके हैं. उनकी पत्नी गंगा देवी डामोर भी चार बार इस पद पर चुनी गईं. इसके अलावा उनके भाई की पत्नी अनीता डामोर भी सरपंच की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं. इस तरह डेचा परिवार लंबे समय से पंचायत की राजनीति में सक्रिय रहा है.

वर्ष 1995 से अब तक परिवार लगातार छह बार सरपंच पद की जिम्मेदारी संभाल चुका है. शंकरलाल डेचा सरपंच रहने के बाद प्रधान भी बने और वर्तमान में सागवाड़ा से विधायक हैं. अब उनके बेटे राहुल डामोर ने सरपंच पद के लिए नामांकन दाखिल कर परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम रखा है. पंचायत चुनाव को लेकर गांव में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. राहुल की उम्मीदवारी के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मतदाता इस बार क्या फैसला लेते हैं.

यह भी पढ़ें- डूंगरपुर में वोटिंग के बीच सियासी भूचाल: सांसद राजकुमार रोत बोले- पंचायत चुनाव में लहराएगा BAP का परचम!

गांव के विकास को आगे बढ़ाने की बात
नामांकन दाखिल करवाने के बाद विधायक शंकरलाल डेचा ने कहा कि वर्ष 1995 से गांव के लोगों ने उन पर और उनके परिवार पर भरोसा जताया है. जनता के इसी समर्थन और आशीर्वाद के भरोसे उनके बेटे ने इस बार सरपंच पद के लिए दावेदारी पेश की है.

उन्होंने विश्वास जताया कि गांव के लोगों का सहयोग आगे भी उनके परिवार को मिलता रहेगा. शंकरलाल डेचा ने कहा कि ग्राम पंचायत में पिछले वर्षों के दौरान कराए गए विकास कार्यों को आगे बढ़ाना और जो काम अधूरे रह गए हैं, उन्हें पूरा करना उनकी प्राथमिकता रहेगी.

मतदाताओं के सामने विकास के अहम मुद्दे
डेचा पंचायत में एक ओर डेचा परिवार की राजनीतिक यात्रा और लंबे समय से रहा प्रभाव चर्चा में है, तो दूसरी ओर गांव की बुनियादी सुविधाएं भी चुनाव के महत्वपूर्ण मुद्दे हैं. स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, सड़कों की स्थिति में सुधार और पेयजल तथा बिजली जैसी जरूरतें मतदाताओं के लिए अहम मानी जा रही हैं.

अब चुनाव में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गांव के मतदाता एक बार फिर डेचा परिवार की राजनीतिक विरासत पर भरोसा जताते हैं या विकास से जुड़ी अपनी अपेक्षाओं के आधार पर किसी नए विकल्प को चुनते हैं. पंचायत चुनाव का परिणाम ही तय करेगा कि डेचा में सरपंच पद की जिम्मेदारी आगे किसके हाथों में जाती है.

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