5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश की सत्ता से शेख हसीना बाहर क्या हुईं, ढाका से भारत के खिलाफ जहर उगलने का नया ट्रेंड शुरू हो गया. छोटी-छोटी बातों पर बांग्लादेश भारत विरोधी बयानबाजी करने लगा. बीते दो महीनों में भारत ने बांग्लादेश को उसी की भाषा में बिना बोले ही जोरदार जवाब दिया है. भारत ने बांग्लादेश की इकोनॉमी की रीढ़ कही जाने वाली 500 टन हिल्सा फिश बांग्लादेश को एक्सपोर्ट किया. भारत के रहमो-करम पर रहने वाले देश को पता नहीं किस बात का अहम हो गया कि वो अपने आप ही खुद को 'हम आत्मनिर्भर हैं' का दंभ भरना शुरू कर दिया.
हिल्सा फिश की एक्सपोर्ट डील के साथ ही भारत ने शांतिपूर्वक तरीके से बांग्लादेश के नेताओं की इन बयानबाजियों का माकूल जवाब दिया है. भारत ने बीते दो महीनों में बांग्लादेश को उसी के देश की इकोनॉमी में बड़ा योगदान देने वाली 500 टन हिल्सा फिश भेजी है. हमारे यहां कहावत है कि जब पेट में भूख लगती है और थाली खाली होती है, तो सारा राष्ट्रवाद किनारे छूट जाता है. बीते 2 सालों से यही हाल बांग्लादेश का भी दिखाई दे रहा है. इसके पीछे की वजह बनी उनकी नेशनल फिश हिल्सा. आइए आपको बताते हैं कि कैसे भारत ने हिल्सा डिप्लोमेसी के जरिए पड़ोसी मुल्क की न सिर्फ हेकड़ी ढीली कर दी, बल्कि उन्हें उनकी ही नेशनल फिश के लिए भारत के आगे झोली फैलाने पर मजबूर कर दिया.
कभी भारत के इन राज्यों को रहता था हिल्सा का इंतजार
एक समय ऐसा भी था, जब भारत के पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा सहित कई राज्यों के फिश लवर्स के परिवारों को बांग्लादेश की 'पद्मा नदी की हिल्सा' मछलियों का बहुत ही बेसब्री से इंतजार रहता था. शेख हसीना की सरकार में तो भारत की पड़ोसी मुल्क के साथ जमकर 'हिल्सा डिप्लोमेसी' चलती थी. बांग्लादेश सरकार बंगाल के प्रमुख त्योहार दुर्गा पूजा के दौरान हिल्सा मछलियों में विशेष छूट का ऑफर देकर भारत भेजती थीं. भारत के साथ अपने कूटनीतिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए बांग्लादेश ने इस सफल प्रयोग को आजमाया था. वहीं, अब ऐसा भी समय आया है, जब बांग्लादेश को उसी हिल्सा फिश के लिए भारत के आगे हाथ फैलाने पड़ रहे हैं.
आखिर कैसे पलटी बाजी?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल बांग्लादेश में हिल्सा फिश का उत्पादन उम्मीद से काफी कम हुआ है. ऐसे में पड़ोसी मुल्क के मछली व्यापारियों को भारत सबसे बड़ी उम्मीद के रूप में दिखाई दिया. बांग्लादेश की मछली बाजारों में हिल्सा फिश की सप्लाई को डिमांड के मुताबिक, पूरा करने के लिए बांग्लादेश के मछली कारोबारियों को भारत पर निर्भर होना पड़ा. गुजरात के मछली व्यापारियों ने मीडिया से बातचीत में बताया कि हिल्सा मछली की एक बड़ी खेप गुजरात के भरूच बंदरगाह से बांग्लादेश के लिए भेजी गई, इसके अलावा पश्चिम बंगाल के हावड़ा मार्केट से भी बांग्लादेश के लिए हिल्सा मछलियों का एक्सपोर्ट बांग्लादेश के लिए किया गया.
गुजरात की हिल्सा फिश की बांग्लादेश में भारी डिमांड
द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हावड़ा के मछली आयातक संघ के सचिव सैयद अनवर मकसूद ने बताया, 'बांग्लादेश पहली बार भारत से हिल्सा मछली का आयात कर रहा है. हम आम तौर पर बांग्लादेश को बोआल, रोहू, पारसे और टेंगरा जैसी मछलियां भेजते हैं. इस साल वहां हिल्सा की कमी है.' मकसूद ने आगे बताया, 'गुजरात की हिल्सा मछली में काफी मात्रा में अंडे होते हैं, जिनकी बांग्लादेश में बहुत मांग है. इन अंडों को प्रोसेसिंग के लिए अलग से बेचा जाता है और फिर दूसरे देशों में एक्सपोर्ट किया जाता है.' उन्होंने बताया कि बांग्लादेशी व्यापारी इम्पोर्ट की गई कुछ हिल्सा मछलियों को विदेशी बाजारों में एक्सपोर्ट करने के लिए प्रोसेस कर रहे हैं, जबकि देश के घरेलू बाजार में मछली को सुखाकर 'साल्टेड हिलसा' के तौर पर बेचा जा रहा है.
बांग्लादेश की इस लाचारी और भारत के करारे जवाब की कहानी कुछ इन प्वाइंट्स में समझिए:
'हिल्सा डिप्लोमेसी', कूटनीति का नया चैप्टर: जिस हिल्सा को बांग्लादेश कभी भारत के खिलाफ एक हथियार के तौर पर देखता था (कि हम तुम्हें अपनी हिल्सा नहीं देंगे), आज उसी हिल्सा के लिए वह भारत का मोहताज है. पिछले दो महीनों में भारत ने बांग्लादेश को करीब 500 टन हिल्सा का निर्यात किया है.
गुजरात से हावड़ा तक की सप्लाई: भारत विरोधी बयान देने वालों को शायद ये जानकर थोड़ा अजीब लगे, लेकिन उनके पेट में जो हिल्सा जा रही है, उसकी खेप मुख्य रूप से प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य गुजरात के भरूच बंदरगाह से भेजी गई है. बाकी की कसर पश्चिम बंगाल के हावड़ा बाजार ने पूरी कर दी.
ढाका को दिल्ली से जोरदार झटका: हावड़ा होलसेल फिश इंपोर्टर्स एसोसिएशन के मुताबिक, यह इतिहास में पहली बार हो रहा है, जब बांग्लादेश भारत से हिल्सा आयात (इम्पोर्ट) कर रहा है. पहले भारत वहां से रोहू या टेंगरा भेजता था, लेकिन इस बार तो बांग्लादेशियों की सबसे प्यारी हिल्सा ही भारत से पैक होकर जा रही है.
अभी 200 टन का पार्सल और बाकी है: नफरत की दुकान चलाने वालों की भूख अभी शांत नहीं हुई है. कारोबारियों का कहना है कि आने वाले कुछ हफ्तों में भारत से 150 से 200 टन हिल्सा और ढाका रवाना की जाएगी.
तो भई, ढाका के हुक्मरानों और भारत-विरोधी ब्रिगेड के लिए ये बहुत सीधा-सा सबक है. भारत और हिन्दुत्व के खिलाफ जहर उगलना बहुत आसान है, लेकिन जब थाली में भात के साथ 'भारतीय हिल्सा' का टुकड़ा रखा हो, तो कम से कम चबाते वक्त थोड़ा अहसान मान लेना चाहिए. आखिर भारत सिर्फ पड़ोसी फर्ज निभा रहा है, भले ही सामने से सिर्फ बदजुबानी मिल रही हो.