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मक्का में ड्रोन की दस्तक और 1979 का खौफनाक हमला: जब काबा पर कब्जे के बाद दो हफ्ते तक चला था खूनी संघर्ष

मक्का के पास ड्रोन इंटरसेप्ट किए जाने की घटना ने 1979 के उस खौफनाक घटनाक्रम की यादें ताजा कर दीं, जब जुहैमैन अल-ओतैबी के नेतृत्व में हथियारबंद लोगों ने मस्जिद अल-हरम पर कब्जा कर लिया था। करीब दो हफ्ते चले संघर्ष में सैकड़ों लोग मारे गए थे.

मक्का में ड्रोन की दस्तक और 1979 का खौफनाक हमला: जब काबा पर कब्जे के बाद दो हफ्ते तक चला था खूनी संघर्ष
Image Credit: AI की मदद से बनाई गई तस्वीर

सऊदी अरब और हूतियों के बीच जारी जंग अब मक्का तक पहुंच गई है. सऊदी अरब की तरफ से दावा किया जा रहा है कि मंगलवार की शाम 6.50 बजे सऊदी एयर डिफेंस ने एक ड्रोन को मक्का के दक्षिण में इंटरसेप्ट करके नष्ट कर दिया है. सऊदी अरब का कहना है कि उसने यह ड्रोन मक्का शहर के पवित्र और प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही मार गिरा दिया. जबकि दूसरी तरफ हूतियों ने इस घटना से अपना पल्ला झाड़ लिया है. उन्होंने कहा कि यमन की तरफ से मक्का या किसी भी दूसरे इस्लामी पवित्र स्थल को कोई खतरा नहीं है.

सोशल मीडिया पर भी कुछ वीडियो वायल हो रहे हैं, जिनमें कोई एक चीज आसमान में उड़ती दिखाई दे रही है और दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो उसी ड्रोन का है, जो मक्का के पवित्र स्थल की तरफ जा रहा था. हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती, क्योंकि फैक्ट चैकर्स ने इस वीडियो को मक्का की बजाए मदीना शहर का बताया है, जो 2025 का है.

सऊदी अरब का मक्का-मदीना पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र और आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है. यही कारण है कि इस खबर पर दुनियाभर में चर्चा भी रही है. हालांकि पवित्र स्थल की पवित्रता उसी तरह कायम है, लेकिन आज से 47 साल पहले इस मुकद्दस जगह पर कुछ हथियारबंद लोगों ने कब्जा कर लिया था. यह संघर्ष लगभग दो हफ्तों तक चला था. घटना 20 नवंबर 1979 को हुई थी. जिसे 'Grand Mosque Seizure' के नाम से भी जाना जाता है.

क्या था 1979 का Grand Mosque Seizure?

दरअसल 20 नवंबर 1979 की सुबह जब लोग पवित्र काबा के आसपास फजर की नमाज (सुबह) पढ़ रहे थे, नमाज खत्म हुई, तो सब अपने रब के आगे हाथ फैलाकर दुआ मांगने लगे. इसी बीच कुछ लोग उठे, जो दिखने में महिलाओं की तरह थे, उनके हाथों में बदूकें भी थीं. कुछ ही वक्त बाद गोलियां भी गूंजने लगीं. वहां मौजूद सभी लोग दहशत में आ गए और चीखते-चिल्लाते हुए भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन भागने की कोशिश नाकाम हो गई, क्योंकि हमलावरों ने पहले ही दरवाजे बंद कर दिए थे.

काबा में हमला करने वाले लोग कौन थे?

दरअसल इन सभी हमलावरों का नेतृत्व जुहैमैन अल-ओतैबी कर रहा था. जिसका मानना था कि उसका साला (मोहम्मद बिन अब्दुल्लाह अल कहतानी) अल्लाह के रास्ते पर है और उसे वे लोग 'मेहदी' मानते थे, साथ ही वो यह भी चाहते थे कि बाकी मुसलमान भी कहतानी को मेहदी मानें. इसके अलावा उनका यह विरोध सऊदी के राजशाही घराने के खिलाफ भी था. उनका मानना था कि सऊदी का शाही परिवार इस्लाम के सिद्धांतों से दूर होता जा रहा है और पश्चिमी देशों के प्रभाव में आकर आधुनिकीकरण को बढ़ावा दे रहा है. उनका तर्क था कि मेहदी आ चुके हैं, अब उनके नेतृत्व में इस्लामी व्यवस्था स्थापित होनी चाहिए और मौजूदा भ्रष्ट शासन को हटना चाहिए.

