India forex reserves drop: कुछ दिन पहले देश का विदेशी मुद्रा भंडार चढ़कर 795 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया था. लेकिन उसके बाद इसमें लगातार गिरावट आ रही है. आरबीआई (RBI) के आंकड़ों के अनुसार 25 सितंबर को खत्म हुए हफ्ते में फॉरेक्स रिजर्व 18.34 बिलियन डॉलर कम होकर 757.46 बिलियन डॉलर रह गया. रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचने के बाद विदेशी मुद्रा भंडार में तीन हफ्ते से लगातार गिरावट आ रही है. पिछले हफ्ते भी यह 15 बिलियन डॉलर घट गया था. रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचने से पहले लगातार 10 हफ्ते तक इसमें तेजी आई थी. तीन हफ्ते के दौरान यह 38 अरब डॉलर नीचे खिसक गया. आखिर भारत के फॉरेक्स रिजर्व में यह गिरावट क्यों आई और इसका क्या असर होगा?
फॉरेक्स रिजर्व में गिरावट को महज डॉलर निकासी के तौर पर देखना सही नहीं होगा. आरबीआई (RBI) का रुपये को संभालने के लिए फॉरेन करेंसी मार्केट में हस्तक्षेप, फॉरेन एसेट के दाम में बदलाव, सोने में गिरावट और इंटरनेशनल मार्केट के हालत असर डालते हैं. 25 सितंबर को खत्म हुए हफ्ते में सबसे ज्यादा नुकसान फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) को हुआ है. यह 15.57 अरब डॉलर कम होकर 615.41 अरब डॉलर रह गया है. रुपये को गिरावट से संभालने के लिए आरबीआई (RBI) ने सितंबर में करीब 11.8 अरब डॉलर की बिक्री की है. इसके अलावा रीवैल्यूएशन में हुए घाटे के कारण भी रिजर्व में गिरावट देखने को मिली है.
विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट क्यों आई, इसे जानने से पहले आपको यह समझना जरूरी है कि Forex Reserve में क्या-क्या होता है?
फॉरेन करेंसी एसेट (FCA) रिजर्व का सबसे बड़ा हिस्सा होता है. इसमें डॉलर समेत दूसरी विदेशी मुद्राओं में रखे गए एसेट शामिल होते हैं. केंद्रीय बैंक के पास रखा सोना भी विदेशी मुद्रा भंडार का हिस्सा होता है. सोने के दाम बढ़ने या घटने से इसकी डॉलर वैल्यू घटती-बढ़ती है. IMF में देश की रिजर्व पोजीशन में भी समय के साथ बदलाव होता रहता है. इससे साफ है देश के विदेशी मुद्रा भंडार में केवल यूएस डॉलर ही नहीं होता. यह चार अलग-अलग हिस्सों को मिलाकर तैयार होता है.
25 सितंबर को खत्म हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 18.34 अरब डॉलर गिर गया. फॉरेक्स रिजर्व में यह लगातार तीसरे हफ्ते आई गिरावट है. गिरावट के पीछे RBI का विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करना बड़ा कारण माना जा रहा है. जब रुपये पर डॉलर के मुकाबले प्रेशर आता है और बाजार में डॉलर की डिमांड बढ़ती है तो RBI जरूरत के अनुसार अपने रिजर्व से डॉलर की बिक्री करता है. इससे रुपये पर अचानक पड़ने वाला प्रेशर को कंट्रोल किया जाता है. इसके बदले RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में मौजूद डॉलर बेस्ड एसेट घट सकते हैं. यही कारण है कि रुपये को स्थिर रखने के लिए RBI की तरफ से किया गया हस्तक्षेप फॉरेक्स रिजर्व में गिरावट का अहम कारण बन जाता है.
सितंबर में रुपये पर लगातार दबाव देखा गया. रुपया डॉलर के मुकाबले 96 के लेवल को पार कर गया. रुपये की कमजोरी के पीछे कई इंटरनेशनल और घरेलू कारण काम करते हैं. इन कारणों में-
भारत अपनी जरूरत के क्रूड ऑयल का बड़ा हिस्सा आयात करता है. जब इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल महंगा होता है तो भारतीय कंपनियों को तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ती है. इससे डॉलर की मांग बढ़ जाती है.
11 से 25 सितंबर के बीच रिजर्व बैंक ने रुपये को संभालने के लिए 22.4 अरब डॉलर की बिक्री की है. RBI की तरफ से किया गया हस्तक्षेप आमतौर पर बाजार के उतार-चढ़ाव को कम करने और सिस्टेमेटिक तरीके से काम करने की स्थिति बनाए रखने पर फोकस्ड है. रिजर्व बैंक का असली मकसद यही रहता है कि रुपया हमेशा मजबूत रहे.
25 सितंबर को खत्म हुए हफ्ते में देश के फॉरेन करेंसी एसेट (FCA) में 15.57 अरब डॉलर की कमी आई. यह पहले के मुकाबले गिरकर 615.41 अरब डॉलर रह गया. कुल फॉरेक्स रिजर्व में FCA का सबसे बड़ा हिस्सा होता है. इसलिए RBI की तरफ से डॉलर की बिक्री किये जाने पर सबसे पहला असर इस पर ही दिखाई देता है. इसे आप इस तरह समझ सकते हैं कि RBI की तरफ से डॉलर की बिक्री की जाती है और बाजार में डॉलर की उपलब्धता बढ़ जाती है. इससे RBI का फॉरेन करेंसी एसेट (FCA) कम हो जाता है और इसका असर फॉरेक्स रिजर्व पर देखने को मिलता है.
