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पहलगाम में आतंकियों के जरिए की गई घिनौनी वारदात के बाद भारत ने पाकिस्तानी आतंकवादी अड्डों को घर में घुसकर तबाह किया था. दोनों देशों के बीच तनाव इतना चरम पर पहुंच गया था कि भारत ने पाकिस्तान के जहाजों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था और पाकिस्तान ने भी यही फैसला भारत के विमानों के संबंध में लिया था. हालांकि इस फैसले का दोनों ही देशों को भारी नुकसान भी उठाना पड़ रहा है. इसी निपटने के लिए भारत अब चीन की तरफ देख रहा है. कई मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से खबर सामने आई है कि भारत इस चीन के होटन (Hotan), शिनजियांग के रास्ते से एयर कॉरिडोर की तरफ देख रहा है.
पाकिस्तान ने अप्रैल 2025 के बाद भारतीय विमानों के लिए अपने एयरस्पेस पर पाबंदी लगाई थी और उसके बाद इसे कई बार बढ़ाया गया. ताजा NOTAM के मुताबिक भारतीय विमानों और भारतीय एयरलाइंस के जरिए संचालित, स्वामित्व वाले या लीज पर लिए गए विमानों के लिए पाकिस्तान का एयरस्पेस 24 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध नहीं है. इसका मतलब यह है कि भारत से यूरोप या उत्तरी अमेरिका की तरफ जाने वाले कई विमानों को पाकिस्तान के ऊपर से गुजरने वाले छोटे रास्ते के बजाय वैकल्पिक और लंबे रास्ते लेने पड़ रहे हैं. जिसके चलते समय ज्यादा बर्बाद हो रहा है, ईंधन की खपत बढ़ती है, जिससे एयर लाइन की ऑपरेटिंग कोस्ट में भी इजाफा होता है. उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक अलग-अलग रूट पर उड़ान का समय करीब 45 मिनट से 2 घंटे तक बढ़ा है.
यही कारण है कि भारत अब वैकल्पिक रूट की तलाश कर रहा है. अगर भारत को चीन का होटन एयर कॉरिडोर मिल जाता है, तो भारतीय विमान लेह की तरफ से चीनी एयरस्पेस में दाखिल होकर होटन से गुजरते हुए मध्य एशिया और फिर यूरोप की तरफ जा सकते हैं. कहा जा रहा है कि भारत और चीन के बीच इस मुद्दे पर राजनयिक बातचीत चल रही है, लेकिन अभी चीन ने इसकी मंजूरी नहीं दी है. नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू ने 29 सितंबर को बताया कि इस मुद्दे पर राजनयिक स्तर पर चीन से बातचीत चल रही है और भारत होटन रूट के लिए जोर दे रहा है. मंजूरी मिलती है, तो एयरलाइंस का समय, ईंधन और पैसे की भारी बचत होगी.

होटन चीन के शिनजियांग का एक क्षेत्र है. जो चीन के पश्चिमी हिस्से में, भारत के लद्दाख के उत्तर-पूर्व में मौजूद है. इसकी भौगोलिक स्थिति भारत से यूरोप जाने वाली उड़ानों के लिए संभावित वैकल्पिक हवाई रास्ते के लिहाज से महत्वपूर्ण है. Hotan खुद कोई एयर कॉरिडोर नहीं है. 'Hotan Route' या 'Hotan Corridor' उस संभावित हवाई मार्ग को कहा जा रहा है, जिसमें शिनजियांग के Hotan के आसपास के चीनी एयरस्पेस का इस्तेमाल हो सकता है.
रॉयटर्स ने 2025 की रिपोर्ट में बताया था कि भारत जिस एयरस्पेस की मांग की गई थी, वह ऊंचे पहाड़ों से घिरा हुआ है और PLA के Western Theater Command के दायरे में आता है. इलाके में सैन्य गतिविधियां भी होती हैं. इसलिए नागरिक विमानों के लिए इस एयरस्पेस को खोलना चीन के लिए सुरक्षा और सैन्य-ऑपरेशनल सवाल भी पैदा करता है. ऐसे में असली सवाल सिर्फ यह नहीं है कि Hotan रूट से कितना समय और पैसा बचेगा, बल्कि यह है कि क्या बीजिंग अपने रणनीतिक एयरस्पेस का इस्तेमाल भारतीय विमानों के लिए खोलने को तैयार होगा?
इस सवाल का जवाब देना किसी भी विशेषज्ञ के लिए आसान नहीं है. हालांकि इसमें यह स्कोप नजर आ रहा है कि इसी समय भारत-चीन के बीच सीधी हवाई कनेक्टिविटी धीरे-धीरे बहाल हो रही है. China Southern ने सितंबर 2026 में Guangzhou–Delhi सेवा फिर शुरू की है. यह बताता है कि दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क में कुछ गतिविधि बढ़ी हैं, हालांकि इससे Hotan corridor की मंजूरी सुनिश्चित नहीं होती.

पाकिस्तानी एयरस्पेस से बचने की वजह से उड़ानों में लगभग 45 से 2 घंटें का अतिरिक्त समय लगाना पड़ रहा है. अगर होटन से गुजरने की इजाजत भारत को मिल जाती है, तो समय कम लगेगा, समय कम लगने के चलते ईंधन की खपत कम होगी.
मई 2025 में Air India ने सरकार को भेजे पत्र में अनुमान लगाया था कि पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद रहने से उसे 12 महीनों में 50 अरब रुपये से ज्यादा यानी करीब $600 मिलियन का अतिरिक्त आर्थिक असर पड़ेगा. एयरलाइन ने इसकी वजह अतिरिक्त ईंधन खपत और अतिरिक्त क्रू लागत बताई थी.
इसके अलावा नवंबर 2025 में न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने एयर इंडिया के एक दस्तावेज का हवाला देते हुए बताया कि पाकिस्तान के एयरस्पेस बंद होने की वजह से कुछ लंबी दूरी की उड़ानों में ईंधन लागत 29% तक बढ़ गई, जबकि यात्रा समय कुछ रूटों पर 3 घंटे तक बढ़ा. इसी दस्तावेज में Hotan/Xinjiang एयरस्पेस के इस्तेमाल से $1.13 मिलियन प्रति सप्ताह बचत का अनुमान भी था.
ये आंकड़े सिर्फ एक एयर लाइन के हैं. अगर भारत के पूरे एविएशन सेक्टर के अनुमानित नुकसान की बात करें 300 करोड़ रुपये प्रतिमाह के से ज्यादा बताया जा रहा है. बिजनेस स्टैंडर्ड ने अप्रैल 2025 में एविएशन सेक्टर के अनुमानों की बुनियाद पर बताया था कि बताया कि भारतीय एयरलाइंस पर अतिरिक्त लागत ₹307 करोड़ प्रति माह से ज्यादा हो सकती है. इसमें लंबा रूट, अतिरिक्त ईंधन और दूसरे ऑपरेशनल खर्च शामिल थे.