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सऊदी अरब और हूतियों के बीच जारी जंग अब मक्का तक पहुंच गई है. सऊदी अरब की तरफ से दावा किया जा रहा है कि मंगलवार की शाम 6.50 बजे सऊदी एयर डिफेंस ने एक ड्रोन को मक्का के दक्षिण में इंटरसेप्ट करके नष्ट कर दिया है. सऊदी अरब का कहना है कि उसने यह ड्रोन मक्का शहर के पवित्र और प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही मार गिरा दिया. जबकि दूसरी तरफ हूतियों ने इस घटना से अपना पल्ला झाड़ लिया है. उन्होंने कहा कि यमन की तरफ से मक्का या किसी भी दूसरे इस्लामी पवित्र स्थल को कोई खतरा नहीं है.
सोशल मीडिया पर भी कुछ वीडियो वायल हो रहे हैं, जिनमें कोई एक चीज आसमान में उड़ती दिखाई दे रही है और दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो उसी ड्रोन का है, जो मक्का के पवित्र स्थल की तरफ जा रहा था. हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती, क्योंकि फैक्ट चैकर्स ने इस वीडियो को मक्का की बजाए मदीना शहर का बताया है, जो 2025 का है.
सऊदी अरब का मक्का-मदीना पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र और आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है. यही कारण है कि इस खबर पर दुनियाभर में चर्चा भी रही है. हालांकि पवित्र स्थल की पवित्रता उसी तरह कायम है, लेकिन आज से 47 साल पहले इस मुकद्दस जगह पर कुछ हथियारबंद लोगों ने कब्जा कर लिया था. यह संघर्ष लगभग दो हफ्तों तक चला था. घटना 20 नवंबर 1979 को हुई थी. जिसे 'Grand Mosque Seizure' के नाम से भी जाना जाता है.

दरअसल 20 नवंबर 1979 की सुबह जब लोग पवित्र काबा के आसपास फजर की नमाज (सुबह) पढ़ रहे थे, नमाज खत्म हुई, तो सब अपने रब के आगे हाथ फैलाकर दुआ मांगने लगे. इसी बीच कुछ लोग उठे, जो दिखने में महिलाओं की तरह थे, उनके हाथों में बदूकें भी थीं. कुछ ही वक्त बाद गोलियां भी गूंजने लगीं. वहां मौजूद सभी लोग दहशत में आ गए और चीखते-चिल्लाते हुए भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन भागने की कोशिश नाकाम हो गई, क्योंकि हमलावरों ने पहले ही दरवाजे बंद कर दिए थे.

दरअसल इन सभी हमलावरों का नेतृत्व जुहैमैन अल-ओतैबी कर रहा था. जिसका मानना था कि उसका साला (मोहम्मद बिन अब्दुल्लाह अल कहतानी) अल्लाह के रास्ते पर है और उसे वे लोग 'मेहदी' मानते थे, साथ ही वो यह भी चाहते थे कि बाकी मुसलमान भी कहतानी को मेहदी मानें. इसके अलावा उनका यह विरोध सऊदी के राजशाही घराने के खिलाफ भी था. उनका मानना था कि सऊदी का शाही परिवार इस्लाम के सिद्धांतों से दूर होता जा रहा है और पश्चिमी देशों के प्रभाव में आकर आधुनिकीकरण को बढ़ावा दे रहा है. उनका तर्क था कि मेहदी आ चुके हैं, अब उनके नेतृत्व में इस्लामी व्यवस्था स्थापित होनी चाहिए और मौजूदा भ्रष्ट शासन को हटना चाहिए.
इस्लामी मान्यताओं के मुताबिक, 'महदी' भविष्य की एक ऐसी धार्मिक हस्ती है, जिनके बारे में हदीसों में कहा गया है कि वे दुनिया के अंत के करीब आएंगे और फिर से पूरी दुनिया में न्याय स्थापित करेंगे. जुहैमैन और उसके साथियों का मानना था कि कहतानी ही महदी हैं.

खैर, सऊदी अरब की सेना ने स्थिति को अपने कंट्रोल में लेने के लिए अंदर घुसने की कोशिश की लेकिन उन्हें नाकामी का सामना करना पड़ा, क्योंकि सभी दरवाजे बंद होने के चलते सेनाएं दीवार के जरिए अंदर दाखिल होना चाहती थी और जैसे ही सैनिक दीवार चढ़ते थे, तो अंदर मौजूद हमलावर गोलियां बरसाने लगते थे. हमलावरों ने अंदर अपनी पकड़ को इतना मजबूत बना लिया था कि सऊदी अरब की सेना कई दिनों तक कुछ नहीं कर पाई. दूसरी तरफ विद्रोहियों ने बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं को भी अपने कब्जे में ले रखा था.

कई दिनों की जिद्दोजहद के बाद सऊदी अरब ने फ्रांसीसी कमांडो एक्सपर्ट्स से मदद ली. दोनों ने मिलकर रणनीति बनाई. गैस छोड़ी, जगह-जगह स्नाइपर तैनात किए गए और फिर हालात को अपने कब्जे में लिया. हालांकि यह सब इतनी आसानी से नहीं हुआ, इसके बदले में सैकड़ों लोगों की जान गई और बड़ी तादाद में जायरीन जख्मी हुए थे. काबा के प्रांगण का संगमरमर खून से सना हुआ था, हवा में बारूद की बदबू फैली हुई थी. जुहैमैन और उसके कई साथी जिंदा पकड़े गए और बाद में सऊदी सरकार ने उन्हें सार्वजनिक रूप से मौत की सजा सुनाई.