अजमेर निगम चुनाव: सत्ता की चाबी 11 निर्दलीयों के हाथ, 1-2 पार्षदों पर अटका पूरा खेल!
Ajmer Nagar Nigam Chunav: अजमेर नगर निगम चुनाव के बाद बोर्ड गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. 80 वार्ड वाले निगम में बहुमत के लिए 41 पार्षदों की जरूरत है. भाजपा के 32 पार्षदों के साथ 11 निर्दलीयों में से 8 के उसके खेमे में आने की जानकारी है, जिससे आंकड़ा 40 तक पहुंच गया है. वहीं कांग्रेस के 37 पार्षद हैं और उसके साथ 3 निर्दलीयों के होने की बात सामने आई है. ऐसे में बोर्ड गठन का फैसला अब 1 पार्षद के समर्थन पर अटक गया है.
Rajasthan Nikay Chunav: अजमेर नगर निगम चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद अब बोर्ड गठन को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी कवायद तेज हो गई है. 80 वार्ड वाले अजमेर नगर निगम में बहुमत के लिए 41 पार्षदों का आंकड़ा जरूरी है. चुनाव परिणाम में कांग्रेस के 37 और भाजपा के 32 प्रत्याशी जीतकर आए हैं. वहीं 11 निर्दलीय पार्षदों ने बोर्ड गठन की चाबी अपने हाथ में रखी है.
मेयर पद को लेकर जोड़-तोड़ की राजनीति तेज
अजमेर. नगर निगम चुनाव के नतीजों के बाद अब मेयर पद को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी जद्दोजहद तेज हो गई है. दोनों ही दल नगर निगम में अपना बोर्ड बनाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल किसी भी पार्टी ने अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं. ऐसे में शहर की सियासत में चर्चाओं का दौर गर्म है.
बहुमत के आंकड़े को लेकर माथापच्ची
मेयर पद पर कब्जे के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने समीकरण साधने में जुटी हैं. चुनावी नतीजों के बाद जोड़-तोड़ की राजनीति चरम पर पहुंचती नजर आ रही है. अब नजर इस बात पर है कि कौन सा दल जरूरी आंकड़ा जुटाकर बोर्ड बनाने में कामयाब होता है.
शह और मात का खेल
अजमेर नगर निगम की सियासत इस समय शतरंज की बिसात जैसी नजर आ रही है. हर कदम के बाद दूसरे खेमे की अगली चाल पर नजर है. भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने पक्ष में पार्षदों को साधने की कोशिश में हैं, लेकिन रणनीति को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा अपने मौजूदा आंकड़े के दम पर कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए बोर्ड बनाने में सफल होगी, या कांग्रेस अपने 37 पार्षदों के आंकड़े को और मजबूत कर सत्ता की बाजी अपने नाम करेगी. मेयर पद की दौड़ में अगले कुछ दिन अजमेर की सियासत के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं.
8 निर्दलीय भाजपा के खेमे में
सूत्रों के मुताबिक 11 निर्दलीयों में से 8 निर्दलीय भाजपा की झोली में पहुंच गए हैं. इनमें मदन सिंह रावत, सुनील गुर्जर, कुंदन वैष्णव और गायत्री सोनी समेत 8 निर्दलीय शामिल बताए जा रहे हैं. भाजपा के 32 पार्षदों के साथ इन 8 निर्दलीयों का आंकड़ा 40 तक पहुंच गया है. ऐसे में भाजपा बहुमत के लिए जरूरी 41 के आंकड़े से सिर्फ 1 पार्षद दूर रह गई है. यही वजह है कि अजमेर निगम में भाजपा बोर्ड बनाने की कवायद तेज हो गई है.
कांग्रेस भी कर रही बोर्ड का दावा
दूसरी ओर कांग्रेस के पास 37 पार्षद हैं. सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के साथ 3 निर्दलीय पार्षद होने की जानकारी है. इससे कांग्रेस का आंकड़ा भी 40 तक पहुंचने की बात कही जा रही है. यानी दोनों खेमों के लिए अब एक-एक पार्षद का समर्थन बेहद अहम हो गया है.
1 पार्षद पर अटका पूरा खेल
अजमेर नगर निगम में कुल 80 वार्ड हैं और बोर्ड बनाने के लिए 41 पार्षदों का बहुमत चाहिए. ऐसे में मौजूदा सियासी गणित में एक पार्षद का समर्थन पूरा खेल बदल सकता है. यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही निर्दलीय पार्षदों को अपने पक्ष में करने की कोशिश में जुटे हैं. नतीजों के बाद दोनों दलों की ओर से बाड़ेबंदी की राजनीति भी शुरू हो गई है. अब देखना होगा कि अंतिम समय में कौन सा खेमा 41 का जादुई आंकड़ा छूता है और अजमेर नगर निगम में अपना बोर्ड बनाने में कामयाब होता है.