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ChatGPT, छात्र की मौत और 18 मांगें...क्या है IIT बॉम्बे विवाद की पूरी कहानी

IIT बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोड़े की मौत के बाद विवाद बढ़ गया है. ChatGPT से जुड़े परीक्षा विवाद, डायरेक्टर शिरीष केदारे, प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला और छात्रों की 18 मांगों को आसान भाषा में समझें.

ChatGPT, छात्र की मौत और 18 मांगें...क्या है IIT बॉम्बे विवाद की पूरी कहानी

IIT बॉम्बे में सितंबर 2026 में शुरू हुआ विवाद अब छात्र कल्याण, परीक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और डायरेक्टर शिरीष बी. केदारे की भूमिका तक पहुंच गया है. विवाद की शुरुआत दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोड़े की मौत के बाद हुई. 18 सितंबर को हुई इस घटना से पहले एक परीक्षा के दौरान साहिल के पास मोबाइल फोन पाए जाने की बात संस्थान ने अपने शुरुआती बयान में कही थी. संस्थान ने यह भी कहा था कि प्रश्नपत्र को AI प्लेटफॉर्म ChatGPT पर अपलोड कर जवाब लेने की कोशिश की गई थी.

इसके बाद छात्रों के बीच यह सवाल उठा कि परीक्षा की घटना के बाद संस्थान ने पूरे मामले को किस तरह संभाला और साहिल की मौत से पहले क्या-क्या हुआ था. छात्रों ने इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच की मांग की. मामला जल्द ही सिर्फ परीक्षा में मोबाइल या AI के इस्तेमाल तक सीमित नहीं रहा और कैंपस में छात्र कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य तथा शिकायतों के निपटारे जैसे मुद्दे भी सामने आने लगे.

ChatGPT से नकल का आरोप क्या था?

IIT बॉम्बे के शुरुआती बयान के मुताबिक, परीक्षा के दौरान साहिल के पास मोबाइल फोन पाया गया था और संस्थान ने दावा किया था कि प्रश्नपत्र को ChatGPT पर अपलोड कर उत्तर हासिल करने की कोशिश की गई. संस्थान ने यह भी कहा था कि उस समय छात्र के खिलाफ औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी. उसके शिक्षक, फैकल्टी एडवाइजर और विभागाध्यक्ष की ओर से काउंसलिंग किए जाने की बात भी कही गई थी.

लेकिन बाद में यही शुरुआती बयान विवाद का बड़ा हिस्सा बन गया. छात्रों ने सवाल उठाया कि जांच पूरी होने से पहले छात्र के बारे में परीक्षा और AI से जुड़े आरोप सार्वजनिक करना कितना उचित था. IIT बॉम्बे ने 21 सितंबर को अपने पहले बयान के लिए माफी मांगते हुए कहा कि साहिल की मौत से पहले की परिस्थितियां अभी संबंधित अधिकारियों की जांच के अधीन हैं और जांच पूरी होने से पहले घटनाओं को तय तथ्य की तरह पेश करना उचित नहीं था.

छात्रों ने विरोध क्यों शुरू किया?

साहिल की मौत के बाद कैंपस में छात्रों का विरोध तेज हुआ. टीओआई छपी स्टरी के मुताबिक 400 से ज्यादा छात्र प्रदर्शन में शामिल हुए और परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच, प्रशासनिक जवाबदेही और छात्र सहायता व्यवस्था में सुधार की मांग उठी. तीन दिनों तक चले विरोध के बाद छात्र प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बातचीत हुई.

छात्रों की नाराजगी सिर्फ एक परीक्षा घटना को लेकर नहीं थी. उनकी मांगों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना, शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया में बदलाव, शिक्षकों की जवाबदेही, अनुशासनात्मक प्रक्रिया में पारदर्शिता और छात्रों की संस्थागत फैसलों में भागीदारी जैसे मुद्दे भी शामिल थे. यानी विवाद का दायरा अब पूरे कैंपस सिस्टम तक पहुंच गया.

परिवार ने क्या आरोप लगाए?

साहिल के परिवार की ओर से संस्थान से जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. टीओ आई की रिपोर्टों के अनुसार परिवार ने उत्पीड़न और जाति-आधारित भेदभाव के आरोप लगाए तथा पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. इन आरोपों की जांच होना बाकी है. IIT बॉम्बे ने जाति-आधारित भेदभाव से जुड़े आरोपों को खारिज किया है. इसलिए इस हिस्से में आरोप और स्थापित तथ्य के बीच अंतर रखना जरूरी है.