यदि किसी हफ्ते फॉरेक्स रिजर्व में 18 अरब डॉलर की गिरावट आई तो इसका मतलब यह नहीं हुआ कि RBI ने इतने मूल्य के डॉलर बाजार में बेच दिये. रिजर्व की वैल्यू पर रीवैल्यूएशन का भी असर पड़ता है. RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में यूरो, पाउंड, येन जैसी दूसरी विदेशी एसेट भी होते हैं. यदि इन करेंसी की डॉलर के मुकाबले कीमत बदलती है तो रिजर्व की डॉलर वैल्यू भी बदलती है.
25 सितंबर को खत्म हुए हफ्ते में देश के गोल्ड रिजर्व की वैल्यू करीब 2.59 अरब डॉलर घटकर 108.70 अरब डॉलर रह गई. RBI के गोल्ड रिजर्व का आंकड़ा डॉलर में तय होता है. इसलिए गोल्ड की कीमत के साथ-साथ डॉलर का एक्सचेंज रेट और मूल्यांकन में बदलाव भी इसकी डॉलर वैल्यू को प्रभावित करता है. यानी यह जरूरी नहीं कि सोने की मात्रा कम हो. रेट कम होने पर गोल्ड रिजर्व घट सकता है और रेट बढ़ने पर इसमें उछाल आ सकता है. इसका मतलब यह हुआ कि गोल्ड रिजर्व की डॉलर वैल्यू कम होना और RBI के पास मौजूद सोना कम होना दोनों अलग-अलग प्वाइंट हैं.
इस हफ्ते महज FCA और गोल्ड रिजर्व ही नहीं घटे. SDR 97 मिलियन डॉलर गिकर 18.64 अरब डॉलर रह गया. दूसरी तरफ IMF के पास भारत की रिजर्व पोजीशन 86 मिलियन डॉलर घटकर 4.80 अरब डॉलर रह गई. हालांकि, कुल गिरावट में इन दोनों का हिस्सा FCA के मुकाबले काफी छोटा है. यानी इस हफ्ते सबसे बड़ा बदलाव फॉरेन करेंसी एसेट (FCA) में देखा गया.
फॉरेक्स रिजर्व में गिरावट का सीधा असर रुपये से जुड़ा हुआ है. यदि आरबीआई (RBI) मार्केट में डॉलर की बिक्री करता है तो मार्केट में डॉलर की उपलब्धता बढ़ सकती है. इससे रुपये पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिलती है. यानी रुपये की गिरावट को डॉलर की बिक्री से रोका जा सकता है. लेकिन यदि ग्लोबल लेवल पर डॉलर मजबूत बना रहता है और भारत में डॉलर की डिमांड बढ़ती है तो RBI को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में रिजर्व पर दबाव बना रह सकता है. RBI रुपये में गिरावट रोकने के लिए डॉलर की बिक्री करता है लेकिन डॉलर बेचने से उसके विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है.
रुपये की कमजोरी का असर महंगाई पर भी पड़ता है. भारत बड़ी मात्रा में क्रूड ऑयल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनरी, कुछ इंडस्ट्रियल कच्चा सामान और दूसरी चीजों का आयात करता है. यदि रुपया कमजोर होता है तो सामान खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ते हैं. उदाहरण के लिए यदि किसी इम्पोर्ट की जाने वाली चीज की कीमत इंटरनेशनल मार्केट में 100 डॉलर है तो डॉलर महंगा होने पर भारतीय आयातक को उसके लिए ज्यादा रुपये देने होंगे. इसका असर प्रोडक्ट और सर्विस की कीमत पर भी पड़ सकता है.
सबसे अहम बात यह देखना होगी कि आने वाले हफ्तों में फॉरेक्स रिजर्व का ट्रेंड कैसा रहता है. यदि रिजर्व कुछ समय तक घटने के बाद स्थिर हो जाता है तो इसकी तस्वीर अलग होगी. लेकिन यदि लगातार कई हफ्ते तक बड़ी गिरावट बनी रहती है और इसके साथ रुपये पर दबाव, महंगा क्रूड और बढ़ता आयात बिल भी बना रहता है तो विदेशी मुद्रा बाजार की स्थितियां ज्यादा चुनौतीपूर्ण मानी जा सकती हैं.
देश का विदेशी मुद्रा भंडार 795 अरब डॉलर के रिकॉर्ड लेवल से गिरकर 757.46 अरब डॉलर पर आ गया. रुपये पर दबाव, डॉलर की बढ़ती डिमांड, महंगा क्रूड और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बदलाव इस तस्वीर के अहम हिस्से हैं. RBI रुपये की तेज गिरावट को रोकने के लिए डॉलर की बिक्री कर रहा है. इसका असर भी विदेशी मुद्रा भंडार पर दिखाई दे रहा है. लेकिन सबसे अहम बात यह है कि फॉरेक्स रिजर्व का घटना चिंता की बात है. बाजार की नजर इस पर रहेगी कि रुपये पर दबाव कितने समय तक बना रहता है और RBI को उसे संभालने के लिए अपने रिजर्व का इस्तेमाल करना पड़ता है.