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Rajasthan News: धौलपुर के बाड़ी में नाबालिग को वाहन चलाने देने के मामले में कोर्ट ने अभिभावक की जिम्मेदारी तय करते हुए सख्त कार्रवाई की है. अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-01, बाड़ी की अदालत में राज्य बनाम इंसार व अन्य मामले की सुनवाई हुई. मामला 17 वर्षीय नाबालिग के वाहन चलाने से जुड़ा है. नाबालिग वाहन संख्या RJ11-SM-5067 चलाते हुए पकड़ा गया था. अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि नाबालिग को वाहन सौंपना केवल कानूनी उल्लंघन नहीं है, बल्कि इससे सड़क पर दूसरे लोगों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है. कोर्ट ने इस मामले में अभिभावक की जिम्मेदारी तय करते हुए पिता को दोषी माना.
कोर्ट के 3 बड़े आदेश
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 199(ए) के तहत अदालत ने तीन अहम आदेश दिए हैं. पहला आदेश वाहन के रजिस्ट्रेशन से जुड़ा है. कोर्ट ने जिला परिवहन अधिकारी को वाहन संख्या RJ11-SM-5067 की RC को 12 महीने यानी एक साल के लिए रद्द करने का निर्देश दिया.
दूसरा आदेश
नाबालिग के ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित है. अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित नाबालिग को 25 वर्ष की आयु पूरी होने तक ड्राइविंग लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा.
तीसरा आदेश
अभिभावक के खिलाफ है. कोर्ट ने नाबालिग के पिता को दोषी मानते हुए 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है.
अभिभावकों के लिए कोर्ट की चेतावनी
अदालत ने इस फैसले के साथ अभिभावकों के लिए विशेष अपील और चेतावनी भी जारी की. कोर्ट ने कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी स्थिति में दोपहिया या चौपहिया वाहन चलाने के लिए नहीं देना चाहिए.
कानून में अभिभावक की जिम्मेदारी
मामले में अदालत ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199(ए) के प्रावधानों को भी ध्यान में रखा. इसके तहत नाबालिग के वाहन चलाते पकड़े जाने पर अभिभावक या वाहन के मालिक की जिम्मेदारी तय की जा सकती है. ऐसे मामले में 3 साल तक की जेल और 25 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. इसके अलावा वाहन का पंजीकरण एक साल के लिए रद्द किया जा सकता है और नाबालिग को 25 वर्ष की उम्र तक लाइसेंस के लिए अयोग्य किया जा सकता है.
इस फैसले के बाद अभिभावकों के लिए यह साफ संदेश है कि नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति देना कानूनी और सुरक्षा, दोनों लिहाज से गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है.