पुलिस में FIR दर्ज होना किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच की शुरुआत को दिखाता है, इसे दोष साबित होने के बराबर नहीं माना जा सकता. इस मामले में आगे की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में क्या तथ्य सामने आते हैं.

प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला पर क्या कार्रवाई हुई?

प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला का नाम भी इस विवाद में सामने आया है. वह उस परीक्षा के दौरान निरीक्षक यानी इनविजिलेटर थे. साहिल के परिवार की शिकायत के आधार पर दर्ज FIR में उनका नाम भी शामिल बताया गया है. परिवार की ओर से उन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनकी जांच चल रही है.

21 सितंबर को IIT बॉम्बे ने प्रोफेसर दुल्ला की डीनशिप तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी. डायरेक्टर शिरीष केदारे की ओर से छात्रों को भेजे गए ईमेल में कहा गया कि आगे की कार्रवाई जांच के बाद की जाएगी. हालांकि, छात्रों ने यह सवाल उठाया कि उनकी मांग सिर्फ प्रशासनिक पद से हटाने तक सीमित नहीं थी.

यहां एक अहम बात समझना जरूरी है डीन पद से निलंबन और प्रोफेसर पद से निलंबन एक ही चीज नहीं है. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार दुल्ला की डीनशिप निलंबित हुई है, जबकि उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई जांच के नतीजे पर निर्भर करेगी.

डायरेक्टर शिरीष केदारे कौन हैं?

शिरीष बी. केदारे IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर हैं और इसी संस्थान के पूर्व छात्र भी हैं. उन्होंने IIT बॉम्बे से 1985 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में BTech और 1992 में PhD की थी. उनका शोध मुख्य रूप से रिन्यूएबल एनर्जी, सोलर टेक्नोलॉजी, एनर्जी ट्रांजिशन और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी से जुड़ा रहा है.

डायरेक्टर बनने से पहले वह IIT बॉम्बे में कई अकादमिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. उन्होंने IIT मद्रास के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में भी काम किया है और शिक्षा मंत्रालय के Council of IITs में नामित सदस्य रह चुके हैं. उन्होंने 6 मई 2024 को IIT बॉम्बे के डायरेक्टर का पद संभाला था और प्रोफेसर सुभासिस चौधरी की जगह ली थी.

क्या शिरीष केदारे ने इस्तीफा दे दिया?

यह इस पूरे विवाद का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला सवाल है. छात्रों ने डायरेक्टर के इस्तीफे की मांग 18 सूत्री चार्टर में शामिल की है. लेकिन 21 सितंबर 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक स्पष्टीकरण के अनुसार शिरीष केदारे ने इस्तीफा नहीं दिया है. IIT बॉम्बे ने ऐसी खबरों को गलत बताया है.

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है. छात्रों की मांग में इस्तीफे की बात होना और डायरेक्टर का वास्तव में इस्तीफा दे देना दो अलग बातें हैं. छात्रों के चार्टर में यह शर्त भी रखी गई है कि यदि तय समय में प्रस्तावित सुधार लागू नहीं होते हैं तो डायरेक्टर के इस्तीफे का सवाल उठेगा. इसलिए अभी इस्तीफे की पुष्टि करना सही नहीं होगा.

18 सूत्री मांगों में क्या-क्या है?

तीन दिन चले विरोध के बाद छात्रों ने IIT बॉम्बे प्रशासन के सामने 18 सूत्री मांगों का चार्टर रखा. 20 सितंबर की रात करीब तीन घंटे की बैठक के दौरान डायरेक्टर शिरीष केदारे ने इस चार्टर पर हस्ताक्षर किए और मांगों पर काम करने का आश्वासन दिया.

इन मांगों में साहिल की मौत से जुड़े घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच, जांच की स्पष्ट समयसीमा, ओपन हाउस, संस्थान की ओर से माफी, मानसिक स्वास्थ्य और काउंसलिंग व्यवस्था में सुधार, शिक्षकों के लिए संवेदनशीलता कार्यक्रम, अनुशासनात्मक प्रक्रिया में बदलाव और छात्रों की ज्यादा भागीदारी जैसे मुद्दे शामिल हैं. 24 घंटे मनोचिकित्सक की उपलब्धता और छात्रों की शिकायतों के लिए बेहतर व्यवस्था की मांग भी सामने आई है.

छात्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कार्रवाई से सुरक्षा और मांगों के लागू होने की स्पष्ट योजना की भी बात रखी है. चार्टर में यह भी कहा गया है कि तय समय में सुधार लागू नहीं होने पर डायरेक्टर के इस्तीफे की मांग लागू होनी चाहिए.

