उमर अब्दुल्ला ने JK को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलवाने का प्रस्ताव तो पास करवा लिया, लेकिन क्या आगे की राह वाकई इतनी आसान है?
Jammu Kashmir Full Statehood Demand News: उमर अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग को लेकर असेंबली में प्रस्ताव पास करवा लिया है. लेकिन क्या आगे की राह वाकई इतनी आसान है?
Legislative Process for Jammu Kashmir Full Statehood Demand: केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार ने बड़ा राजनीतिक दांव खेला है. उनकी सरकार ने सोमवार को असेंबली में राज्य का पूर्ण दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव पारित किया. इस प्रस्ताव में अनुच्छेद-370 और 35 भी दोबारा बहाल करने की मांग है. इस प्रस्ताव ने केंद्र और राज्य के बीच सियासी सरगर्मी एक बार फिर बढ़ा दी है. इस कदम के जरिए जहां उमर अब्दुल्ला ने अपने समर्थकों को संदेश देने की कोशिश की है कि वे पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग से पीछे नहीं हटे हैं. वहीं केंद्र सरकार को भी मैसेज दिया है कि वह झुकने वाले नहीं है. हालांकि, सवाल ये है कि क्या असेंबली में यह प्रस्ताव पास कर देने से जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाएगा या इसके आगे भी कोई प्रक्रिया है.
उमर अब्दुल्ला का यह कदम राजनीतिक रूप से भले ही मास्टरस्ट्रोक नजर आए, लेकिन कानूनी मोर्चे पर आगे की राह बिल्कुल भी आसान नहीं है. उसे कई चुनौतियों को पार करना करना होगा, तभी जाकर यह प्रस्ताव अंजाम तक पहुंच पाएगा. आइए, आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं.
संसद की भूमिका रहेगी अहम
जम्मू-कश्मीर के संबंध में कोई भी बड़ा फैसला लेने का अंतिम अधिकार केंद्र सरकार के पास है. अगर वह चाहेगी तो किसी भी केंद्र शासित प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए उसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 में संशोधन करना होगा. इसके लिए संसद में एक नया पुनर्गठन विधेयक पेश और पारित कराना होगा.
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद को यह पूर्ण अधिकार प्राप्त है कि वह किसी राज्य के क्षेत्र को घटा या बढ़ा सकती है, उसकी सीमाएं बदल सकती है या किसी केंद्र शासित प्रदेश को राज्य में परिवर्तित कर सकती है. कि जम्मू-कश्मीर वर्तमान में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत एक केंद्र शासित प्रदेश है. इसलिए इसके दर्जे में बदलाव के लिए संसद की ओर से इस अधिनियम में संशोधन करना होगा या एक नया संशोधन विधेयक लाना होगा.
गृह मंत्रालय भेजा जाएगा मसौदा
जम्मू कश्मीर असेंबली की ओर से पास होने के बाद अब प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय जाएगा. अगर केंद्र सरकार प्रस्ताव से सहमत होती है तो केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से नया संशोधन विधेयक तैयार किया जाएगा. इस विधेयक में प्रस्ताव होगा कि जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश को पुन: पूर्ण राज्य बनाया जा रहा है. इसके साथ ही उसमें बताया जाता है कि प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे, शक्तियों तथा कानूनों में क्या बदलाव होंगे.
गृह मंत्रालय की ओर तैयार पुनर्गठन विधेयक को केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सामने मंजूरी के लिए रखा जाता है. वहां पर मंत्रिमंडल की मुहर लगने के बाद उसे मंजूरी के लिए संसद में पेश किया जाता है.
संसद के दोनों सदनों में बहुमत की मंजूरी
यह विधेयक संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्य सभा) में पेश किया जा सकता है. चूंकि यह अनुच्छेद 3 के अंतर्गत आता है, इसलिए इसे संसद में साधारण बहुमत यानी सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के 50% से अधिक मतों की आवश्यकता होती है. इसके लिए संविधान संशोधन (विशेष बहुमत) की जरूरत नहीं होती है. विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों से पास होना अनिवार्य है.
संसद के दोनों सदनों की मंजूरी के बाद विधेयक को हस्ताक्षर के लिए भारत के राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और गजट नोटिफिकेशन होते ही वह विधेयक कानून बन जाता है.
प्रस्ताव मानने की संवैधानिक बाध्यता नहीं
खास बात ये है कि केंद्र चाहे तो इस प्रस्ताव को खारिज कर डस्टबिन में भी डाल सकती है. वह इस तरह के किसी प्रस्ताव को मानने के लिए बाध्य नहीं है. संविधान के अनुच्छेद 3 के प्रावधानों के तहत, राष्ट्रपति इस तरह के प्रस्ताव से प्रभावित राज्य का विचार जानने के लिए विधेयक भेज सकते हैं. प्रस्ताव पर अंतिम और निर्णायक शक्ति केंद्र सरकार के पास ही होती है. अगर वह राजी होती है, तभी वह प्रस्ताव संसद में पेश किया जाता है.
बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2023 में अनुच्छेद 370 पर दिए अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया था कि जम्मू-कश्मीर का केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा एक अस्थाई व्यवस्था है. उसने केंद्र सरकार को सुझाव दिया था कि लोगों की आकांक्षाओं को देखते हुए उसे जल्द से जल्द पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना चाहिए. हालांकि, अदालत ने इसके लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की थी और इसे विशुद्ध रूप से केंद्र सरकार पर छोड़ दिया था.
क्या पूर्ण राज्य पर मान जाएगी केंद्र सरकार?
केंद्र की मौजूदा एनडीए सरकार का रुख इस मामले में स्पष्ट रहा है. गृह मंत्रालय और सरकार के शीर्ष नेतृत्व का यह मानना है कि जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य का दर्जा उचित समय पर और स्थिति पूरी तरह सामान्य होने के बाद ही बहाल किया जाएगा. उसकी प्राथमिकता में प्रदेश में सुरक्षा स्थिति, आतंकवाद पर नियंत्रण और सीमा पार से होने वाली घुसपैठ जैसे संवेदनशील बिंदु अभी भी सबसे ऊपर हैं. जब तक इसमें कोई उल्लेखनीय प्रगति उसे दिखाई नहीं देगी, तब तक वह शायद ही इस मांग को पूरा करने के लिए राजी होगी.