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कैंपेन पर सवाल: बच्चों की जिद, मां-बाप पर दबाव और 'विजय' की रणनीति, मद्रास HC की चिंता के बाद क्यों चर्चा में आया तमिलनाडु चुनाव का यह अनोखा ट्रेंड?

तमिलनाडु चुनाव में बच्चों के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की अपील पर मद्रास हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं. TVK प्रमुख थलपति विजय के ‘विजय मामा’ और चुनाव चिह्न 'सीटी' के समर्थन वाले संदेश के बाद सोशल मीडिया पर कई रील्स वायरल हुई थीं. अब हाई कोर्ट ने बच्चों को प्रचार में शामिल करने के तरीके को गलत बताते हुए संसद को कानून बनाने की सलाह दी है. क्या है पूरा मामला समझते हैं, इस एक्सप्लेनर में.

Written By Shwetank Ratnamber
Published: Oct 17, 2026, 10:00 AM IST | Updated: Oct 17, 2026, 03:05 PM IST
Image Credit: टी विजय (AI)
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4 मई, 2026 को जब तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के नतीजे आए तो द्रविण आंदोलन की नींव पर बनी डीएमके का सूपड़ा साफ हो गया. असेंबली इलेक्शन से महज दो साल पहले फरवरी, 2024 में थलपति विजय की अगुवाई में बनी टीवीके ने एक सदी पहले हुए द्रविड़ आंदोलन की रॉयल्टी खा रहे नेताओं की सियासी दुकानें बंद करा दीं. उस चुनाव प्रचार में TVK प्रमुख थलपति विजय ने बच्चों से अपने माता-पिता और परिवार के सदस्यों को 'विजय मामा' और पार्टी के व्हिसल चुनाव चिह्न के लिए वोट देने को कहने की अपील की थी. इसके बाद सोशल मीडिया पर ऐसी रील्स की बाढ़ आ गई थी, जिनमें बच्चे परिजनों पर दबाव बनाते दिखाई दिए. अब हाई कोर्ट ने इसे गलत बताते हुए चिंता जताई है.

हाई कोर्ट में कैसे पहुंचा मामला?

चुनावी नतीजों के पांच महीने बाद हाई कोर्ट ने इस चुनाव प्रचार को खराब, गलत और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया. हालांकि हाई कोर्ट ने ये भी कहा कि परिवारिक रिश्तों का उपयोग कर किसी मतदाता के वोट को प्रभावित करने की कोशिश मौजूदा चुनावी कानूनों के तहत स्वतः 'अनुचित प्रभाव' नहीं मानी जा सकती. जस्टिस डी. भरत. चक्रवर्ती ने ये टिप्पणी 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सेलम नॉर्थ सीट से TVK विधायक के शिवकुमार की जीत को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका खारिज करते हुए की.

'विजय फॉर CM' कैंपेन, ज़ेन Z की रील्स फिर 'विजय फॉर PM'

हाई कोर्ट की चिंता को समझने के लिए फ्लैश बैक में घट चुकी घटनाओं पर ध्यान देने की जरूरत है. इसलिए आइए आपको बताते हैं कि ये मसला कितना बड़ा था. याचिका भले ही एक लगी थी लेकिन चुनावी नतीजों के विश्वलेषण में नई-नवेली सियासी पार्टी टीवीके की जीत की एक बड़ी वजह एंटी इनकमबेंसी के अलावा फर्स्ट टाइम वोटर्स यानी युवाओं (जेन-Z) को बताया गया था. 

विवाद की शुरुआत इसी साल अप्रैल के महीने में चेन्नई के YMCA ग्राउंड TVK चीफ विजय के चुनावी भाषण से हुई. आरोपों के मुताबिक विजय ने बच्चों से सीधे अपील की थी कि वो माता-पिता और अन्य फैमिली मेंबर्स को TVK और उसके 'व्हिसल' यानी चुनाव चिह्न 'सीटी' के लिए वोट देने के लिए वैसे ही जिद करें जिस तरह छोटे बच्चे चॉकलेट लेने के लिए लगातार जिद करते हैं.'

