जिनपिंग जहां जाएंगे, वहां स्पेस से भी होगी निगहबानी! सैटेलाइट से ऐसे चलता है चीन का हाईटेक सुरक्षा चक्र
नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सुरक्षा सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स और हाई-टेक नेटवर्क के जरिए उन पर पैनी नजर रखी जाती है.
नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत पहुंच चुके हैं. जब भी दुनिया के सबसे ताकतवर और प्रभावशाली नेताओं में शुमार शी जिनपिंग किसी विदेशी दौरे पर जाते हैं, तो उनकी सुरक्षा की चर्चा पूरी दुनिया में होती है. जिनपिंग की सुरक्षा सिर्फ जमीन पर तैनात कमांडो या बुलेटप्रूफ गाड़ियों तक सीमित नहीं होती, बल्कि स्पेस यानी अंतरिक्ष से भी उनके हर कदम पर पैनी नजर रखी जाती है.
चीन दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जो स्पेस आधारित टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अपने सुप्रीम लीडर की सुरक्षा के लिए करता है. आइए जानते हैं कि अंतरिक्ष के जरिए किस तरह शी जिनपिंग का यह हाईटेक सुरक्षा चक्र काम करता है-
बाइडू नेविगेशन सिस्टम से निगरानी
चीन का अपना स्वतंत्र बाइडू (BeiDou) सैटेलाइट नेटवर्क है, जो अमेरिका के GPS नेटवर्ट की तरह ही काम करता है. जब भी शी जिनपिंग का काफिला किसी विदेशी दौरे या फिर घरेलू यात्रा पर जाता है, तो मिलिट्री-ग्रेड बाइडू सैटेलाइट्स उनकी गाड़ियों की सटीक लोकेशन ट्रैक करते रहते हैं. सैटेलाइट का डेटा सीधे बीजिंग के कमांड सेंटर और उनके क्लोज प्रोटेक्शन ग्रुप यानी CGB के पास लाइव रहता है. इससे चीन को अपनी वीवीआईपी सुरक्षा के लिए किसी अन्य देश के नेविगेशन सिस्टम पर निर्भर नहीं रहना पड़ता.
जासूसी और रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट्स का जाल
ड्रैगन के पास स्पेस में 1,900 से ज्यादा सैटेलाइट्स का बड़ा नेटवर्क है, जिसमें सैकड़ों हाई-रिजॉल्यूशन रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट्स शामिल हैं. राष्ट्रपति जिनपंग के किसी भी देश या शहर में दौरे से पहले, ये जासूसी सैटेलाइट्स उस पूरे इलाके, होटलों, रूट और आसपास की इमारतों की हाई-डेफिनिशन तस्वीरें और टोपोग्राफिकल डेटा लेकर चीनी सुरक्षा एजेंसियों को देती हैं, इससे जिनपिंग की सुरक्षा में यह फायदा होता है कि किसी भी तरह के खतरे को पहले ही जान लिया जाता है.
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हैक-प्रूफ क्वांटम सैटेलाइट कम्युनिकेशन
शी जिनपिंग की सुरक्षा टीम कम्यूनिकेशन के लिए चीन के एडवांस क्वांटम सैटेलाइट जैसे QUESS नेटवर्क का इस्तेमाल करती है. विदेशी यात्रा के दौरान जिनपिंग और उनकी कमांड टीम अंतरिक्ष के जरिए जो भी खुफिया डेटा या बातचीत साझा करती है, वह पूरी तरह क्वांटम-एनक्रिप्टेड होती है. यानी इसे कोई हैक नहीं कर सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस तकनीक को दुनिया की किसी भी बड़ी खुफिया एजेंसी से भी भेदना या हैक करना लगभग नामुमकिन माना जाता है.
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