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Rupee Recovery: रुपये ने पकड़ी रफ्तार, अक्टूबर में करीब 1% की मजबूती, RBI के इन कदमों का दिखा असर

अक्टूबर में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 1% मजबूत होकर एशिया की दूसरी सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली करेंसी बना है.

Rupee Recovery: रुपये ने पकड़ी रफ्तार, अक्टूबर में करीब 1% की मजबूती, RBI के इन कदमों का दिखा असर
Image Credit: अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने रुपये को और ऊपर उठाया है। AI

Rupee Gains Nearly 1% in October: डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती देखने को मिली है. मार्केट के जानकारों के मुताबिक, अक्टूबर में भारतीय रुपया एशिया की दूसरी सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली करेंसी रही है. ये अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 1 प्रतिशत मजबूत हुई है. 

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा डॉलर की डिमांड को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों और लगातार हस्तक्षेप ने रुपये को अपने रिकॉर्ड निचले स्तर से उबरने में मदद की है.

प्रमुख एशियाई करेंसी में दक्षिण कोरियाई वॉन के बाद रुपये का प्रदर्शन दूसरे नंबर पर रहा है. साल की शुरुआत से अब तक ये डॉलर के मुकाबले 4.87 प्रतिशत कमजोर हुआ है, जबकि चालू वित्त वर्ष की शुरुआत से इसमें 0.36 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है. 

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.47 पर बंद हुआ रुपया 

5 नवंबर को रुपया मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.47 पर बंद हुआ है. पिछले सेशन में ये 94.64 पर था, यानी इसमें 0.18 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है.

दिन के कारोबार के दौरान रुपया 94.32 के निचले स्तर तक गया था, लेकिन तेल कंपनियों और अन्य आयातकों की ओर से डॉलर की मांग आने के बाद यह वापस 94.5525 के स्तर पर आ गया. RBI के हस्तक्षेप और कच्चे तेल की कीमतों में कमी से रुपये को सहारा मिला.

अक्टूबर में रुपये में आई यह रिकवरी, 10 अक्टूबर को RBI द्वारा उठाए गए उन कदमों का नतीजा थी. इनका मकसद स्पॉट मार्केट में डॉलर की मांग को कम करना और स्पेकुलेशन पर लगाम लगाना था. केंद्रीय बैंक ने सार्वजनिक क्षेत्र की तीन तेल कंपनियों के लिए डॉलर की सप्लाई की डेडिकेटेड विंडो शुरू की, ताकि वे स्पॉट मार्केट के बजाय कहीं और से डॉलर खरीद सकें.

कच्चे तेल की कीमतों में 8% से ज्यादा की गिरावट

इसके अलावा, RBI ने बिना किसी वास्तविक आधार (underlying exposure) वाले डेरिवेटिव सौदों की सीमा को 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दिया और रद्द किए गए फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स को दोबारा बुक करने पर भी रोक लगा दी है. कच्चे तेल की कीमत गिरकर 94 डॉलर पर आई, इससे दिसंबर की पॉलिसी से पहले RBI पर दबाव कम हुआ है. कच्चे तेल की कीमतों में 8% से ज्यादा की गिरावट के बीच, रुपया डॉलर के मुकाबले 94.35 के मजबूत स्तर पर खुला है.

RBI के हस्तक्षेप से भी रुपये को मजबूती मिली

1 अक्टूबर से 16 अक्टूबर के बीच स्पॉट और फॉरवर्ड मार्केट में RBI की कुल डॉलर बिक्री 18.20 अरब डॉलर रही. ये कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक की सबसे बड़ी मासिक बिक्री है. 5 नवंबर को, अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, डॉलर के कमजोर होने और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कमी आने से रुपये को और सहारा मिला. जोखिम लेने की बेहतर क्षमता और विदेशी फंड के फ्लो ने भी उभरते बाजारों की मुद्राओं को सहारा दिया है.

HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार ने कहा, 'अमेरिकी डॉलर में गिरावट और ट्रेजरी यील्ड कम होने से भारतीय रुपया लगातार पांचवें सेशन में मजबूत हुआ है. विदेशी फंड के आने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के कारण बाजार में जोखिम लेने का सकारात्मक माहौल बना. इससे भारतीय मुद्रा को और मजबूती मिली है.'

94.30 एक अहम सपोर्ट लेवल के रूप में उभरा है

रुपये की हालिया चाल से पता चलता है कि निचले स्तरों पर खरीदारी में दिलचस्पी है. ट्रेडर्स ने 94.26, 94.3125 और 94.32 के स्तरों को निचले बिंदुओं के रूप में पहचाना है, जिससे 94.30 के आसपास एक सपोर्ट जोन  बन गया है. एक करेंसी ट्रेडर ने बताया कि अमेरिका में हालात बदल गए हैं. इससे जोखिम भरी संपत्तियों में खरीदारी बढ़ रही है. इक्विटी और डेट मार्केट दोनों ऊपर जा रहे हैं. इससे रुपये को भी सहारा मिला है.

ट्रेडर को उम्मीद है कि 94 का स्तर बना रहेगा, क्योंकि RBI अपनी शॉर्ट पोजीशन को कम करने के लिए डॉलर खरीद सकता है. डॉलर में तेजी आने पर बिकवाली देखने को मिल सकती है, जबकि गिरावट आने पर बड़े आयातकों की ओर से खरीदारी हो सकती है.

परमार ने बताया कि निकट भविष्य में उन्हें 94.00 पर सपोर्ट और 94.90 पर रेजिस्टेंस (रुकावट) दिख रहा है. फॉरवर्ड प्रीमियम में भी नरमी आई है. एक महीने का प्रीमियम 3.56 प्रतिशत और एक साल का प्रीमियम 3.94 प्रतिशत है, जबकि अलग-अलग अवधियों के लिए सभी प्रीमियम 4.50 प्रतिशत से नीचे हैं.

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About the Author

Gaurav Singh

Gaurav Singh

जी न्यूज में सीनियर सब-एडिटर हैं और वर्तमान में बिजनेस व फाइनेंशियल न्यूज कवर करते हैं.  देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों और घटनाओं को कवर कर चुके हैं  पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो UPTU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले गौरव ने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और पिछले 6 वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. आप गौरव सिंह से Gaurav.Singh@India.Com पर ईमेल के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. 
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