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Rajasthan Politics: राजस्थान के नगरीय निकाय चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद पार्टी की चुनावी रणनीति और प्रचार अभियान को लेकर सवाल उठने लगे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस की चुनावी तैयारियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बेहतर प्लानिंग और प्रभावी प्रचार अभियान से पार्टी के नतीजे अलग हो सकते थे. गहलोत के बयान के बाद कांग्रेस के संगठनात्मक कामकाज और चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है.
PCC के कार्यक्रम और प्रचार पर क्या बोले गहलोत?
अशोक गहलोत ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) की ओर से अगर प्रचार का कार्यक्रम तैयार किया जाता और सभी नेता चुनाव प्रचार में उतरते, तो पार्टी को फायदा मिल सकता था. उन्होंने चुनावी अभियान में बेहतर तालमेल और रणनीति की जरूरत पर जोर दिया.
गहलोत ने कहा, "अगर PCC कोई प्रोग्राम बनाती, प्रचार के लिए सब नेता जाते, रोड शो का जवाब रोड शो से हम देते, प्लानिंग और बेहतर होती तो मेरा मानना था कि जो माहौल सरकार के खिलाफ था, उसके अच्छे नतीजे आ सकते थे." गहलोत के इस बयान से कांग्रेस के चुनावी अभियान की योजना और नेताओं की भागीदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
BJP के प्रचार का जवाब देने की रणनीति
पूर्व मुख्यमंत्री ने बीजेपी के मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं के आक्रामक चुनाव प्रचार का जिक्र करते हुए कांग्रेस की ओर से भी प्रभावी अभियान चलाने की बात कही. उन्होंने संकेत दिया कि बीजेपी के रोड शो के मुकाबले कांग्रेस को भी रोड शो और व्यापक प्रचार कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए थे.
गहलोत के मुताबिक, बेहतर चुनावी योजना के जरिए पार्टी अपने पक्ष में बताए जा रहे राजनीतिक माहौल को चुनावी नतीजों में बदल सकती थी. हालांकि, यह उनका आकलन है और इससे चुनावी नतीजों पर निश्चित प्रभाव का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता.
डोटासरा के नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष सवाल?
गहलोत के बयान को कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व में चुनावी तैयारियों पर अप्रत्यक्ष सवाल के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, उपलब्ध बयान में गहलोत ने डोटासरा का सीधे नाम नहीं लिया है और न ही उनके खिलाफ स्पष्ट आरोप लगाया है. ऐसे में यह कहना कि बयान सीधे डोटासरा को निशाना बनाकर दिया गया, एक राजनीतिक व्याख्या होगी. पार्टी की चुनावी रणनीति, प्रचार कार्यक्रम और नेतृत्व की भूमिका पर कांग्रेस के भीतर आगे चर्चा हो सकती है.