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Jaipur News: जयपुर में अमृत-2.0 और जल जीवन मिशन की पानी से जुड़ी योजनाओं में कथित फर्जीवाड़े के मामले में कार्रवाई करीब एक साल से अटकी हुई है. कार्रवाई लंबित होने के कारण दोनों योजनाओं के तहत कई कामों के टेंडर नहीं हो पा रहे हैं. अब जलदाय विभाग ने गड़बड़ी और फर्जीवाड़े के मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी की है.
एक साल से कार्रवाई का इंतजार
जलदाय विभाग में फर्जीवाड़े से जुड़े मामलों पर लंबे समय से कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं. फर्जी प्रमाण पत्र के मामले में गणपति और श्रीश्याम ट्यूबवेल फर्म के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन अन्य फर्मों पर अब तक एक्शन नहीं हुआ है.
बताया जा रहा है कि कई फर्मों के खिलाफ कार्रवाई के लिए विभाग को लंबे समय से लिखा जा चुका है. इसके बावजूद मामला आगे नहीं बढ़ पाया. सूत्रों के मुताबिक, फाइनेंस कमेटी की बैठक में प्रमुख सचिव हेमंत गेरा ने कई फर्मों को डिबार करने के आदेश दिए हैं. अब विभाग के मिनट्स जारी होने के बाद डिबार होने वाली फर्मों के नाम सामने आएंगे. माना जा रहा है कि करीब 2 से 3 फर्मों को डिबार करने का निर्णय लिया गया है.
14 टेंडरों में शिकायत के बाद 9 फर्मों पर कार्रवाई लंबित
अमृत-2.0 की बिड प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद मामला आरटीपीपी नियमों के तहत कार्रवाई के लिए पहुंचा है. 14 टेंडरों में शिकायत सामने आने के बाद 9 फर्मों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया एक साल बाद भी लंबित बताई जा रही है.
अब इन मामलों में आरटीपीपी नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी. जानकारी के मुताबिक, जिन यूएलबी में 100 करोड़ रुपये से अधिक के काम हैं, वहां अलग से टेंडर लगाए जाएंगे. वहीं 100 करोड़ रुपये से कम के काम वाले मामलों को डी-क्लब किए गए हैं.
176 शहरों और कस्बों तक पहुंचेगा अमृत
अमृत योजना के तहत राज्य के 176 शहरों और कस्बों को शामिल किया गया है. योजना से 8.35 लाख नए कनेक्शन दिए जाने हैं, जिससे 35.22 लाख आबादी को लाभ मिलने का अनुमान है. इसके अलावा संवर्धन के लिए 22.06 लाख कनेक्शन का प्रावधान है, जिससे 128.27 लाख आबादी लाभान्वित होगी.
स्मार्ट मीटर से लेकर 24 घंटे पानी की योजना
अमृत-2.0 के तहत शहरी घरों में स्मार्ट पानी के मीटर लगाए जाने हैं. इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं से उनके पानी के उपयोग के अनुसार शुल्क लेना, पानी की छीजत कम करना और विभाग का राजस्व बढ़ाना है.
योजना में नए पंप हाउस और पानी की टंकियां बनाने के काम भी शामिल हैं, ताकि पाइपलाइन के टेल एंड तक पर्याप्त प्रेशर के साथ पानी पहुंच सके. दूषित पानी की समस्या वाले क्षेत्रों में पाइपलाइन बदली जाएगी.
इसके अलावा 24 घंटे पेयजल आपूर्ति, स्मार्ट मीटर और वाटर रिसाइकिल प्लांट जैसे काम भी अमृत-2.0 में प्रस्तावित हैं. बीकानेर में पीपीपी मोड पर 24 घंटे पेयजल उपलब्ध कराने के काम होने हैं. ऐसे में सवाल यह है कि जब वर्क ऑर्डर ही अटके हुए हैं, तो अमृत-2.0 का लक्ष्य समय पर कैसे पूरा होगा.