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1 अक्टूबर से बदलेंगे जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियम: 2 साल बाद DM नहीं कोर्ट से लेना होगा आदेश, जानें पूरी प्रक्रिया

Rajasthan News: 1 अक्टूबर 2026 से जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण के नियमों में बदलाव होगा. एक साल से ज्यादा लेकिन दो साल तक पुराने मामलों में DM, SDM या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश से पंजीकरण कराया जा सकेगा, जबकि दो साल से ज्यादा पुराने जन्म या मृत्यु के मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा.

1 अक्टूबर से बदलेंगे जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियम: 2 साल बाद DM नहीं कोर्ट से लेना होगा आदेश, जानें पूरी प्रक्रिया
Image Credit: AI Generated Image

Rajasthan News: जन्म और मृत्यु का पंजीकरण समय पर नहीं कराया है, तो अब देरी होने पर प्रक्रिया पहले से ज्यादा कठिन हो सकती है. 1 अक्टूबर से जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण की व्यवस्था बदलने जा रही है. केंद्र सरकार ने 16 सितंबर को जारी अधिसूचना में 1 अक्टूबर को कानून लागू होने की तारीख तय की है. नए नियमों में सबसे बड़ा बदलाव दो साल से ज्यादा पुराने जन्म या मृत्यु के मामलों में होगा. ऐसे मामलों में अब केवल प्रशासनिक अधिकारी की मंजूरी पर्याप्त नहीं होगा. पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) का आदेश जरूरी होगा.

दो साल की सीमा सबसे अहम

नए प्रावधानों के तहत अगर जन्म या मृत्यु की सूचना एक साल से ज्यादा लेकिन दो साल के भीतर दी जाती है, तो संबंधित जिला मजिस्ट्रेट या SDM की ओर से अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश से पंजीकरण कराया जा सकेगा. अधिकारी घटना की सत्यता का सत्यापन करने के बाद निर्धारित शुल्क पर आदेश जारी कर सकेगा.

वहीं दो साल से ज्यादा देरी होने पर मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के पास जाएगा. नए कानून के अनुसार ऐसे जन्म या मृत्यु का पंजीकरण संबंधित क्षेत्राधिकार वाले प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही किया जा सकेगा. मजिस्ट्रेट घटना की सत्यता का सत्यापन करेगा और निर्धारित शुल्क के बाद पंजाकरण का आदेश देगा.

पहले क्या था और अब क्या बदलेगा

2023 के संशोधन के बाद एक साल से ज्यादा देरी से जन्म या मृत्यु की सूचना देने पर DM, SDM या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश से पंजीकरण का प्रावधान था. 2026 के संशोधन ने इस व्यवस्था को दो हिस्सों में बांट दिया है. अब एक साल से ज्यादा लेकिन दो साल तक की देरी प्रशासनिक स्तर पर रहेगी, जबकि दो साल से ज्यादा पुराने मामलों के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश लेना जरूरी होगा.

तीन साल पुराने जन्म का उदाहरण समझें

मान लीजिए किसी बच्चे की उम्र तीन साल हो चुकी है, लेकिन उसका जन्म अब तक सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं कराया गया है. अब अगर परिवार 1 अक्टूबर के बाद पंजीकरण कराने जाता है, तो मामला दो साल से ज्यादा पुराना होने के कारण केवल SDM या कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति से पूरा नहीं होगा. संबंधित क्षेत्र के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट से आदेश लेना होगा. सत्यापन और निर्धारित शुल्क के बाद ही जन्म का पंजीकरण हो सकेगा.

जन्म और मृत्यु का समय पर पंजीकरण कराना क्यों जरूरी

जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड समय पर दर्ज होने से आगे चलकर प्रमाण-पत्र हासिल करने की प्रक्रिया आसान रहती है. जन्म प्रमाण-पत्र कई सरकारी और प्रशासनिक कामों में महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है. वहीं मृत्यु प्रमाण-पत्र भी परिवार से जुड़े कई कानूनी और प्रशासनिक कार्यों में आवश्यक होता है. इस नए कानून का उद्देश्य विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया में सत्यापन को मजबूत करना और लोगों को जन्म एवं मृत्यु की सूचना समय पर दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित करना है.

बहरहाल, जन्म और मृत्यु का पंजीकरण जितना जल्दी कराया जाएगा, आगे की प्रक्रिया उतनी ही आसान रहेगी. खासकर दो साल की अवधि पार होने के बाद अब प्रशासनिक मंजूरी के साथ मामला खत्म नहीं होगा. न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की अतिरिक्त प्रक्रिया जुड़ जाएगी. इसलिए परिवार में जन्म या मृत्यु होने पर पंजीकरण को वर्षों तक टालना अब ज्यादा प्रक्रियागत परेशानी बढ़ा सकता है.

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About the Author

Aman Singh

Aman Singh

जून 2023 से ज़ी राजस्थान के साथ कार्यरत अमन लगातार अपनी क्रिएटिविटी और प्रोफेशनल स्किल्स के जरिए पाठकों तक तेज, सटीक और भरोसेमंद खबरें पहुंचा रहे हैं. वे उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले हैं, अमन ने जौनपुर से ही अपनी इंटरमीडिएट तक की शिक्षा पूरी की. इसके बाद उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया. डिजिटल पत्रकारिता में गहरी समझ, तेज खबर पकड़ने की क्षमता के कारण अमन सिंह एक उभरते हुए और भरोसेमंद मीडिया प्रोफेशनल के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहे हैं.
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