App

जयपुर के पंडित पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया धनतेरस पर खरीदारी और पूजा का शुभ मुहूर्त

तीन साल बाद शुक्रवार, 6 नवंबर को जयपुर में विशेष ज्योतिषीय संयोगों के साथ धनतेरस मनाई जाएगी. शुक्र प्रदोष, कुबेर योग और हस्त नक्षत्र के चलते बाजारों में खरीदारी को लेकर खास उत्साह है. धनतेरस पर पूजा, दीपदान और खरीदारी के कई शुभ मुहूर्त रहेंगे. इसके साथ ही जयपुर में छह दिवसीय दीपोत्सव का आगाज होगा.

जयपुर के पंडित पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया धनतेरस पर खरीदारी और पूजा का शुभ मुहूर्त
Image Credit: पंडित पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया धनतेरस के संयोग का महत्व

जयपुर में कल से सिर्फ दीपों का नहीं बल्कि खुशियों, उम्मीदों और समृद्धि का भी उत्सव शुरू होने जा रहा है. बाजारों में सोने-चांदी की चमक है, बर्तनों की खनक है, नई गाड़ियों की बुकिंग है और हर घर में मां लक्ष्मी के स्वागत की तैयारी है. तीन साल बाद शुक्रवार को धनतेरस आ रही है. वो भी शुक्र प्रदोष, कुबेर योग और हस्त नक्षत्र के खास संयोग के साथ यानी इस बार धनतेरस पर शुभ मुहूर्त और खरीदारी का उत्साह भी खास है.

जयपुर में धनतेरस की रौनक, छह दिवसीय दीपोत्सव का आगाज
सुबह से लेकर देर रात तक बाजार गुलजार रहेंगे. कहीं अष्टधातु के भगवान धन्वंतरी आकर्षण का केंद्र हैं, तो कहीं चांदी के लक्ष्मी-गणेश. रोशनी से सजी गुलाबी नगरी में छह दिवसीय दीपोत्सव का आगाज होने जा रहा है.

सोने-चांदी के साथ आरोग्य और समृद्धि का संगम
इस बार धनतेरस पर जयपुर के बाजारों में सिर्फ सोना-चांदी और बर्तनों की खनक ही नहीं, बल्कि आरोग्य और समृद्धि का अनूठा संगम भी देखने को मिलेगा. एक तरफ भगवान धन्वंतरी की अष्टधातु प्रतिमाएं ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं, तो दूसरी तरफ चांदी के लक्ष्मी-गणेश, सिक्के और पारंपरिक आभूषणों से सर्राफा बाजार सज गए हैं.

तीन साल बाद शुक्रवार को धनतेरस, बन रहे खास संयोग
खास बात यह है कि तीन साल बाद शुक्रवार को धनतेरस का पर्व आ रहा है. इस दिन शुक्र प्रदोष, कुबेर योग और हस्त नक्षत्र के विशेष संयोग बन रहे हैं. ऐसे में खरीदारी के साथ नए व्यापार की शुरुआत, गृह प्रवेश और संपत्ति खरीदने को भी शुभ माना जा रहा है. शुक्रवार से छह दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत होगी. शहर के बाजारों में उत्सव का माहौल बन चुका है. चांदपोल, जौहरी बाजार, त्रिपोलिया बाजार, एमआई रोड और सीकर रोड सहित प्रमुख बाजार रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा रहे हैं.

बाजारों में धार्मिक और सांस्कृतिक झांकियां बनेंगी आकर्षण
इस बार बाजारों की सजावट में धार्मिक और सांस्कृतिक झलक भी देखने को मिलेगी. कहीं देवी-देवताओं की आकर्षक झांकियां सुख-समृद्धि का संदेश देंगी तो कहीं रामसेतु की झांकी लोगों का ध्यान खींचेगी. धनतेरस पर खरीदारी की परंपरा में इस बार भगवान धन्वंतरी की प्रतिमाएं खास आकर्षण बनी हुई हैं. अष्टधातु से निर्मित भगवान धन्वंतरी और लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं की अच्छी मांग है. सोने-चांदी के सिक्कों और पारंपरिक आभूषणों के साथ हल्के वजन की ज्वैलरी के विकल्प भी ग्राहकों को लुभा रहे हैं. बर्तन बाजार से लेकर ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार तक धनतेरस की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. दोपहिया और चौपहिया वाहनों के साथ प्रॉपर्टी की खरीदारी के लिए भी शुभ मुहूर्त रहेंगे.

पंडित पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया धनतेरस के संयोग का महत्व 
ज्योतिषाचार्य पुरुषोत्तम गौड़ के अनुसार, इस बार धनतेरस पर वार और तिथि के संयोग से बनने वाले आनंदादि योगों में अमृत योग का विशेष महत्व रहेगा. शुक्रवार को शुक्र प्रदोष के साथ कुबेर योग और हस्त नक्षत्र का संयोग पर्व की धार्मिक महत्ता बढ़ाएगा. धनतेरस को अबूझ मुहूर्त माना जाता है. ऐसे में नए प्रतिष्ठान का शुभारंभ, गृह प्रवेश, नींव पूजन और नए कार्यों की शुरुआत के लिए भी यह दिन विशेष माना गया है. इस बार धनतेरस पर प्रदोषकाल में लंबे समय बाद मेष लग्न का विशेष संयोग रहेगा.

मेष लग्न पर सूर्य, बुध और गुरु की रहेगी पूर्ण दृष्टि
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस लग्न पर सूर्य, बुध और गुरु की पूर्ण दृष्टि रहेगी. इसे आरोग्य, सुख-समृद्धि और जनकल्याण के लिए शुभ माना जा रहा है. भगवान धन्वंतरी की पूजा के साथ घरों और प्रतिष्ठानों में दीपदान होगा. शाम को यम दीपदान की परंपरा निभाई जाएगी. मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और आरोग्य की कामना की जाएगी. धनतेरस की त्रयोदशी तिथि शुक्रवार सुबह 10 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगी और शनिवार सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगी. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, धनतेरस का पर्व सायंकालीन त्रयोदशी के आधार पर शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाया जाएगा. हालांकि शनिवार सुबह भी धनतेरस के निमित्त खरीदारी की जा सकेगी.


सेहत ही सबसे बड़ा धन, यही है धनतेरस का संदेश 
बहरहाल,धनतेरस पर बाजारों में धन की खनक होगी. घरों में दीपों की चमक होगी और मंदिरों में आरोग्य की कामना, कोई सोना खरीदेगा, कोई चांदी तो कोई अपने सपनों की गाड़ी घर लाएगा लेकिन धनतेरस की सबसे बड़ी सीख यही है कि समृद्धि सिर्फ तिजोरी भरने से नहीं आती. घर में खुशियां और परिवार में अच्छी सेहत हो तो वही सबसे बड़ा धन है क्योंकि धनतेरस पर खरीदा हुआ सोना कितना भी कीमती क्यों न हो, सेहत से बड़ी कोई संपत्ति नहीं होती है. 
 

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author