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न कबूल-कबूल-कबूल और ना ही 7 फेरे... क्या है वो कानून जिसके तहत उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान ने रचाई शादी

उमर अब्दुल्ला और पत्रकार निधि राजदान ने शादी कर ली है, बताया जा रहा है कि उन्होंने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी की है. चलिए जानते हैं कि यह कानून क्या है और कब-क्यों यह बनाया गया.

Written By Tahir Kamran
Published: Oct 31, 2026, 10:06 PM IST | Updated: Oct 31, 2026, 10:12 PM IST
Image Credit: Ai की मदद से बनाई गई तस्वीर
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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और जर्नलिस्ट निधि राजदान ने एक दूसरे से शादी कर ली है. दोनों की ही यह दूसरी शादी है. इस बात की जानकारी दोनों ने अपने-अपने सोशल मीडिया हेंडल के जरिए दी है. उमर अब्दुल्ला ने इंस्टाग्राम पर निधि राजदान के साथ एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, 'कल एक नई यात्रा शुरू हुई.' उन्होंने इस पोस्ट में निधि राजदान को भी टैग किया. तकरीबन तीन महीने पहले ही सुप्रीम कोर्ट उमर अब्दुल्ला और उनकी पूर्व पत्नी पायल अब्दुल्ला के बीच तलाक को मंजूर किया था.

उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान ने 30 अक्तूबर 2026 को हुई है. 'द हिंदू' के मुताबिक दोनों की शादी 'स्पेशल मैरिज एक्ट' के तहत हुई है. अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया कि गवाहों में दोनों पक्षों के परिवार के सदस्य शामिल थे. उमर अब्दुल्ला और निधि राजधान ने जिस मैरिज एक्ट के तहत शादी है की है, उसकी खासियत है कि इसमें ना तो कबूल है, कबूल है, कबूल है बोलना पड़ता है और ना ही अग्नि के सात फेरे लेने होते हैं. चलिए जानते हैं कि यह स्पेशल मैरिज एक्ट क्या है?

'स्पेशल मैरिज एक्ट-1954' भारत का एक ऐसा कानून है, जिसके तहत दो बालिग लोग बिना कोई धर्म बदले एक दूसरे शादी कर सकते हैं. इस धर्म का मकसद भी था कि अलग-अलग धर्मों, जातियों और समुदायों के लोग को शादी के लिए कानूनी विकल्प मिल सके. इसके तहत अगर कोई शादी कर रहा है, तो यह जरूरी नहीं है कि किसी तरह की धार्मिक परंपराओं पर पालन किया जाए. इसी को आम भाषा में 'कोर्ट मैरिज कहा जाता है.'

शादी की प्रक्रिया क्या है?

यह भी पढ़ें: उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान की दूसरी शादी: कौन थे दोनों के पहले जीवनसाथी?

यह बिल पूर्व कानून और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सीसी बिस्वास ने 28 जुलाई 1952 में पेश किया था. दिलचस्प बात यह है कि भारत में 1954 से पहले भी स्पेशल मैरिज एक्ट मौजूद था. 1872 में ब्रिटिश शासन के दौरान ऐसा कानून बनाया गया था, लेकिन 1872 के कानून में कई सीमाएं थीं. नए कानून का मकसद उन कमियों को दूर करना और अलग-अलग धर्मों के लोगों के लिए सिविल मैरिज का रास्ता ज्यादा बड़ा बनाना था.

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About the Author

Zee News में नेशनल डेस्क पर देश–विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरें लिखते हैं. करियर का आगाज 2015 से 'पंजाब केसरी' ग्रुप के उर्दू अखबार ‘हिंद समाचार’ से किया, जहां वे कंटेट राइटर से पेज डिजाइनर तक पहुंचे. इसके बाद उर्दू, हिंदी और पंजाबी - तीनों भाषाओं में काम करने का मौका मिला. 2018 में डिजिटल की तरफ कूच करते हुए पंजाब केसरी ग्रुप की उर्दू वेबसाइट की लॉन्चिंग टीम का नेतृत्व किया. इसके बाद 2020 में 'Zee Salaam' ज्वाइन किया, यहां भी वेबसाइट को लॉन्च करने के साथ-साथ तीन साल टीम का नेतृत्व भी किया. इसी दौरान ZEE Delhi NCR वेबसाइट भी लॉन्च हुई, जिसमें उनका अहम योगदान रहा. 2023 में India Daily Live की लॉन्चिंग टीम के साथ काम किया और शुरुआती दिनों में हिंदी के अलावा पंजाबी, तमिल, तेलुगु और गुजराती वेबसाइट टीमों को मैनेज किया. अक्टूबर 2024 में फिर से Zee Media में में वापसी करते हुए नेशनल टीम का हिस्सा बने. तकनीक में दिलचस्पी की वजह से उन्होंने React.js और वेब डिजाइनिंग सीखी. यही कारण है कि उनकी खबरों में HTML-CSS के छोटे-छोटे ग्राफिक्स दिख जाते हैं, जो मुश्किल बातों को भी आसान बना देते हैं. करियर की शुरुआत में कुछ दिनों तक फोटो स्टूडियो में भी काम किया, जहां कैमरा, Adobe Photoshop और ग्राफिक डिजाइनिंग सीखी, जो आज भी उनके डिजिटल काम में मदद करता है. उर्दू शायरी से प्यार अलग ही है. ग़ज़लें, नज़्में, गीत भी लिखते हैं और कई अखबारों में उनकी शायरी छप भी चुकी हैं. राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, अनवर जलालपुरी खुशबीर सिंह शाद और नवाज देवबंदी, माजिद देवबंदी  जैसे शायरों के इंटरव्यू व बातचीत का अनुभव भी उनके पास है. आप tahir.kamran@india.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facbook से जुड़ सकते हैं. 
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