क्या 18 मांगें पूरी हो गई हैं?

यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि सभी 18 मांगें पूरी हो गई हैं. डायरेक्टर द्वारा चार्टर पर हस्ताक्षर करना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम है, लेकिन हस्ताक्षर और हर मांग का जमीन पर लागू होना अलग-अलग बातें हैं.

अब यह देखना होगा कि किन मांगों के लिए कौन सा विभाग जिम्मेदार होगा, उनकी समयसीमा क्या होगी और स्वतंत्र जांच किस तरीके से होगी. IIT बॉम्बे की ओर से छात्रों के साथ आगे की बातचीत और ओपन हाउस की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है.

IIT बॉम्बे ने पहले बयान पर माफी क्यों मांगी?

शुरुआती बयान में साहिल की परीक्षा से जुड़ी घटना और ChatGPT के इस्तेमाल की बात सामने रखी गई थी. बाद में छात्रों ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले छात्र के बारे में ऐसी जानकारी सार्वजनिक करना उचित नहीं था, खासकर तब जब वह अपनी बात रखने के लिए मौजूद नहीं है.

इसके बाद IIT बॉम्बे ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी. संस्थान ने कहा कि साहिल की मौत से पहले की घटनाओं की परिस्थितियां अभी जांच का विषय हैं और उचित जांच पूरी होने से पहले उन घटनाओं को किसी निश्चित रूप में पेश करना सही नहीं था.

क्या मामला सिर्फ परीक्षा और ChatGPT तक है?

नहीं. फिलहाल यह विवाद कई स्तरों पर फैल चुका है. एक तरफ परीक्षा के दौरान मोबाइल और AI प्लेटफॉर्म के कथित इस्तेमाल का सवाल है. दूसरी तरफ छात्र की मौत से पहले की परिस्थितियों की जांच का मुद्दा है. इसके अलावा छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य, काउंसलिंग, शिकायत निवारण और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए हैं.

यही वजह है कि 18 सूत्री चार्टर में सिर्फ परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े बदलाव नहीं, बल्कि पूरे छात्र सहायता सिस्टम को बेहतर बनाने की मांगें भी शामिल हैं.

क्या दूसरे IIT में भी छात्र विरोध हुए हैं?

IIT बॉम्बे की मौजूदा घटना को देश के दूसरे IIT में छात्र कल्याण से जुड़े हालिया विवादों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है. हालांकि हर संस्थान में घटना की परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए अलग-अलग मामलों को पूरी तरह एक जैसा मानना सही नहीं होगा.

IIT दिल्ली, IIT कानपुर और IIT खड़गपुर में भी छात्र मौतों के बाद मानसिक स्वास्थ्य, काउंसलिंग और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल उठते रहे हैं. लेकिन इन घटनाओं के कारण, जांच और संस्थानों की प्रतिक्रिया अलग-अलग रही है. इसलिए IIT बॉम्बे मामले का अंतिम निष्कर्ष दूसरे संस्थानों के उदाहरणों के आधार पर नहीं निकाला जा सकता.

अब आगे क्या हो सकता है?

अब सबसे ज्यादा नजर जांच और 18 सूत्री चार्टर के क्रियान्वयन पर है. साहिल की मौत से जुड़े घटनाक्रम की जांच में परीक्षा के दौरान हुई घटना, उसके बाद की परिस्थितियां और परिवार की ओर से लगाए गए आरोप जैसे पहलुओं को देखा जा सकता है.

दूसरी तरफ IIT बॉम्बे प्रशासन को छात्रों के साथ आगे की बातचीत करनी होगी. ओपन हाउस और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के स्तर पर मांगों पर चर्चा के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि कौन-सी मांग कब और किस तरीके से लागू होगी.

डायरेक्टर के पद को लेकर भी आगे की स्थिति आधिकारिक फैसलों से ही साफ होगी. अभी तक संस्थान ने उनके इस्तीफे की खबर को खारिज किया है. इसलिए सोशल मीडिया या अपुष्ट रिपोर्टों के बजाय IIT बॉम्बे की आधिकारिक घोषणा को आधार बनाना जरूरी है.

कौन से सवाल अभी बाकी हैं?

इस पूरे मामले में आने वाले दिनों में कई सवालों के जवाब अहम होंगे. क्या साहिल की मौत की स्वतंत्र जांच के लिए अलग समिति बनेगी? जांच की समयसीमा क्या होगी? पुलिस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं? प्रोफेसर दुल्ला के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है? 18 सूत्री चार्टर की कौन-कौन सी मांगें वास्तव में लागू होती हैं?