उस समय सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक खुलकर कहा गया था कि पहले के सियासी नेता लोगों को उनके बच्चों की कसम देकर या मां-बाप की कसम देकर अपने लिए वोट मांगते थे, लेकिन इंटरनेट-सोशल मीडिया के कॉम्बो के दौर में बच्चों ने अपने मां-बाप को थलपति विजय को वोट देने पर मजबूर किया.

विजय फॉर सीएम के बाद कुछ उत्साहित युवाओं और टीवीके के कार्यकर्ताओं ने विजय फॉर पीएम अभियान सोशल मीडिया पर शुरू किया. उसे लेकर तमिलनाडु कांग्रेस ने कहा कि कांग्रेस इससे सहमत नहीं है. 

क्या है ये थ्योरी?

बहुत से पॉलिटिकल पंडितों ने इस थ्योरी को खारिज किया तो कुछ ने इसे स्वीकार किया. उसी दौरान विजय फॉर पीएम अभियान ने सोशल मीडिया पर जोर पकड़ा तो लोगों का ध्यान एक बार फिर उस थ्योरी पर गया कि क्या वाकई इस बार तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में सियासत की उलटी गंगा बही थी. 

उत्तर हो या दक्षिण सामान्य भारतीय परिवारों में माना जाता था कि माता-पिता जिस पार्टी को वोट देते थे, उनके बच्चे भी उसी दल को वोट देते थे. बैलट पेपर्स से चुनाव वाले पुराने दौर से लेकर ईवीएम वाले दौर तक कई पार्टियों के नेताओं से खुले मंच से इस थ्योरी को स्वीकार किया है.

मद्रास हाईकोर्ट चिंतित

ऐसे में जब 2026 तमिलनाडु में जब जेन-जी की मुख्यमंत्री विजय के लिए अपने पैरेंट्ससे वोट मांगने की रील्स वायरल हुईं तो एक याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए संसद से इस मुद्दे पर कानून बनाने पर विचार करने की सलाह दी है.

नतीजों का विश्लेषण

2026 में एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मचे घमासान और बीजेपी पर वोट चोरी का आरोप लगा रही कांग्रेस के तर्क और दावे केरलम और तमिलनाडु का रुख नहीं करते. जबकि इन राज्यों में भी एसआईआर के बाद हुए चुनावों में कांग्रेस ने बड़ी कामयाबी हासिल की.

ऐसे में कांग्रेस जवाब देने के लिए बीजेपी देशभर में जनता के बीच जाकर एसआईआर से जुड़े सवालों और आरोपों का जवाब देने जा रही है.

वोट चोरी के आरोपों के बीच दक्षिण की दिलचस्प सियासत

2026 में कांग्रेस पार्टी एसआईआर के जरिए बीजेपी पर वोट चोरी का आरोप लगा रही है. वही कांग्रेस केरलम और तमिलनाडु में हुए एसआई के बाद सत्ता में हैं. 

फरवरी 2026 में एसआईआर के बाद बनी वोटर लिस्ट के आधार पर जिन मतदाताओं ने वोट डाला उनमें से सबसे बड़ा शेयर लेकर केरलम में कांग्रेस की सरकार बनीं. 

तमिलनाडु में कांग्रेस दशकों से जिस डीएमके की पिछलग्गू बनी थी, उसका सूपड़ा साफ होने के बाद चंद सीटों से बहुमत से दूर टीवीके को सपोर्ट देकर राज्य की सरकार में शामिल हो गई.

SIR और तमिलनाडु कांग्रेस

एसआईआर के बाद 2026 में हुए विधानसभा चुनावों में तमिलनाडु में 85.01 फीसदी वोटिंग हुई. यहां 5.74 करोड़ मतदाताओं में से करीब 4.8 करोड़ लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. महिलाओं का मतदान प्रतिशत 86.2 और पुरुषों का 83.77 फीसदी रहा. यहां डीएमके की सरकार साफ हो गई.

तमिलनाडु के चेन्नई से दिल्ली तक के प्रदर्शनों में डीएमके वोट चोरी का आरोप लगा रही है, लेकिन तमिलनाडु कांग्रेस के नेता, विधायक और सांसद सब कह रहे हैं कि डीएमके को जनता ने हराया है, इसमें SIR का रोल नहीं है. 

