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जर्मनी-रूस में संघर्ष की नौबत: दो विश्व युद्धों के ‘जानी-दुश्मन’ फिर आमने-सामने, खुफिया चीफ के अलर्ट की वजह यूक्रेन?

दुनिया में जंग का एक नया मोर्चा खुलने की आहट सुनाई दे रही है. भीषण जंग के बादल तेजी से यूरोप के आसमान में मंडरा रहे हैं. खतरा बहुत बड़ा है, क्योंकि खतरे की घंटी जर्मनी के खुफिया चीफ ने बजाई है. दो-दो विश्व युद्ध में एक-दूसरे का सीना छलनी कर चुके देश एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं, क्योंकि वजह गंभीर है.

जर्मनी-रूस में संघर्ष की नौबत: दो विश्व युद्धों के ‘जानी-दुश्मन’ फिर आमने-सामने, खुफिया चीफ के अलर्ट की वजह यूक्रेन?
Image Credit: (रॉयटर्स)

जर्मनी की खुफिया एजेंसी के चीफ मार्टिन येगर ने रूस के साथ बहुत जल्द सैन्य संघर्ष का अलर्ट जारी किया है. संसद में सभी खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों की सालाना सुनवाई के दौरान येगर ने कहा, 'रूस के साथ जिस टकराव का हम सामना कर रहे हैं, उसने अब एक नई और ज्यादा खतरनाक शक्ल ले ली है.'इस खबर से कई देशों के बाशिदों के दिलों की धड़कन बढ़ा दी है, क्योंकि यूरोप में तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच जर्मनी और रूस में युद्ध की नौबत आ चुकी है. खतरा इसलिए भी बड़ा है क्योंकि पिछले दो विश्व युद्धों के ‘जानी दुश्मन’ अब एक बार फिर आमने-सामने हैं. जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट इसके कई मायने निकाल रहे हैं.

'जर्मनी का इंतहान ले रहा रूस'

जर्मनी के फॉरेन इंटेलिजेंस चीफ मार्टिन येगर ने कुछ हालिया घटनाक्रमों का उदाहरण देते हुए बताया कि खतरा किस हद तक बढ़ गया है. उन्होंने अपनी बात कुछ तथ्यों के साथ दोहराते हुए दावा किया कि रूस के साथ टकराव में एक नया और ज्यादा आक्रामक पहलू देखने को मिला है. रूस 'शैडो वॉर' चला रहा है इसलिए जर्मनी में हमारे ठिकानों को निशाना बनाकर हमले करने का खतरा बढ़ गया है.  येगर ने कहा, 'लीपजिग में हुआ हमला इसका सिर्फ छोटी सी मिसाल भर है.' 

येगर ने कहा, 'रूस हमारी इंतहान ले रहा है और वो बारीकी से यह देख रहा है कि हम इन स्थितियों से कैसे निपटते हैं. क्रेमलिन के नेतृत्व के नजरिए से देखें तो जर्मनी की ओर से दिखाई पड़ने वाली कोई भी कमजोरी रूस को हम पर दबाव और बढ़ाने का मौका देती है.'

रूसी रणनीति 'डिकोड‍‍' वजह यूक्रेन!

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में कहा था कि रूस का किसी देश पर हमला करने का इरादा नहीं है. लेकिन अगर हमारे खिलाफ आक्रामकता की जाती है तो जवाब देने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं होगा. इस बयान के हवाले से येगर ने कहा, 'मॉस्को अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बल प्रयोग करने को तैयार है. रूसी खुफिया एजेंसियों की जर्मनी के खिलाफ गतिविधियां आक्रामक हो रही हैं. 

उन्होंने कहा कि जर्मनी को आगे और हस्तक्षेप की कोशिशों तथा डराने-धमकाने की घटनाओं के लिए तैयार रहना होगा. इसमें परमाणु हमले की धमकियां भी शामिल हैं. मॉस्को हमारी कमजोरी पर दांव लगा रहा है. हमें इसका मजबूती से सामना करना होगा.

टकराव की वजहें

भौगोलिक स्थिति: येगर ने छोटी-छोटी कड़ियों को जोड़ते हुए बताया कि फिलहाल ऐसे कोई संकेत नहीं हैं कि रूस नाटो के क्षेत्र पर बड़े पैमाने पर तत्काल हमला करने वाला है. लेकिन यह भी एकदम साफ है कि रूस, जर्मनी का ध्यान भटकाने के लिए बाल्टिक देशों जैसे एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया में कम तीव्रता वाली सैन्य गतिविधियों में शामिल हो सकता है.