इसके साथ यह भी देखना होगा कि IIT बॉम्बे परीक्षा में मोबाइल और AI टूल के इस्तेमाल को लेकर अपनी नीतियों में कोई बदलाव करता है या नहीं. मानसिक स्वास्थ्य सहायता, 24 घंटे मनोचिकित्सक सुविधा, शिकायत निवारण और छात्रों की प्रशासनिक भागीदारी को लेकर भी ठोस बदलावों की निगरानी होगी.

पूरे विवाद को आसान भाषा में कैसे समझें?

सीधी भाषा में कहें तो IIT बॉम्बे का विवाद एक परीक्षा घटना के बाद छात्र साहिल वाकोड़े की मौत से शुरू हुआ और अब यह संस्थान की छात्र सहायता और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े बड़े सवालों तक पहुंच गया है.

छात्रों ने स्वतंत्र जांच और कई संस्थागत सुधारों की मांग की. डायरेक्टर शिरीष केदारे ने 18 सूत्री चार्टर पर हस्ताक्षर किए हैं. प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला की डीनशिप तत्काल प्रभाव से निलंबित की गई है और संस्थान ने अपने पहले बयान पर माफी मांगी है. वहीं, डायरेक्टर के इस्तीफे की खबर को IIT बॉम्बे ने स्पष्ट रूप से खारिज किया है.

IIT बॉम्बे छात्र की मौत पर IIT मद्रास फैकल्टी एसोसिएशन ने क्या कहा?

IIT मद्रास फैकल्टी एसोसिएशन ने 18 सितंबर 2026 को IIT बॉम्बे के एक छात्र की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उसके परिवार और दोस्तों के प्रति संवेदना जताई है. एसोसिएशन ने कहा कि इस घटना की परिस्थितियों की निष्पक्ष और पूरी तरह जांच की जानी चाहिए. संगठन ने मांग की कि मामले की जांच संबंधित संस्थागत और कानूनी अधिकारियों द्वारा पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से की जाए तथा छात्र और उसके परिवार की गरिमा का सम्मान हो. एसोसिएशन ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से या मीडिया में जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए, क्योंकि जल्दबाजी में निष्कर्ष और सोशल मीडिया पर अटकलें संबंधित लोगों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. इसके अलावा, जांच में यह भी देखा जाना चाहिए कि अकादमिक कदाचार से जुड़े मामलों में छात्रों को पर्याप्त सहायता, काउंसलिंग और सुरक्षा उपाय मिलते हैं या नहीं. संगठन ने छात्रों, शिक्षकों, प्रशासन, मीडिया और आम लोगों से संवेदनशीलता बरतने और तथ्यों के सामने आने तक प्रक्रिया को आगे बढ़ने देने की अपील की है. बयान पर फैकल्टी एसोसिएशन IIT मद्रास के अध्यक्ष प्रो. एथवराजा मणि के हस्ताक्षर हैं.

इसलिए फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि आरोप, जांच और आधिकारिक तौर पर साबित तथ्यों को अलग-अलग रखा जाए. साहिल की मौत से जुड़ी परिस्थितियों पर अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी. इसी तरह 18 मांगों पर भी असली स्थिति उनके लागू होने के बाद ही पता चलेगी.

 

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About the Author

Shivam Tiwari

Shivam Tiwari

शिवम तिवारी, जी न्यूज में डिजिटल कंटेंट राइटर हैं और पत्रकारिता में करीब 2 साल से अधिक का अनुभव रखते हैं. यूपी के प्रयागराज के रहने वाले शिवम ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है. खबरों की नब्ज पकड़कर उन्हें आसान और साफ भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. शिवम शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों पर खास फोकस रखते हैं. इनमें स्कूल-कॉलेज एडमिशन, बोर्ड परीक्षाएं, प्रवेश परीक्षाएं, सरकारी नौकरियां, रिजल्ट, कॉम्पिटिटिव एग्जाम, करियर टिप्स, करेंट अफेयर्स और जनरल नॉलेज जैसे टॉपिक्स शामिल हैं.इसके अलावा शिवम, टीचर्स, प्रोफेसर्स, एक्सपर्ट्स और करियर काउंसलर्स की सलाह के आधार पर कंटेंट तैयार करते हैं. ये IIT-JEE, NEET, GATE, CLAT और CUET जैसे नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम से जुड़े विषयों पर गहराई से काम करते हैं और छात्रों के लिए उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराते हैं. शिवम तिवारीर से संपर्क करने के लिए आप उन्हें shivam.tiwari@india.com पर ईमेल कर सकते हैं.
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