विजय की तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) ने 108 सीटें लेकर राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनी. 234 सदस्यीय विधानसभा में, डीएमके 59 पर सिमट गई. AIADMK को 47 सीटों पर जीत मिली. टीवीके अध्यक्ष सी जोसेफ विजय ने पेरम्बूर और तिरुची पूर्व दोनों सीटें जीतीं. अक्टूबर 2026 में राज्य की मदुरांतकम और धारापुरम सीट सीट पर हुए उपचुनाव में TVK ने बाजी मारी.  

उसी चुनाव में TVK चीफ के समर्थन में बच्चे रील बनाकर अपने पैरेंट्स से वोट मांगे थे, प्रचार की इस रणनीति पर मद्रास हाईकोर्ट ने नाराजगी और चिंता दोनों जताई है.

एसआईआर विवाद महीनों से देश भर की सुर्खियों में बना हुआ है. ऐसे में लगे हाथ केरलम विधानसभा चुनावों में आए नतीजों पर भी सरसरी निगाह डालते हैं, जहां पर कांग्रेस 10 सालों से सत्ता से बाहर थी. एसआईआर के बाद कांग्रेस ने वामपंथी दलों को सत्ता की हैट्रिक लगाने से रोक दिया था.  

फरवरी 2026 में केरलम में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद बनी अंतिम मतदाता सूची में कुल दो करोड़ 69 लाख 53 हजार छह सौ 44 मतदाता शामिल थें. 

केरलम विधानसभा की 140 सीटों पर नौ अप्रैल को वोटिंग हुई थी. वहां 78.11 प्रतिशत मतदान हुआ. महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत 81.17 रहा. वहीं 75 फीसदी पुरुष वोटर्स ने मतदान किया. लेफ्ट की एलडीएफ सरकार साफ हो गई और कांग्रेस की अगुवाई वाला UDF गठबंधन सत्ता में आया. हालांकि कांग्रेस को सहयोगियों की बैसाखी की जरूरत नहीं पड़ी, उसने अपने दम पर बहुमत मिला.

केरलम विधानसभा चुनाव

कांग्रेस, मुस्लिम लीग और अन्य पार्टियों के गठबंधन यूडीएफ ने 102 सीटें जीतीं.
सत्ताधारी एलडीएफ गठबंधन को मात्र 35 सीटों से संतोष करना पड़ा.
वहीं भारतीय जनता पार्टी को पहली बार तीन सीटें मिलीं और वोट बढ़ा.

तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में बच्चों से कैंपेन कराने को लेकर हाई कोर्ट की सलाह के बाद संसद से कानून बना तो ठीक वरना ये ट्रेंड आगे आने वाले चुनावों में भी देखने को मिल सकता है.

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About the Author

श्वेतांक रत्नाम्बर वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 22 वर्षों से ज्यादा का व्यापक अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय (देश-दुनिया) खबरों की डेस्क पर कार्यरत हैं. समसामयिक मुद्दों, वैश्विक राजनीति और कूटनीति पर गहरी समझ रखने वाले श्वेतांक जटिल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और राजनीतिक समीकरणों का सटीक विश्लेषण करने के विशेषज्ञ हैं.Zee News डिजिटल से पहले उन्होंने ज़ी मीडिया नेटवर्क के ग्लोबल न्यूज़ चैनल 'WION' के साथ काम किया है. इस दौरान उन्होंने 'Gravitas', 'The West Asia Post' और 'One Africa' जैसे कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्राइम-टाइम शोज़ के हिंदी प्रोडक्शन और इंटरप्रिटेशन में अहम भूमिका निभाई. 2004 से शुरू हुए अपने पत्रकारिता करियर में श्वेतांक ने रिपोर्टिंग और एंकरिंग के साथ-साथ चार लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की व्यापक ग्राउंड कवरेज की है.जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा के बाद मास कम्युनिकेशन और पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स डिग्री हासिल करने वाले श्वेतांक लंबे समय से 'प्रेस क्लब ऑफ इंडिया' (PCI) के सम्मानित सदस्य हैं.आप श्वेतांक रत्नाम्बर से सीधे shwetank.ratnamber@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), मेटा (फेसबुक) और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.' 
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