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जम्मू-कश्मीर में 2 साल पहले सरकार बनाने वाले उमर अब्दुल्ला के सामने खुशी और गम दोनों की स्थिति बनी हुई है. टीवी न्यूज एंकर निधि राजदान के साथ दूसरी शादी करके वे जहां जिंदगी की नई शुरुआत कर रहे हैं. वहीं, राज्य की राजनीति में उनकी सरकार के सामने अस्तित्व का संकट भी पैदा हो गया है. यह खतरा बाहरी नहीं, बल्कि अंदरुनी स्तर पर पनपा है. उनकी अपनी ही पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के 25 असंतुष्ट विधायकों ने बगावत कर दी है.
बागी विधायक पिछले दिनों हुए मंत्रिमंडल विस्तार से नाराज हैं. उनकी मांग है कि नए मंत्री बनाए गए सभी लोगों को कैबिनेट से हटाया जाए. साथ ही मुख्यमंत्री के सलाहकार को भी फौरन बाहर का रास्ता दिखाया जाए. उन्होंने अपनी मांगों को पूरा करने के लिए 14 दिनों का अल्टीमेटम दिया है. चेतावनी दी है कि ऐसा न करने पर वे राजभवन जाकर उमर अब्दुल्ला सरकार से समर्थन वापस लेने पर विचार कर सकते हैं.
बागी नेताओं का आरोप है कि उमर अब्दुल्ला सरकार में सारे फैसले किसी एक छोटे और चुनिंदा समूह की ओर से लिए जा रहे हैं. इन फैसलों में कोई राय-मशविरा नहीं हो रहा और सभी निर्णय एकतरफा तरीके से हो रहे हैं. उन्होंने मांग की कि सरकार चलाने में विधायक दल से व्यापक चर्चा हो और मंत्रियों के चयन समेत सभी फैसलों में पूरी पारदर्शिता बरती जाए.
पार्टी विधायकों के भड़कने की एक बड़ी वजह मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अनुच्छेद 370 और 35ए पर नरमी भी बताई जा रही है. विद्रोही विधायकों का कहना है कि पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र में जनता से जो वायदे किए थे, उमर अब्दुल्ला सरकार उन पर अडिग रहे. राज्य के पूर्ण दर्जे की बहाली के साथ-साथ वे पार्टी के कोर मुद्दों पर भी अडिग रहें. उन्होंने खुली चेतावनी दी कि अगर इन सब मुद्दों का दो हफ्ते में समाधान नहीं हुआ तो वे सरकार से समर्थन लेने से भी पीछे नहीं हटेंगे.
उमर अब्दुल्ला के लिए संकट केवल यही नहीं है. उनके सामने एक चुनौती श्रीनगर से पार्टी के लोकसभा सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी की ओर से भी खड़ी है. उन्होंने भी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर पार्टी के कोर मुद्दों से दूरी बनाने का आरोप लगाते हुए संगठन और संसद की सदस्यता से इस्तीफा देने का एलान किया है. उनका आरोप है कि अनुच्छेद-370, 35ए, राज्य के पूर्ण दर्जे के मुद्दे पर अब्दुल्ला सरकार गंभीर रुख नहीं अपना रही है. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सीएम उमर अब्दुल्ला ने 2 नवंबर तक इन मांगों पर अपना रुख साफ नहीं किया तो वे 3 नवंबर को अपना इस्तीफा दे देंगे. विधायकों और सांसद के इस विरोध ने पार्टी हाईकमान की नींद उड़ा रखी है.
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के लिए यह राजनीतिक संकट बहुत गहरा है. इसके लिए आपको जम्मू कश्मीर असेंबली का का गणित समझना चाहिए. असेंबली में कुल 90 सीटें हैं, जिनमें बहुमत के लिए 46 सीटों के लिए जरूरत होती है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास इनमें से 41 सीटें हैं. निर्दलीयों के सहयोग से उमर अब्दुल्ला ने अपनी सरकार बना रखी है.
अगर उनकी पार्टी के 25 विधायक ही अपना समर्थन वापस ले लेते हैं तो मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार तुरंत गिर जाएगी. यही वो गणित है, जिसने अब्दुल्ला परिवार की नींद उड़ा रखी है. अब उनके सामने दो हफ्ते का वक्त है. अगर इस अवधि में वे नाराज विधायकों और सांसद को साधने में कामयाब हो जाते हैं तो उनकी सरकार बच जाएगी वरना उनकी सरकार पर संकट बहुत गहरा है.