महदी कौन होता है?

इस्लामी मान्यताओं के मुताबिक, 'महदी' भविष्य की एक ऐसी धार्मिक हस्ती है, जिनके बारे में हदीसों में कहा गया है कि वे दुनिया के अंत के करीब आएंगे और फिर से पूरी दुनिया में न्याय स्थापित करेंगे. जुहैमैन और उसके साथियों का मानना था कि कहतानी ही महदी हैं.

Who is Imam Mehdi

खैर, सऊदी अरब की सेना ने स्थिति को अपने कंट्रोल में लेने के लिए अंदर घुसने की कोशिश की लेकिन उन्हें नाकामी का सामना करना पड़ा, क्योंकि सभी दरवाजे बंद होने के चलते सेनाएं दीवार के जरिए अंदर दाखिल होना चाहती थी और जैसे ही सैनिक दीवार चढ़ते थे, तो अंदर मौजूद हमलावर गोलियां बरसाने लगते थे. हमलावरों ने अंदर अपनी पकड़ को इतना मजबूत बना लिया था कि सऊदी अरब की सेना कई दिनों तक कुछ नहीं कर पाई. दूसरी तरफ विद्रोहियों ने बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं को भी अपने कब्जे में ले रखा था.

कई दिनों की जिद्दोजहद के बाद सऊदी अरब ने फ्रांसीसी कमांडो एक्सपर्ट्स से मदद ली. दोनों ने मिलकर रणनीति बनाई. गैस छोड़ी, जगह-जगह स्नाइपर तैनात किए गए और फिर हालात को अपने कब्जे में लिया. हालांकि यह सब इतनी आसानी से नहीं हुआ, इसके बदले में सैकड़ों लोगों की जान गई और बड़ी तादाद में जायरीन जख्मी हुए थे. काबा के प्रांगण का संगमरमर खून से सना हुआ था, हवा में बारूद की बदबू फैली हुई थी. जुहैमैन और उसके कई साथी जिंदा पकड़े गए और बाद में सऊदी सरकार ने उन्हें सार्वजनिक रूप से मौत की सजा सुनाई.

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Tahir Kamran

Tahir Kamran

Zee News में नेशनल डेस्क पर देश–विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरें लिखते हैं. करियर का आगाज 2015 से 'पंजाब केसरी' ग्रुप के उर्दू अखबार ‘हिंद समाचार’ से किया, जहां वे कंटेट राइटर से पेज डिजाइनर तक पहुंचे. इसके बाद उर्दू, हिंदी और पंजाबी - तीनों भाषाओं में काम करने का मौका मिला. 2018 में डिजिटल की तरफ कूच करते हुए पंजाब केसरी ग्रुप की उर्दू वेबसाइट की लॉन्चिंग टीम का नेतृत्व किया. इसके बाद 2020 में 'Zee Salaam' ज्वाइन किया, यहां भी वेबसाइट को लॉन्च करने के साथ-साथ तीन साल टीम का नेतृत्व भी किया. इसी दौरान ZEE Delhi NCR वेबसाइट भी लॉन्च हुई, जिसमें उनका अहम योगदान रहा. 2023 में India Daily Live की लॉन्चिंग टीम के साथ काम किया और शुरुआती दिनों में हिंदी के अलावा पंजाबी, तमिल, तेलुगु और गुजराती वेबसाइट टीमों को मैनेज किया. अक्टूबर 2024 में फिर से Zee Media में में वापसी करते हुए नेशनल टीम का हिस्सा बने. तकनीक में दिलचस्पी की वजह से उन्होंने React.js और वेब डिजाइनिंग सीखी. यही कारण है कि उनकी खबरों में HTML-CSS के छोटे-छोटे ग्राफिक्स दिख जाते हैं, जो मुश्किल बातों को भी आसान बना देते हैं. करियर की शुरुआत में कुछ दिनों तक फोटो स्टूडियो में भी काम किया, जहां कैमरा, Adobe Photoshop और ग्राफिक डिजाइनिंग सीखी, जो आज भी उनके डिजिटल काम में मदद करता है. उर्दू शायरी से प्यार अलग ही है. ग़ज़लें, नज़्में, गीत भी लिखते हैं और कई अखबारों में उनकी शायरी छप भी चुकी हैं. राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, अनवर जलालपुरी खुशबीर सिंह शाद और नवाज देवबंदी, माजिद देवबंदी  जैसे शायरों के इंटरव्यू व बातचीत का अनुभव भी उनके पास है. आप tahir.kamran@india.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facbook से जुड़ सकते हैं. 
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