जर्मनी और बाल्टिक देशों के बीच में पोलैंड (Poland) है. पोलैंड के रास्ते यूरोप के हथियार यूक्रेन पहुंचते हैं, जिनका इस्तेमाल वो रूस के खिलाफ करता है.

यूक्रेन: जर्मनी बीते कई सालों से यूक्रेन को सबसे ज्यादा हथियार और सैन्य उपकरण निर्यात कर रहा है. इसके साथ ही जर्मनी ने यूक्रेन को दिया जाने वाला फंड भी बढ़ाया है इसलिए जर्मनी के चांसलर मर्ज, पुतिन की आंखों में खटक रहे हैं.

मध्य पूर्व में रूस: शांति के लिए पुतिन ने हर तरह से मदद का भरोसा दिया है. जर्मनी समेत पूरे यूरोप को इस बात से बड़ी चिढ़ है. पश्चिमी देश जानते हैं कि ईरान को रूस का बैकअप है. यूरोपीय देशों को इससे भी दिक्कत है.

जर्मन फौज ने की पुष्टि

जर्मनी की सेना के अधिकारियों ने बार-बार चेतावनी दी है कि रूस ड्रोन और साइबर हमलों के जरिए एक हाइब्रिड अभियान चला रहा है. बताते चलें कि जर्मनी के सैन्य अधिकारियों ने अगस्त में लीपजिग एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले की कथित कोशिश के लिए भी रूस को जिम्मेदार ठहराया था.

दो-दो विश्व युद्धों में टकरा चुके हैं रूस और जर्मनी

पहले विश्व युद्ध (1914-1918) में रूसी साम्राज्य और जर्मन साम्राज्य आमने-सामने थे. जर्मनी ने रूस के खिलाफ जंग का ऐलान किया था क्योंकि रूस ने जर्मनी के सहयोगी ऑस्ट्रिया-हंगरी के खिलाफ कदम उठाया था. इसी युद्ध के कारण रूस में 1917 की क्रांति हुई और रूस को एक संधि के तहत पीछे हटना पड़ा था.

दूसरा विश्व युद्ध (1939–1945) नाजी जर्मनी और सोवियत संघ के बीच हुआ, जबकि दोनों के बीच हमला न करने की संधि थी. 22 जून 1941 को जर्मनी ने सोवियत संघ पर अचानक हमला कर दिया. आगे पूर्वी मोर्चे पर सोवियत सेनाओं ने भारी नुकसान के बावजूद बर्लिन पर कब्जा करके 1945 में जर्मनी को बुरी तरह हरा दिया था.

इस तरह दो-दो विश्व युद्धों में एक दूसरे से सीधे टकरा चुके जर्मनी और रूस एक बार फिर आमने-सामने हैं.

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About the Author

Shwetank Ratnamber

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श्वेतांक रत्नाम्बर वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 22 वर्षों से ज्यादा का व्यापक अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय (देश-दुनिया) खबरों की डेस्क पर कार्यरत हैं. समसामयिक मुद्दों, वैश्विक राजनीति और कूटनीति पर गहरी समझ रखने वाले श्वेतांक जटिल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और राजनीतिक समीकरणों का सटीक विश्लेषण करने के विशेषज्ञ हैं.Zee News डिजिटल से पहले उन्होंने ज़ी मीडिया नेटवर्क के ग्लोबल न्यूज़ चैनल 'WION' के साथ काम किया है. इस दौरान उन्होंने 'Gravitas', 'The West Asia Post' और 'One Africa' जैसे कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्राइम-टाइम शोज़ के हिंदी प्रोडक्शन और इंटरप्रिटेशन में अहम भूमिका निभाई. 2004 से शुरू हुए अपने पत्रकारिता करियर में श्वेतांक ने रिपोर्टिंग और एंकरिंग के साथ-साथ चार लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की व्यापक ग्राउंड कवरेज की है.जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा के बाद मास कम्युनिकेशन और पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स डिग्री हासिल करने वाले श्वेतांक लंबे समय से 'प्रेस क्लब ऑफ इंडिया' (PCI) के सम्मानित सदस्य हैं.आप श्वेतांक रत्नाम्बर से सीधे shwetank.ratnamber@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), मेटा (फेसबुक) और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.' 
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